अश-शूरा · 30/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
وَمَا أَصَابَكُم مِّن مُّصِيبَةٍ فَبِمَا كَسَبَتْ أَيْدِيكُمْ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ ۝٣٠
Wa maaa asaabakum mim museebatin fabimaa kasabat aydeekum wa ya`foo `an kaseer
📖 हिंदी अर्थ
और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने ही हाथों की करतूत से और (उस पर भी) वह बहुत कुछ माफ कर देता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُصِيبَةٍ (मुसीबत): बला, आपदा, कठिनाई, दुख-दर्द
  • كَسَبَتْ أَيْدِيكُمْ (कसबत अय्दीकुम): तुम्हारे हाथों ने कमाया, अर्थात तुम्हारे किए हुए गुनाह
  • يَعْفُو (यअ्फू): माफ कर देता है, क्षमा कर देता है

तफसीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! तुम पर जो भी मुसीबत आती है—चाहे वह तुम्हारे दीन में हो या दुनिया में, तुम्हारी जान में हो या तुम्हारे माल में—वह तुम्हारे उन गुनाहों की वजह से आती है जो तुम्हारे हाथों ने कमाए हैं। यानी तुम्हारे अपने किए हुए पाप और गुनाह ही तुम्हारे लिए मुसीबतों का सबब बनते हैं। यह अल्लाह का न्याय है कि इंसान को उसके कर्मों का फल मिले।

लेकिन इसके साथ ही अल्लाह तआला अपनी रहमत और करम से तुम्हारे बहुत से गुनाहों को माफ कर देता है और उन पर तुम्हें पकड़ नहीं करता। अगर वह चाहता तो तुम्हारे हर गुनाह पर तुम्हें पकड़ लेता और हर कसूर की सजा देता, लेकिन वह बड़ा क्षमाशील और दयालु है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हम पर कोई मुसीबत आए, तो हमें अपने अंदर झांकना चाहिए और अपने गुनाहों का जायजा लेना चाहिए। यह गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की ओर लौटने का बेहतरीन मौका है। साथ ही हमें यह भी यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है—वह हमारे बहुत से गुनाहों को माफ कर देता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपने रास्ते को सुधारें।

याद रखिए! मुसीबतें अल्लाह की तरफ से एक नसीहत और आगाही हैं, ताकि हम गुनाहों से बाज़ आएं और अपने रब की तरफ रुजू करें। अल्लाह तआला फरमाता है कि वह बहुत से गुनाहों से दरगुजर करता है—यह उसकी रहमत और मेहरबानी की दलील है। इसलिए हमें कभी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा उसकी तरफ लौटते रहना चाहिए।

🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — अश-शूरा

28وَهُوَ الَّذِي يُنَزِّلُ الْغَيْثَ مِن بَعْدِ مَا قَنَطُوا وَيَنشُرُ رَحْمَتَهُ ۚ وَهُوَ الْوَلِيُّ الْحَمِيدُ
और वही तो है जो लोगों के नाउम्मीद हो जाने के बाद मेंह बरसाता है और अपनी रहमत (बारिश की बरकतों) को फैला देता है और वही कारसाज़ (और) हम्द व सना के लायक़ है
29وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَثَّ فِيهِمَا مِن دَابَّةٍ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ جَمْعِهِمْ إِذَا يَشَاءُ قَدِيرٌ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करना और उन जानदारों का भी जो उसने आसमान व ज़मीन में फैला रखे हैं और जब चाहे उनके जमा कर लेने पर (भी) क़ादिर है
30وَمَا أَصَابَكُم مِّن مُّصِيبَةٍ فَبِمَا كَسَبَتْ أَيْدِيكُمْ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ
और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने ही हाथों की करतूत से और (उस पर भी) वह बहुत कुछ माफ कर देता है
31وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और तुम लोग ज़मीन में (रह कर) तो ख़ुदा को किसी तरह हरा नहीं सकते और ख़ुदा के सिवा तुम्हारा न कोई दोस्त है और न मददगार
32وَمِنْ آيَاتِهِ الْجَوَارِ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं
अश-शूराकुरान सूची
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अनुवाद — अश-शूरा 30

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Tuesday, August 18, 2026

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