अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاتَّبِعْ: और आप अनुसरण करें, पालन करें।
- مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ: जो कुछ आपकी ओर वह्य (प्रकाशना) की जाती है।
- مِن رَّبِّكَ: आपके पालनहार की ओर से।
- خَبِيرًا: सब कुछ जानने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को निर्देश दे रहा है कि वे उस वह्य (प्रकाशना) का पूर्ण रूप से अनुसरण करें जो उनके पालनहार की ओर से उतारी जा रही है — चाहे वह क़ुरआन हो या सुन्नत। यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो अल्लाह पर ईमान रखता है। हमें भी अपने जीवन के हर क्षेत्र में क़ुरआन और सुन्नत को ही अपना मार्गदर्शक बनाना चाहिए।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह हर उस कर्म से पूर्ण रूप से अवगत है जो तुम करते हो — चाहे वह छोटा हो या बड़ा, छिपा हो या खुला। उसके ज्ञान से कोई चीज़ बाहर नहीं है। वह तुम्हारे अच्छे कर्मों का अच्छा बदला देगा और बुरे कर्मों का उचित हिसाब लेगा। यह बात हमारे लिए एक चेतावनी भी है और खुशखबरी भी — चेतावनी इसलिए कि हम बुराई से बचें, और खुशखबरी इसलिए कि हमारा कोई भी अच्छा काम अल्लाह की नज़र से छिपा नहीं रहता।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान की ज़िंदगी का नक्शा अल्लाह की वह्य (प्रकाशना) होनी चाहिए। जब हम क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में चलते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है और हमारे कर्म सही दिशा में जाते हैं। अल्लाह का यह ज्ञान कि वह हमारे हर काम को देख रहा है, हमें अच्छाई की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है। यही ईमान की असली मिठास है — यह जानना कि हमारा रब हमेशा हमारे साथ है, हमें देख रहा है और हमारे हर अच्छे काम की क़द्र करेगा।
इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों! हमें अपनी ज़िंदगी के हर पहलू — चाहे वह इबादत हो, व्यापार हो, पारिवारिक मामले हों या समाज के साथ व्यवहार — में अल्लाह की वह्य को ही अपना इमाम बनाना चाहिए। यही हमारी सफलता की कुंजी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए — आमीन।
📜 आयत 1-4 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 2
सूरा अल-अहज़ाब आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास जो ''वही''…सूरा आयत 2/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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