फुस्सिलत · 29/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا رَبَّنَا أَرِنَا اللَّذَيْنِ أَضَلَّانَا مِنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ أَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ الْأَسْفَلِينَ ۝٢٩
Wa qaalal lazeena kafaroo Rabbanaaa arinal lazaini adal laanaa minal jinni wal insi naj`alhumaa tahta aqdaaminaa liyakoonaa minal asfaleen
📖 हिंदी अर्थ
और (क़यामत के दिन) कुफ्फ़ार कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार जिनों और इन्सानों में से जिन लोगों ने हमको गुमराह किया था (एक नज़र) उनको हमें दिखा दे कि हम उनको पाँव तले (रौन्द) डालें ताकि वह ख़ूब ज़लील हों

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَرِنَا: हमें दिखा दे
  • أَضَلَّانَا: जिन्होंने हमें पथभ्रष्ट किया
  • الْأَسْفَلِينَ: सबसे निचले स्तर वाले (सबसे गहरे दर्जे के)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह भयानक दृश्य है जब काफिर लोग जहन्नम की आग में झुलस रहे होंगे और अपनी गलती पर पछता रहे होंगे। वे अपने रब से फरियाद करेंगे: "ऐ हमारे रब! हमें उन दोनों को दिखा दे जिन्होंने हमें जिन्नों और इंसानों में से पथभ्रष्ट किया।" उनका इशारा इब्लीस (शैतान) की तरफ होगा जिसने कुफ्र और गुनाह की राह सबसे पहले शुरू की, और उस इंसान की तरफ जिसने ज़ुल्म और खून-खराबा शुरू किया—यानी क़ाबिल जिसने अपने भाई हाबिल को कत्ल किया था। कुछ मुफस्सिरीन के अनुसार, इससे मुराद जिन्नों के शैतान और इंसानों के वो गुमराह करने वाले लोग हैं जो लोगों को जहन्नम की तरफ बुलाते रहे।

फिर वे कहेंगे: "हम उन दोनों को अपने पैरों के नीचे रखेंगे ताकि वे जहन्नम के सबसे निचले और सबसे सख्त अज़ाब वाले दर्जे में चले जाएं।" यानी वे चाहेंगे कि जिन लोगों ने उन्हें गुमराह किया, वे उनसे भी बदतर हालत में हों, और यह उनके दिल की जलन और बदले की भावना का इज़हार होगा।

दावती पहलू और सबक:

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि गुमराह करने वालों का अंजाम कितना बुरा होगा। जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, वे सिर्फ अपना ही नुकसान नहीं करते, बल्कि उनके पीछे चलने वालों के गुनाहों का बोझ भी उठाएंगे। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: "जिसने किसी को गुमराही की तरफ बुलाया, उस पर उन सबके गुनाहों का बोझ होगा जो उसकी पैरवी करेंगे, और उनके गुनाहों में कोई कमी नहीं होगी।" (सहीह मुस्लिम)

इसलिए हमें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए—हम में से हर एक या तो अच्छाई की तरफ बुलाने वाला है या बुराई की तरफ। आइए हम उन लोगों में से बनें जो लोगों को सीधी राह दिखाते हैं, ताकि क़यामत के दिन हमारे पल्ले अच्छे कामों का सवाब हो, न कि गुमराह करने वालों के साथ हमारा हाल वैसा हो जैसा इस आयत में बयान हुआ है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें गुमराह करने वालों के साथ खड़ा न करे। आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा फुस्सिलत

27فَلَنُذِيقَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا عَذَابًا شَدِيدًا وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَسْوَأَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
तो हम भी काफ़िरों को सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगे और इनकी कारस्तानियों की बहुत बड़ी सज़ा ये दोज़ख़ है
28ذَٰلِكَ جَزَاءُ أَعْدَاءِ اللَّهِ النَّارُ ۖ لَهُمْ فِيهَا دَارُ الْخُلْدِ ۖ جَزَاءً بِمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
ख़ुदा के दुशमनों का बदला है कि वह जो हमरी आयतों से इन्कार करते थे उसकी सज़ा में उनके लिए उसमें हमेशा (रहने) का घर है,
29وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا رَبَّنَا أَرِنَا اللَّذَيْنِ أَضَلَّانَا مِنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ أَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ الْأَسْفَلِينَ
और (क़यामत के दिन) कुफ्फ़ार कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार जिनों और इन्सानों में से जिन लोगों ने हमको गुमराह किया था (एक नज़र) उनको हमें दिखा दे कि हम उनको पाँव तले (रौन्द) डालें ताकि वह ख़ूब ज़लील हों
30إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
और जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) कहा कि हमारा परवरदिगार तो (बस) ख़ुदा है, फिर वह उसी पर भी क़ायम भी रहे उन पर मौत के वक्त (रहमत के) फ़रिश्ते नाज़िल होंगे (और कहेंगे) कि कुछ ख़ौफ न करो और न ग़म खाओ और जिस बेहिश्त का तुमसे वायदा किया गया था उसकी ख़ुशियां मनाओ
31نَحْنُ أَوْلِيَاؤُكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۖ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِي أَنفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ
हम दुनिया की ज़िन्दगी में तुम्हारे दोस्त थे और आखेरत में भी तुम्हारे (रफ़ीक़) हैं और जिस चीज़ का भी तुम्हार जी चाहे बेहिश्त में तुम्हारे वास्ते मौजूद है और जो चीज़ तलब करोगे वहाँ तुम्हारे लिए (हाज़िर) होगी
फुस्सिलतकुरान सूची
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अनुवाद — फुस्सिलत 29

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Wednesday, September 30, 2026

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