Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْمُنَافِقُونَ – मुनाफ़िक़ (दिखावे के मुसलमान, जो दिल में कुफ़्र रखते हैं)
- الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ – वे लोग जिनके दिलों में शक और कमज़ोर ईमान की बीमारी है
- غُرُورًا – धोखा, झूठा वादा, बेकार बात
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस समय का ज़िक्र करती है जब अहज़ाब (समूहों) की जंग में मुसलमान मुश्किल हालात से गुज़र रहे थे। दुश्मनों ने मदीना का घेरा डाल रखा था और मुसलमानों की परीक्षा का वक़्त था। उस वक़्त मुनाफ़िक़ (दिखावे के मुसलमान) और वे लोग जिनके दिलों में शक और ईमान की कमज़ोरी की बीमारी थी, बोल उठे कि "अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे जो वादा किया था वह सिर्फ़ धोखा था, झूठ था, बेकार बात थी।"
यानी जब अल्लाह के रसूल ﷺ ने मुसलमानों को फ़तह और ग़लबा (विजय) की ख़ुशख़बरी दी थी, तो इन कमज़ोर ईमान वालों ने उस वादे को झूठा और धोखा समझा। उन्होंने कहा कि हमें जो वादे दिए गए थे वे महज़ धोखा थे, कोई हक़ीक़त नहीं रखते।
यह उन लोगों की कमज़ोर नज़र थी। उन्होंने सिर्फ़ मौजूदा मुश्किल हालात को देखा और अल्लाह के वादे पर भरोसा नहीं किया। जबकि सच्चे मोमिनों का हाल यह था कि उन्होंने अल्लाह के वादे को सच्चा माना और उस पर पक्का यक़ीन रखा, चाहे हालात कितने ही कठिन क्यों न हों।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और परेशानी के वक़्त में भी अल्लाह के वादों पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह तआला कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। जो लोग मुश्किल वक़्त में अल्लाह के वादों पर शक करते हैं, उनके दिलों में ईमान की कमज़ोरी होती है। लेकिन जो लोग पक्के ईमान वाले होते हैं, वे हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करता।
आज भी जब हम पर मुश्किलें आती हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह का वादा सच्चा है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर सच्चे दिल से भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें ज़रूर कामयाबी देता है। मुश्किलों के पीछे आसानी छिपी होती है। अल्लाह हमें पक्का ईमान और सच्चा भरोसा अता करे। आमीन।
📜 आयत 10-14 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 12
सूरा अल-अहज़ाब आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस वक्त मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में…सूरा आयत 12/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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