अल-अहज़ाब · 13/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَإِذْ قَالَت طَّائِفَةٌ مِّنْهُمْ يَا أَهْلَ يَثْرِبَ لَا مُقَامَ لَكُمْ فَارْجِعُوا ۚ وَيَسْتَأْذِنُ فَرِيقٌ مِّنْهُمُ النَّبِيَّ يَقُولُونَ إِنَّ بُيُوتَنَا عَوْرَةٌ وَمَا هِيَ بِعَوْرَةٍ ۖ إِن يُرِيدُونَ إِلَّا فِرَارًا ۝١٣
Wa iz qaalat taaa`ifatum minhum yaaa ahla Yasriba laa muqaamaa lakum farji`oo; wa yastaazina fareequm minhumun Nabiyya yaqooloona inna buyootanaa `awrah; wa maa hiya bi`awratin iny yureedoona illaa firaaraa
📖 हिंदी अर्थ
और अब उनमें का एक गिरोह कहने लगा था कि ऐ मदीने वालों अब (दुश्मन के मुक़ाबलें में ) तुम्हारे कहीं ठिकाना नहीं तो (बेहतर है कि अब भी) पलट चलो और उनमें से कुछ लोग रसूल से (घर लौट जाने की) इजाज़त माँगने लगे थे कि हमारे घर (मर्दों से) बिल्कुल ख़ाली (गैर महफूज़) पड़े हुए हैं - हालाँकि वह ख़ाली (ग़ैर महफूज़) न थे (बल्कि) वह लोग तो (इसी बहाने से) बस भागना चाहते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • यस्रिब (يَثْرِبَ): मदीना का प्राचीन नाम।
  • لا مُقَامَ: ठहरने की कोई जगह नहीं, यानी यहाँ टिकना बेकार है।
  • عَوْرَةٌ: खुली हुई, असुरक्षित, जिस पर दुश्मन का खतरा हो।
  • فِرَارًا: युद्ध से भागना।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के एक गिरोह ने मदीना के मोमिनों को पुकार कर कहा: "ऐ यस्रिब वालो! यहाँ (खंदक के मैदान में) तुम्हारे लिए ठहरने की कोई जगह नहीं है, इसलिए वापस अपने घरों की ओर लौट जाओ।" वे लोगों को युद्ध से हतोत्साहित करना चाहते थे और उनके दिलों में डर पैदा करना चाहते थे।

इसी तरह, उन्हीं मुनाफ़िक़ों में से एक और गिरोह (बनू सलमा और बनू हारिसा) नबी ﷺ के पास आकर युद्ध से वापस जाने की इजाज़त माँगता था। वे बहाना बनाते थे कि "हमारे घर खुले और असुरक्षित हैं, हमें डर है कि दुश्मन उन पर हमला न कर दे।" लेकिन अल्लाह ने उनके इस बहाने को झूठा करार दिया — उनके घर बिल्कुल सुरक्षित थे, न तो वे खुले थे और न ही उन पर कोई खतरा था। असल में वे केवल युद्ध से भागना चाहते थे, और यह उनका मात्र एक झूठा बहाना था।

दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और जिहाद के समय सच्चे मोमिन की पहचान यह है कि वह डटा रहता है, जबकि मुनाफ़िक़ हमेशा भागने के बहाने ढूँढता है। अल्लाह हर दिल का हाल जानता है — चाहे हम कितने भी अच्छे बहाने बना लें, अल्लाह की नज़र में हमारी नीयत साफ़ है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके दीन की खातिर किसी भी कुर्बानी के लिए तैयार रहें। याद रखिए, अल्लाह उन्हीं को प्यार करता है जो सच्चे और साबित क़दम हों। जो लोग दुनिया के डर से भागते हैं, वे अल्लाह के अज़ाब से नहीं भाग सकते — सच्ची कामयाबी अल्लाह की राह में सब्र और इस्तिक़ामत (स्थिरता) में है।

🎧 सुनें

📜 आयत 11-15 — अल-अहज़ाब

11هُنَالِكَ ابْتُلِيَ الْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوا زِلْزَالًا شَدِيدًا
यहाँ पर मोमिनों का इम्तिहान लिया गया था और ख़ूब अच्छी तरह झिंझोड़े गए थे।
12وَإِذْ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ مَّا وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ إِلَّا غُرُورًا
और जिस वक्त मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ्र का) मरज़ था कहने लगे थे कि खुदा ने और उसके रसूल ने जो हमसे वायदे किए थे वह बस बिल्कुल धोखे की टट्टी था।
13وَإِذْ قَالَت طَّائِفَةٌ مِّنْهُمْ يَا أَهْلَ يَثْرِبَ لَا مُقَامَ لَكُمْ فَارْجِعُوا ۚ وَيَسْتَأْذِنُ فَرِيقٌ مِّنْهُمُ النَّبِيَّ يَقُولُونَ إِنَّ بُيُوتَنَا عَوْرَةٌ وَمَا هِيَ بِعَوْرَةٍ ۖ إِن يُرِيدُونَ إِلَّا فِرَارًا
और अब उनमें का एक गिरोह कहने लगा था कि ऐ मदीने वालों अब (दुश्मन के मुक़ाबलें में ) तुम्हारे कहीं ठिकाना नहीं तो (बेहतर है कि अब भी) पलट चलो और उनमें से कुछ लोग रसूल से (घर लौट जाने की) इजाज़त माँगने लगे थे कि हमारे घर (मर्दों से) बिल्कुल ख़ाली (गैर महफूज़) पड़े हुए हैं - हालाँकि वह ख़ाली (ग़ैर महफूज़) न थे (बल्कि) वह लोग तो (इसी बहाने से) बस भागना चाहते हैं
14وَلَوْ دُخِلَتْ عَلَيْهِم مِّنْ أَقْطَارِهَا ثُمَّ سُئِلُوا الْفِتْنَةَ لَآتَوْهَا وَمَا تَلَبَّثُوا بِهَا إِلَّا يَسِيرًا
और अगर ऐसा ही लश्कर उन लोगों पर मदीने के एतराफ से आ पड़े और उन से फसाद (ख़ाना जंगी) करने की दरख्वास्त की जाए तो ये लोग उसके लिए (फौरन) आ मौजूद हों
15وَلَقَدْ كَانُوا عَاهَدُوا اللَّهَ مِن قَبْلُ لَا يُوَلُّونَ الْأَدْبَارَ ۚ وَكَانَ عَهْدُ اللَّهِ مَسْئُولًا
और (उस वक्त) अपने घरों में भी बहुत कम तवक्क़ुफ़ करेंगे (मगर ये तो जिहाद है) हालाँकि उन लोगों ने पहले ही खुदा से एहद किया था कि हम दुश्मन के मुक़ाबले में (अपनी) पीठ न फेरेंगे और खुदा के एहद की पूछगछ तो (एक न एक दिन) होकर रहेगी
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 13

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Tuesday, August 18, 2026

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