अस-सजदा · 22/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعْرَضَ عَنْهَا ۚ إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِينَ مُنتَقِمُونَ ۝٢٢
Wa man azlamu mimman zukkira bi aayaati rabbihee summa a`rada `anhaa; innaa minal mujrimeena muntaqimmon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख़्श को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذُكِّرَ – नसीहत दी गई, याद दिलाई गई
  • آيَاتِ رَبِّهِ – अपने रब की निशानियाँ और आयतें
  • أَعْرَضَ – मुँह मोड़ लिया, उपेक्षा की
  • الْمُجْرِمِينَ – अपराधियों, गुनाहगारों
  • مُنتَقِمُونَ – बदला लेने वाले, प्रतिशोध लेने वाले

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला सबसे बड़े ज़ुल्म का ज़िक्र कर रहे हैं। अल्लाह फ़रमाता है: उस शख्स से बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के ज़रिए नसीहत दी जाए, उसे सीधे रास्ते की तरफ बुलाया जाए, उसके सामने हक़ और सच्चाई के दलीलें पेश की जाएँ, और फिर भी वह उनसे मुँह मोड़ ले, उन पर ध्यान न दे, और उन्हें अपने दिल में जगह न दे?

यह वास्तव में सबसे बड़ा ज़ुल्म है — ज़ुल्म अपनी रूह पर, ज़ुल्म अपने ईमान पर, और ज़ुल्म अपनी नजात पर। क्योंकि अल्लाह ने इंसान को हिदायत के रास्ते दिखाए, रसूल भेजे, किताबें उतारीं, और हर इंसान के अंदर समझने की ताकत रखी। जब यह सब कुछ मौजूद हो और इंसान फिर भी अंधा बना रहे, तो इससे बड़ा ज़ुल्म और क्या हो सकता है?

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम ऐसे अपराधियों से ज़रूर बदला लेंगे। यहाँ "अपराधी" उन लोगों को कहा गया है जो अल्लाह की आयतों से मुँह मोड़ते हैं, कुफ्र और गुनाहों पर डटे रहते हैं, और नसीहत को सुनकर भी उस पर अमल नहीं करते। अल्लाह का वादा है कि ऐसे लोगों को वह ज़रूर पकड़ेगा और उन्हें उनके किए का बदला देगा — चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि जब कभी कुरआन की कोई आयत सुनें, जब कभी कोई नेक बात हम तक पहुँचे, तो उसे दिल से लगाएँ, उस पर अमल करें। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है — जो भी उसकी तरफ लौट आए, अल्लाह उसे माफ कर देता है। लेकिन जो लोग हिदायत के बाद भी अंधे बने रहें, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है।

आओ हम अपने दिलों को नरम करें, अल्लाह की आयतों पर गौर करें, और उन पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को सफल बनाएँ। अल्लाह तआला हम सबको हिदायत पर चलने की तौफीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अस-सजदा

20وَأَمَّا الَّذِينَ فَسَقُوا فَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا وَقِيلَ لَهُمْ ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
और जिन लोगों ने बदकारी की उनका ठिकाना तो (बस) जहन्नुम है वह जब उसमें से निकल जाने का इरादा करेंगे तो उसी में फिर ढकेल दिए जाएँगे और उन से कहा जाएगा कि दोज़ख़ के जिस अज़ाब को तुम झुठलाते थे अब उसके मज़े चखो
21وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنَ الْعَذَابِ الْأَدْنَىٰ دُونَ الْعَذَابِ الْأَكْبَرِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें
22وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعْرَضَ عَنْهَا ۚ إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِينَ مُنتَقِمُونَ
और जिस शख़्श को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे
23وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُن فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था
24وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे
अस-सजदाकुरान सूची
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अनुवाद — अस-सजदा 22

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Tuesday, August 18, 2026

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