ग़ाफिर · 3/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
غَافِرِ الذَّنبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَدِيدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ إِلَيْهِ الْمَصِيرُ ۝٣
Ghaafiriz zambi wa qaabilit tawbi shadeedil `iqaabi zit tawli laaa ilaaha illaa Huwa ilaihil maseer
📖 हिंदी अर्थ
गुनाहों का बख्शने वाला और तौबा का क़ुबूल करने वाला सख्त अज़ाब देने वाला साहिबे फज़ल व करम है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ (सबको) लौट कर जाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَافِرِ الذَّنبِ: गुनाहों को ढकने वाला, क्षमा करने वाला।
  • قَابِلِ التَّوْبِ: तौबा (पश्चाताप) को कबूल करने वाला।
  • شَدِيدِ الْعِقَابِ: सख्त अज़ाब (दंड) देने वाला।
  • ذِي الطَّوْلِ: बड़ी दया, भलाई और बेशुमार नेमतों वाला।
  • الْمَصِيرُ: अंतिम पड़ाव, लौटने की जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह तआला की उन खूबियों से रूबरू कराती है जो मोमिन के दिल में उम्मीद और खौफ दोनों पैदा करती हैं। अल्लाह पाक गुनाहों को ढकने वाला है—वह अपने बंदों के गुनाहों को न केवल माफ करता है बल्कि उन्हें ढक भी देता है, ताकि उनकी बेइज़्ज़ती न हो। वह तौबा कबूल करने वाला है; जब बंदा अपनी गलती पर पश्चाताप करता है और सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है, तो अल्लाह उसे खुशी-खुशी कबूल करता है और उसके गुनाहों को मिटा देता है। यह अल्लाह की रहमत का ऐसा दरवाज़ा है जो कभी बंद नहीं होता।

लेकिन साथ ही वह सख्त अज़ाब देने वाला भी है—उन लोगों के लिए जो जानबूझकर गुनाहों पर अड़े रहते हैं, तौबा से मुँह मोड़ते हैं और अल्लाह की नाफ़रमानी पर हठ करते हैं। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका इंसाफ़ कभी कमज़ोर नहीं पड़ता।

वह ذِي الطَّوْلِ है—यानी बड़ी भलाई, बेशुमार नेमतों और असीम दया का मालिक। वह अपने नेक बंदों पर अपनी फज़ल (कृपा) और एहसान की बारिश करता है, उन्हें तरक़्क़ी देता है और उनकी ज़रूरतें पूरी करता है। उसकी दया का कोई अंत नहीं, और उसके एहसानों का कोई हिसाब नहीं।

फिर आयत का निचोड़ यह है कि उसके सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं। सारी इबादत, सारी उम्मीद और सारा डर सिर्फ़ उसी के लिए होना चाहिए। और उसी की ओर सबका लौटना है—क़यामत के दिन हर इंसान, चाहे वह नेक हो या बदकार, उसी के सामने हाज़िर होगा। वहाँ वह हर एक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देगा—नेक को जन्नत और बदकार को उसका अंजाम।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी में उम्मीद और डर का संतुलन होना चाहिए। हम अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों, क्योंकि वह तौबा कबूल करने वाला है; और साथ ही उसके अज़ाब से बेख़ौफ़ भी न हों, क्योंकि वह सख्त अज़ाब देने वाला है। यही वह रास्ता है जो हमें सीधे अल्लाह की मोहब्बत और उसकी रज़ा तक पहुँचाता है। जो बंदा इस हक़ीक़त को समझ ले, वह अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी फरमाँबरदारी में बिताता है, और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 1-5 — सूरा ग़ाफिर

1حم
हा मीम
2تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
(इस) किताब (कुरान) का नाज़िल करना (ख़ास बारगाहे) ख़ुदा से है जो (सबसे) ग़ालिब बड़ा वाक़िफ़कार है
3غَافِرِ الذَّنبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَدِيدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ إِلَيْهِ الْمَصِيرُ
गुनाहों का बख्शने वाला और तौबा का क़ुबूल करने वाला सख्त अज़ाब देने वाला साहिबे फज़ल व करम है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ (सबको) लौट कर जाना है
4مَا يُجَادِلُ فِي آيَاتِ اللَّهِ إِلَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ
ख़ुदा की आयतों में बस वही लोग झगड़े पैदा करते हैं जो काफिर हैं तो (ऐ रसूल) उन लोगों का शहरों (शहरों) घूमना फिरना और माल हासिल करना
5كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْأَحْزَابُ مِن بَعْدِهِمْ ۖ وَهَمَّتْ كُلُّ أُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَأْخُذُوهُ ۖ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَأَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ
तुम्हें इस धोखे में न डाले (कि उन पर आज़ाब न होगा) इन के पहले नूह की क़ौम ने और उन के बाद और उम्मतों ने (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया और हर उम्मत ने अपने पैग़म्बरों के बारे में यही ठान लिया कि उन्हें गिरफ्तार कर (के क़त्ल कर डालें) और बेहूदा बातों की आड़ पकड़ कर लड़ने लगें - ताकि उसके ज़रिए से हक़ बात को उखाड़ फेंकें तो मैंने, उन्हें गिरफ्तार कर लिया फिर देखा कि उन पर (मेरा अज़ाब कैसा (सख्त हुआ)
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 3

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Wednesday, September 30, 2026

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