अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اتَّقِ اللهَ: अल्लाह का भय रखो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
- الْكَافِرِينَ: काफ़िर (इनकार करने वाले) — जो अल्लाह और उसके रसूल को नहीं मानते।
- الْمُنَافِقِينَ: मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) — जो ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, लेकिन दिल में कुछ और रखते हैं।
- عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला।
- حَكِيمًا: पूर्ण ज्ञान और तदबीर वाला, हर काम में हिकमत रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी (ﷺ)! तुम अल्लाह की तक़्वा पर क़ायम रहो — यानी उसके हुक्मों पर अमल करते रहो और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते रहो। तुम्हारी यह हालत मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा नमूना है, क्योंकि जब नबी ख़ुद तक़्वा पर डटे रहेंगे, तो उम्मत भी उसी राह पर चलेगी। यह बात सिर्फ़ आप (ﷺ) के लिए नहीं, बल्कि हर उस शख़्स के लिए है जो अल्लाह से मुहब्बत रखता है — तक़्वा ही वह ज़रिया है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
फिर अल्लाह तआला आपको हिदायत देता है कि काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की बात न मानें। काफ़िर मक्का के थे जो दीन को कमज़ोर करना चाहते थे, और मुनाफ़िक़ मदीना के थे जो दिल में कुफ़्र छिपाए हुए थे और मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश करते थे। यानी उनकी सलाह, उनके दबाव और उनके बहकावे से बिल्कुल प्रभावित न हों। जो बात शरीअत के ख़िलाफ़ हो, उसे किसी भी हालत में क़बूल न करें — चाहे वह कितना ही बड़ा दबाव क्यों न हो।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक अल्लाह सब कुछ जानने वाला और पूर्ण हिकमत वाला है।" यह आप (ﷺ) के लिए तसल्ली है — यानी आप उनकी परवाह न करें, न उनके ईमान लाने की चिंता करें, न उनकी साज़िशों से घबराएँ। अल्लाह को उनकी हर चाल का पूरा इल्म है, और वह हर काम में हिकमत रखता है — जिसे चाहता है हिदायत देता है, जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है। यह सब उसकी हिकमत के मुताबिक़ है।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन की ज़िंदगी का असूल यही है — अल्लाह का भय, उसकी रज़ा की तलाश, और हर उस चीज़ से बचना जो उसकी नाराज़गी का सबब बने। चाहे दुनिया कितनी भी बहकाए, चाहे काफ़िर और मुनाफ़िक़ कितनी भी कोशिश करें, हमें अपने रब की राह पर क़ायम रहना है। और यही वह रास्ता है जो इंसान को इज़्ज़त, सुकून और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको तक़्वा अपनाने और नबी (ﷺ) की सुन्नत पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-3 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 1
सूरा अल-अहज़ाब आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ नबी खुदा ही से डरते रहो और काफिरों और…सूरा आयत 1/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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