अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُصِيبَةٍ (मुसीबत): बला, आपदा, कठिनाई, दुख-दर्द
- كَسَبَتْ أَيْدِيكُمْ (कसबत अय्दीकुम): तुम्हारे हाथों ने कमाया, अर्थात तुम्हारे किए हुए गुनाह
- يَعْفُو (यअ्फू): माफ कर देता है, क्षमा कर देता है
तफसीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! तुम पर जो भी मुसीबत आती है—चाहे वह तुम्हारे दीन में हो या दुनिया में, तुम्हारी जान में हो या तुम्हारे माल में—वह तुम्हारे उन गुनाहों की वजह से आती है जो तुम्हारे हाथों ने कमाए हैं। यानी तुम्हारे अपने किए हुए पाप और गुनाह ही तुम्हारे लिए मुसीबतों का सबब बनते हैं। यह अल्लाह का न्याय है कि इंसान को उसके कर्मों का फल मिले।
लेकिन इसके साथ ही अल्लाह तआला अपनी रहमत और करम से तुम्हारे बहुत से गुनाहों को माफ कर देता है और उन पर तुम्हें पकड़ नहीं करता। अगर वह चाहता तो तुम्हारे हर गुनाह पर तुम्हें पकड़ लेता और हर कसूर की सजा देता, लेकिन वह बड़ा क्षमाशील और दयालु है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हम पर कोई मुसीबत आए, तो हमें अपने अंदर झांकना चाहिए और अपने गुनाहों का जायजा लेना चाहिए। यह गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की ओर लौटने का बेहतरीन मौका है। साथ ही हमें यह भी यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है—वह हमारे बहुत से गुनाहों को माफ कर देता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपने रास्ते को सुधारें।
याद रखिए! मुसीबतें अल्लाह की तरफ से एक नसीहत और आगाही हैं, ताकि हम गुनाहों से बाज़ आएं और अपने रब की तरफ रुजू करें। अल्लाह तआला फरमाता है कि वह बहुत से गुनाहों से दरगुजर करता है—यह उसकी रहमत और मेहरबानी की दलील है। इसलिए हमें कभी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा उसकी तरफ लौटते रहना चाहिए।
📜 आयत 28-32 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 30
सूरा अश-शूरा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने…सूरा आयत 30/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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