फुस्सिलत · 30/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ ۝٣٠
Innal lazeena qaaloo Rabbunal laahu summas taqaamoo tatanazzalu `alaihimul malaaa `ikatu allaa takhaafoo wa laa tahzanoo wa abshiroo bil Jannnatil latee kuntum too`adoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) कहा कि हमारा परवरदिगार तो (बस) ख़ुदा है, फिर वह उसी पर भी क़ायम भी रहे उन पर मौत के वक्त (रहमत के) फ़रिश्ते नाज़िल होंगे (और कहेंगे) कि कुछ ख़ौफ न करो और न ग़म खाओ और जिस बेहिश्त का तुमसे वायदा किया गया था उसकी ख़ुशियां मनाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَقَامُوا (सीधे रहे): अपने ईमान और अल्लाह की आज्ञा पर दृढ़ रहे, बिना किसी विचलन के।
  • تَتَنَزَّلُ (उतरती हैं): फ़रिश्ते उनके पास आते हैं, विशेष रूप से मृत्यु के समय।
  • أَلَّا تَخَافُوا (कि डरो मत): यहाँ "अल्ला" का अर्थ है "बशर्ते कि" या "इसलिए कि", यानी फ़रिश्ते उन्हें सांत्वना देते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए एक अत्यंत सुंदर शुभ समाचार और आश्वासन है, जिन्होंने अपने रब के रूप में केवल अल्लाह को स्वीकार किया और फिर उस पर दृढ़ रहे। "फिर सीधे रहे" का अर्थ यह है कि उन्होंने केवल ज़ुबान से ईमान नहीं लाया, बल्कि अपने विश्वास को अपने अमल, अपने चाल-चलन और अपने पूरे जीवन में उतारा। उनका तौहीद (एकेश्वरवाद) कभी विचलित नहीं हुआ, न उनका ईमान कभी डगमगाया। उन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे रहे।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह का वादा है कि मृत्यु के समय फ़रिश्ते उनके पास उतरते हैं और उन्हें तीन महान शुभ समाचार सुनाते हैं:

पहला: "डरो मत" — यानी मृत्यु से मत डरो, न उसके बाद की किसी चीज़ से। तुम्हारा अंत अच्छा है, तुम्हारा भविष्य सुरक्षित है।

दूसरा: "और उदास मत हो" — यानी जो कुछ तुम दुनिया में छोड़ रहे हो, उस पर अफ़सोस मत करो। न अपने पीछे छूटने वाले परिवार की चिंता करो, न अपनी संपत्ति और दुनियावी मामलों का ग़म खाओ। अल्लाह तुम्हारे लिए उससे बेहतर चीज़ रखता है।

तीसरा: "और खुशखबरी लो उस जन्नत की जिसका तुमसे वादा किया गया था" — यानी वही जन्नत, जिसका वादा अल्लाह ने अपने रसूलों के माध्यम से दुनिया में किया था, वह अब तुम्हारी है। यह वह जन्नत है जो हर दुख और हर परेशानी से परे है, जहाँ हमेशा की खुशियाँ और अल्लाह की रज़ा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान केवल दिल की बात नहीं है, बल्कि उसे स्थिरता और दृढ़ता की आवश्यकता है। जो लोग अपने ईमान पर सच्चे दिल से जमे रहते हैं, उन्हें अल्लाह न केवल दुनिया में सुकून देता है, बल्कि मृत्यु के समय भी फ़रिश्तों के माध्यम से उन्हें शांति और आश्वासन प्रदान करता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार ढालना चाहिए और उस पर स्थिर रहना चाहिए। जब हम अल्लाह को अपना रब मान लें और उसकी शिक्षाओं पर चलें, तो हमें किसी चीज़ का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसकी मदद हमेशा उसके वफ़ादार बंदों के साथ होती है। यही वह रास्ता है जो हमें उस शांति और सफलता तक पहुँचाता है जिसका वादा अल्लाह ने अपने ईमानवालों से किया है।



📜 आयत 28-32 — सूरा फुस्सिलत

28ذَٰلِكَ جَزَاءُ أَعْدَاءِ اللَّهِ النَّارُ ۖ لَهُمْ فِيهَا دَارُ الْخُلْدِ ۖ جَزَاءً بِمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
ख़ुदा के दुशमनों का बदला है कि वह जो हमरी आयतों से इन्कार करते थे उसकी सज़ा में उनके लिए उसमें हमेशा (रहने) का घर है,
29وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا رَبَّنَا أَرِنَا اللَّذَيْنِ أَضَلَّانَا مِنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ أَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ الْأَسْفَلِينَ
और (क़यामत के दिन) कुफ्फ़ार कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार जिनों और इन्सानों में से जिन लोगों ने हमको गुमराह किया था (एक नज़र) उनको हमें दिखा दे कि हम उनको पाँव तले (रौन्द) डालें ताकि वह ख़ूब ज़लील हों
30إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
और जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) कहा कि हमारा परवरदिगार तो (बस) ख़ुदा है, फिर वह उसी पर भी क़ायम भी रहे उन पर मौत के वक्त (रहमत के) फ़रिश्ते नाज़िल होंगे (और कहेंगे) कि कुछ ख़ौफ न करो और न ग़म खाओ और जिस बेहिश्त का तुमसे वायदा किया गया था उसकी ख़ुशियां मनाओ
31نَحْنُ أَوْلِيَاؤُكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۖ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِي أَنفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ
हम दुनिया की ज़िन्दगी में तुम्हारे दोस्त थे और आखेरत में भी तुम्हारे (रफ़ीक़) हैं और जिस चीज़ का भी तुम्हार जी चाहे बेहिश्त में तुम्हारे वास्ते मौजूद है और जो चीज़ तलब करोगे वहाँ तुम्हारे लिए (हाज़िर) होगी
32نُزُلًا مِّنْ غَفُورٍ رَّحِيمٍ
(ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी है)
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 30

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Monday, September 28, 2026

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