ग़ाफिर · 2/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ ۝٢
Tanzeelul Kitaabi minal laahil Azeezil `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(इस) किताब (कुरान) का नाज़िल करना (ख़ास बारगाहे) ख़ुदा से है जो (सबसे) ग़ालिब बड़ा वाक़िफ़कार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنزِيلُ: उतारना, अवतरित करना।
  • الْكِتَابِ: यहाँ से तात्पर्य कुरआन करीम से है।
  • الْعَزِيزِ: वह शक्तिशाली जो सब पर ग़ालिब है, जिसे कोई हरा नहीं सकता।
  • الْعَلِيمِ: वह सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह कुरआन करीम अल्लाह तआला की ओर से उतारा गया है। यह कोई इंसानी कलाम नहीं, बल्कि उस रब का पैग़ाम है जो अज़ीज़ है — यानी अपनी ताक़त और इज़्ज़त में सबसे बड़ा है, उसकी शान के आगे हर मख़लूक़ (प्राणी) झुका हुआ है। वही है जिसने इस किताब को नाज़िल करके अपनी हिकमत का इज़हार किया। वह अलीम है — यानी उसका इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है, वह जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या बेहतर है, कौन सा हिदायत का रास्ता उनके लिए सही है, और कौन सी बात उनके दिलों को सुकून देगी।

यह आयत हमें बताती है कि कुरआन महज़ एक किताब नहीं, बल्कि अल्लाह का वो ख़त है जो उसने अपने प्यारे नबी ﷺ के ज़रिए हम तक पहुँचाया है। जब यह किताब अज़ीज़ और अलीम रब की तरफ़ से आई है, तो इसमें कोई कमी नहीं हो सकती, कोई ग़लती नहीं हो सकती, और न ही इसमें कोई झूठ हो सकता है। यही वजह है कि इस किताब पर ईमान लाना, इसकी तालीमात पर अमल करना, और इसे अपनी ज़िंदगी का नक़्शा बनाना हर मुसलमान के लिए सबसे बड़ी कामयाबी है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है — कि जिस रब ने यह किताब उतारी है, वह न तो कमज़ोर है कि अपने वादों को पूरा न कर सके, और न ही ज़ाहिल है कि हमारी मुश्किलों से बेख़बर हो। वह अज़ीज़ है — इसलिए उसकी मदद हर मुसीबत में हमारे साथ है; और वह अलीम है — इसलिए वह हमारे दिल की हर बात, हर दर्द और हर ज़रूरत को जानता है। जो शख्स इस किताब को पकड़ ले, उसने उस रब का दामन पकड़ लिया जो सबसे ताक़तवर और सबसे ज़्यादा जानने वाला है।

आओ, हम इस किताब को सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित न रखें, बल्कि इसे समझें, इस पर अमल करें, और इसे अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — ग़ाफिर

1حم
हा मीम
2تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
(इस) किताब (कुरान) का नाज़िल करना (ख़ास बारगाहे) ख़ुदा से है जो (सबसे) ग़ालिब बड़ा वाक़िफ़कार है
3غَافِرِ الذَّنبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَدِيدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ إِلَيْهِ الْمَصِيرُ
गुनाहों का बख्शने वाला और तौबा का क़ुबूल करने वाला सख्त अज़ाब देने वाला साहिबे फज़ल व करम है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ (सबको) लौट कर जाना है
4مَا يُجَادِلُ فِي آيَاتِ اللَّهِ إِلَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ
ख़ुदा की आयतों में बस वही लोग झगड़े पैदा करते हैं जो काफिर हैं तो (ऐ रसूल) उन लोगों का शहरों (शहरों) घूमना फिरना और माल हासिल करना
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 2

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Tuesday, August 18, 2026

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