अन-निसा · 71/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا خُذُوا حِذْرَكُمْ فَانفِرُوا ثُبَاتٍ أَوِ انفِرُوا جَمِيعًا ۝٧١
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo khuzoo hizrakum fanfiroo subaain awin firoo jamee`aa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानवालों (जिहाद के वक्त) अपनी हिफ़ाज़त के (ज़राए) अच्छी तरह देखभाल लो फिर तुम्हें इख्तेयार है ख्वाह दस्ता दस्ता निकलो या सबके सब इकट्ठे होकर निकल खड़े हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خُذُوا حِذْرَكُمْ: अपनी सुरक्षा का ध्यान रखो, सावधानी और सतर्कता अपनाओ।
  • فَانفِرُوا: निकल पड़ो, जिहाद के लिए तैयार होकर बाहर जाओ।
  • ثُبَاتٍ: गिरोहों और टुकड़ियों में, यानी अलग-अलग समूहों में।
  • جَمِيعًا: एक साथ, सब मिलकर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! अपने दुश्मनों से सतर्क रहो और उनका मुकाबला करने के लिए हर संभव तैयारी रखो। यानी अपनी शक्ति, हथियार, रणनीति और सुरक्षा के सभी ज़रूरी साधन जुटाओ, ताकि दुश्मन को कभी भी तुम पर हावी होने का मौका न मिले। यह सिर्फ जंग के लिए नहीं, बल्कि हर मामले में होशियारी और एहतियात का पैगाम है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि जब जिहाद का वक़्त आए, तो दो तरीकों में से एक अपनाओ: या तो अलग-अलग गिरोहों और टुकड़ियों में निकलो, ताकि दुश्मन पर लगातार दबाव बना रहे और उनके इलाकों में खलल पड़ता रहे, या फिर सब मिलकर एक साथ निकलो, जब मौका ऐसा हो कि पूरी ताकत एक जगह लगाना ज़्यादा मुफीद हो। यानी हालात के हिसाब से रणनीति बनाओ — कभी छोटे-छोटे दस्ते भेजो, कभी पूरी फौज लेकर निकलो। यह सब दुश्मन को कमज़ोर करने और उसका नुकसान करने के लिए है।

इस आयत में अल्लाह तआला मोमिनों को सिखा रहा है कि ईमान सिर्फ ज़बान से नहीं, बल्कि अमल से होता है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, वे बेपरवाह नहीं होते, बल्कि अपनी ताकत और साज़ो-सामान में कमी नहीं छोड़ते। यही तक़वा और हिम्मत की निशानी है। अल्लाह को प्यारे वो बंदे हैं जो अपने दीन की हिफाज़त के लिए जान-ओ-माल से कुर्बानी देने को तैयार रहते हैं।

और याद रखो, यह सिर्फ जंग का हुक्म नहीं, बल्कि ज़िंदगी के हर पहलू में होशियारी की तालीम है। एक मोमिन को चाहिए कि वह अपने दुश्मनों की चालों से बेखबर न रहे, बल्कि हमेशा चौकन्ना रहे। अल्लाह तआला ने यह हुक्म इसलिए दिया ताकि उसकी उम्मत कभी ज़लील न हो और हमेशा इज़्ज़त और ताकत के साथ जिए। जो लोग इस हुक्म पर अमल करेंगे, अल्लाह उन्हें दुनिया में कामयाबी और आख़िरत में जन्नत की खुशखबरी देता है।



📜 आयत 69-73 — अन-निसा

69وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَالرَّسُولَ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَاءِ وَالصَّالِحِينَ ۚ وَحَسُنَ أُولَٰئِكَ رَفِيقًا
और जिस शख्स ने ख़ुदा और रसूल की इताअत की तो ऐसे लोग उन (मक़बूल) बन्दों के साथ होंगे जिन्हें ख़ुदा ने अपनी नेअमतें दी हैं यानि अम्बिया और सिद्दीक़ीन और शोहदा और सालेहीन और ये लोग क्या ही अच्छे रफ़ीक़ हैं
70ذَٰلِكَ الْفَضْلُ مِنَ اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ عَلِيمًا
ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है और ख़ुदा तो वाक़िफ़कारी में बस है
71يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا خُذُوا حِذْرَكُمْ فَانفِرُوا ثُبَاتٍ أَوِ انفِرُوا جَمِيعًا
ऐ ईमानवालों (जिहाद के वक्त) अपनी हिफ़ाज़त के (ज़राए) अच्छी तरह देखभाल लो फिर तुम्हें इख्तेयार है ख्वाह दस्ता दस्ता निकलो या सबके सब इकट्ठे होकर निकल खड़े हो
72وَإِنَّ مِنكُمْ لَمَن لَّيُبَطِّئَنَّ فَإِنْ أَصَابَتْكُم مُّصِيبَةٌ قَالَ قَدْ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيَّ إِذْ لَمْ أَكُن مَّعَهُمْ شَهِيدًا
और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (जेहाद से) ज़रूर पीछे रहेंगे फिर अगर इत्तेफ़ाक़न तुमपर कोई मुसीबत आ पड़ी तो कहने लगे ख़ुदा ने हमपर बड़ा फ़ज़ल किया कि उनमें (मुसलमानों) के साथ मौजूद न हुआ
73وَلَئِنْ أَصَابَكُمْ فَضْلٌ مِّنَ اللَّهِ لَيَقُولَنَّ كَأَن لَّمْ تَكُن بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُ مَوَدَّةٌ يَا لَيْتَنِي كُنتُ مَعَهُمْ فَأَفُوزَ فَوْزًا عَظِيمًا
और अगर तुमपर ख़ुदा ने फ़ज़ल किया (और दुश्मन पर ग़ालिब आए) तो इस तरह अजनबी बनके कि गोया तुममें उसमें कभी मोहब्बत ही न थी यूं कहने लगा कि ऐ काश उनके साथ होता तो मैं भी बड़ी कामयाबी हासिल करता
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीRevelation
71आयत

अनुवाद — अन-निसा 71

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Tuesday, August 18, 2026

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