सबा · 33/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَقَالَ الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا بَلْ مَكْرُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ إِذْ تَأْمُرُونَنَا أَن نَّكْفُرَ بِاللَّهِ وَنَجْعَلَ لَهُ أَندَادًا ۚ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ وَجَعَلْنَا الْأَغْلَالَ فِي أَعْنَاقِ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٣٣
Wa qaalal lazeenastud`ifoo lillazeenas takbaroo bal makrul laili wannahaari iz taamuroonanaaa an nakfura billaahi wa naj`ala lahooo andaadaa; wa asarrun nadaamata lammaa ra awul `azaab; wa ja`alnal aghlaala feee a`naaqil lazeena kafaroo; hal yujzawna illaa maa kanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और कमज़ोर लोग बड़े लोगों से कहेंगे (कि ज़बरदस्ती तो नहीं की मगर हम खुद भी गुमराह नहीं हुए) बल्कि (तुम्हारी) रात-दिन की फरेबदेही ने (गुमराह किया कि) तुम लोग हमको खुदा न मानने और उसका शरीक ठहराने का बराबर हुक्म देते रहे (तो हम क्या करते) और जब ये लोग अज़ाब को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएँगे और जो लोग काफिर हो बैठे हम उनकी गर्दनों में तौक़ डाल देंगे जो कारस्तानियां ये लोग (दुनिया में) करते थे उसी के मुवाफिक़ तो सज़ा दी जाएगी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَكْرُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ: रात-दिन की चालें और धोखे।
  • أَندَادًا: समान और साझीदार (जिन्हें अल्लाह के बराबर ठहराया जाए)।
  • أَسَرُّوا النَّدَامَةَ: पछतावे को अपने दिलों में छिपा लिया।
  • الأَغْلَالَ: गले की ज़ंजीरें (लोहे के तौक)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के उस दृश्य को पेश करती है जब अल्लाह के सामने सारे राज़ खुल जाएँगे। उस दिन कमज़ोर और बेबस किए गए लोग (जो दुनिया में सच्चाई की राह पर चलने से रोके गए थे) अपने बड़ों और सरदारों से कहेंगे: "नहीं, हमारा गुमराह होना तुम्हारी उन चालों का नतीजा था जो तुम रात-दिन चलते रहे। तुम हमें लगातार यही सिखाते रहे कि अल्लाह को छोड़कर दूसरों को उसका साझीदार बनाओ और उसकी इबादत से मुँह मोड़ो।" यानी वे साफ़ कहेंगे कि हमारी गुमराही का असली कारण तुम्हारा दबाव, बहकावा और धोखा था।

जब वे आज़ाब (यातना) को अपनी आँखों से देख लेंगे, तो सभी — चाहे बड़े हों या छोटे — अपने किए पर शर्मिंदा होंगे और पछतावे को अपने दिलों में छिपाएँगे। लेकिन वह पछतावा उनके किसी काम न आएगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने काफ़िरों के गले में ज़ंजीरें डाल दीं। यह सज़ा उन्हें बिल्कुल उसी के बराबर दी जा रही है जो वे दुनिया में करते थे — यानी अल्लाह के साथ कुफ़्र और शिर्क करना, और अपने बुरे कर्मों में लगे रहना।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हमें उन लोगों की बातों से बचना चाहिए जो हमें अल्लाह की राह से भटकाना चाहते हैं — चाहे वे कितने भी बड़े, ताकतवर या प्रभावशाली क्यों न हों। हमें अपनी अक़्ल और दिल की सुननी चाहिए, और सीधे अल्लाह से जुड़े रहना चाहिए। याद रखें, क़यामत के दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा, और न ही कोई हमारी मदद कर सकेगा। आज हमें जो आज़ादी मिली है — सच्चाई को जानने और उस पर अमल करने की — वह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। इस नेमत की क़द्र करें, और उन लोगों से दूर रहें जो हमें अल्लाह से दूर करना चाहते हैं। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 31-35 — सबा

31وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن نُّؤْمِنَ بِهَٰذَا الْقُرْآنِ وَلَا بِالَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ ۗ وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الظَّالِمُونَ مَوْقُوفُونَ عِندَ رَبِّهِمْ يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ الْقَوْلَ يَقُولُ الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا لَوْلَا أَنتُمْ لَكُنَّا مُؤْمِنِينَ
और जो लोग काफिर हों बैठे कहते हैं कि हम तो न इस क़ुरान पर हरगिज़ ईमान लाएँगे और न उस (किताब) पर जो इससे पहले नाज़िल हो चुकी और (ऐ रसूल तुमको बहुत ताज्जुब हो) अगर तुम देखो कि जब ये ज़ालिम क़यामत के दिन अपने परवरदिगार के सामने खड़े किए जायेंगे (और) उनमें का एक दूसरे की तरफ (अपनी) बात को फेरता होगा कि कमज़ोर अदना (दरजे के) लोग बड़े (सरकश) लोगों से कहते होगें कि अगर तुम (हमें) न (बहकाए) होते तो हम ज़रूर ईमानवाले होते (इस मुसीबत में न पड़ते)
32قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا لِلَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا أَنَحْنُ صَدَدْنَاكُمْ عَنِ الْهُدَىٰ بَعْدَ إِذْ جَاءَكُم ۖ بَلْ كُنتُم مُّجْرِمِينَ
तो सरकश लोग कमज़ोरों से (मुख़ातिब होकर) कहेंगे कि जब तुम्हारे पास (खुदा की तरफ़ से) हिदायत आयी तो थी तो क्या उसके आने के बाद हमने तुमको (ज़बरदस्ती अम्ल करने से) रोका था (हरगिज़ नहीं) बल्कि तुम तो खुद मुजरिम थे
33وَقَالَ الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا بَلْ مَكْرُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ إِذْ تَأْمُرُونَنَا أَن نَّكْفُرَ بِاللَّهِ وَنَجْعَلَ لَهُ أَندَادًا ۚ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ وَجَعَلْنَا الْأَغْلَالَ فِي أَعْنَاقِ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और कमज़ोर लोग बड़े लोगों से कहेंगे (कि ज़बरदस्ती तो नहीं की मगर हम खुद भी गुमराह नहीं हुए) बल्कि (तुम्हारी) रात-दिन की फरेबदेही ने (गुमराह किया कि) तुम लोग हमको खुदा न मानने और उसका शरीक ठहराने का बराबर हुक्म देते रहे (तो हम क्या करते) और जब ये लोग अज़ाब को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएँगे और जो लोग काफिर हो बैठे हम उनकी गर्दनों में तौक़ डाल देंगे जो कारस्तानियां ये लोग (दुनिया में) करते थे उसी के मुवाफिक़ तो सज़ा दी जाएगी
34وَمَا أَرْسَلْنَا فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
और हमने किसी बस्ती में कोई डराने वाला पैग़म्बर नहीं भेजा मगर वहाँ के लोग ये ज़रूर बोल उठेंगे कि जो एहकाम देकर तुम भेजे गए हो हम उनको नहीं मानते
35وَقَالُوا نَحْنُ أَكْثَرُ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और ये भी कहने लगे कि हम तो (ईमानदारों से) माल और औलाद में कहीं ज्यादा है और हम पर आख़ेरत में (अज़ाब) भी नहीं किया जाएगा
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अनुवाद — सबा 33

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सूरा आयत 33/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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