अन-निसा · 70/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
ذَٰلِكَ الْفَضْلُ مِنَ اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ عَلِيمًا ۝٧٠
Zaalikal fadlu minal laah; wa kafaa billaahi `Aleemaa
📖 हिंदी अर्थ
ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है और ख़ुदा तो वाक़िफ़कारी में बस है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَٰلِكَ (ज़ालिक): यह उस चीज़ की ओर इशारा है जिसका उल्लेख पिछली आयतों में हुआ है।
  • الْفَضْلُ (अल-फ़ज़्ल): अत्यधिक दया, उपकार और बड़ा इनाम।
  • كَفَىٰ (कफ़ा): काफ़ी है, पर्याप्त है।
  • عَلِيمًا (अलीमन): सब कुछ जानने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के लिए उस महान प्रतिफल की ओर संकेत करती है जिनका वर्णन पिछली आयतों में किया गया — अर्थात वे लोग जो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते हैं, और वे नबियों, सिद्दीक़ों (सत्यवादियों), शहीदों और सालेह (नेक) लोगों के साथ होंगे। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से उसका विशेष अनुग्रह और उपकार है, जो उसकी असीम दया से मिलता है — न कि किसी के कर्मों के बदले में। अल्लाह अपने बंदों के हाल को भली-भाँति जानता है; वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से उसकी आज्ञा का पालन करता है और कौन नहीं। वह हर एक को उसके कर्मों के अनुसार प्रतिफल देगा। यह ज्ञान अल्लाह के लिए पर्याप्त है — उसे किसी और की गवाही या सूचना की आवश्यकता नहीं, क्योंकि वह हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है, चाहे वह प्रकट हो या छिपी हुई।

फ़ायदे (लाभ एवं शिक्षाएँ):

  1. यह आयत मुसलमान को यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम उसके कर्मों से कहीं बड़ा है — वह अपने बंदों पर अपनी दया से उपकार करता है, जिससे उसकी महानता और प्रेम का एहसास होता है।
  2. अल्लाह का पूर्ण ज्ञान हमें यह सिखाता है कि हमें अपने अंदर और बाहर दोनों को सुधारना चाहिए, क्योंकि वह हमारे नीयत (इरादों) और कर्मों को पूरी तरह जानता है।
  3. यह आयत मोमिन को सब्र और स्थिरता पर प्रोत्साहित करती है — क्योंकि उसका परिश्रम और ईमान अल्लाह के पास अकारण नहीं जाता; वह उसे अवश्य पुरस्कृत करेगा।
  4. अल्लाह पर भरोसा रखने की शिक्षा मिलती है — उसका ज्ञान और उसका न्याय हर चीज़ के लिए पर्याप्त है, इसलिए हमें अपने मामलों में उसी पर निर्भर रहना चाहिए और उसी से सहायता माँगनी चाहिए।


📜 आयत 68-72 — सूरा अन-निसा

68وَلَهَدَيْنَاهُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
और उनको राहे रास्त की भी ज़रूर हिदायत करते
69وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَالرَّسُولَ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَاءِ وَالصَّالِحِينَ ۚ وَحَسُنَ أُولَٰئِكَ رَفِيقًا
और जिस शख्स ने ख़ुदा और रसूल की इताअत की तो ऐसे लोग उन (मक़बूल) बन्दों के साथ होंगे जिन्हें ख़ुदा ने अपनी नेअमतें दी हैं यानि अम्बिया और सिद्दीक़ीन और शोहदा और सालेहीन और ये लोग क्या ही अच्छे रफ़ीक़ हैं
70ذَٰلِكَ الْفَضْلُ مِنَ اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ عَلِيمًا
ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है और ख़ुदा तो वाक़िफ़कारी में बस है
71يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا خُذُوا حِذْرَكُمْ فَانفِرُوا ثُبَاتٍ أَوِ انفِرُوا جَمِيعًا
ऐ ईमानवालों (जिहाद के वक्त) अपनी हिफ़ाज़त के (ज़राए) अच्छी तरह देखभाल लो फिर तुम्हें इख्तेयार है ख्वाह दस्ता दस्ता निकलो या सबके सब इकट्ठे होकर निकल खड़े हो
72وَإِنَّ مِنكُمْ لَمَن لَّيُبَطِّئَنَّ فَإِنْ أَصَابَتْكُم مُّصِيبَةٌ قَالَ قَدْ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيَّ إِذْ لَمْ أَكُن مَّعَهُمْ شَهِيدًا
और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (जेहाद से) ज़रूर पीछे रहेंगे फिर अगर इत्तेफ़ाक़न तुमपर कोई मुसीबत आ पड़ी तो कहने लगे ख़ुदा ने हमपर बड़ा फ़ज़ल किया कि उनमें (मुसलमानों) के साथ मौजूद न हुआ
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
70आयत

अनुवाद — अन-निसा 70

सूरा अन-निसा आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है और ख़ुदा तो…

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Wednesday, September 30, 2026

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