अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَثَّ: फैलाना, फैलाना और पूरी दुनिया में फैलाना।
- دَابَّةٍ: चलने-फिरने वाला प्राणी, जिसमें इंसान, जानवर, पक्षी और सभी जीवित प्राणी शामिल हैं।
- جَمْعِهِمْ: उन सबको इकट्ठा करना, यानी क़यामत के दिन सभी प्राणियों का हश्र के लिए इकट्ठा होना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला की महानता, उसकी क़ुदरत (शक्ति) और उसके अकेले होने की दलीलें उसकी पैदा की हुई मख़लूक़ात (सृष्टि) में बिखरी पड़ी हैं। इन्हीं निशानियों में से एक बहुत बड़ी निशानी यह है कि उसने आसमानों और ज़मीन को बिना किसी पहले नमूने के पैदा किया। ये इतनी बड़ी और हैरतअंगेज़ मख़लूक़ात हैं कि इन्हें देखकर इंसान का दिमाग़ दंग रह जाता है। फिर उसी अल्लाह ने इन दोनों (आसमान और ज़मीन) में तरह-तरह के जीव-जंतु, चलने-फिरने वाले प्राणी, पक्षी, कीड़े-मकोड़े और असंख्य मख़लूक़ात फैलाई हैं। हर प्राणी अपनी बनावट, अपने रंग-रूप, अपनी खुराक और अपने रहने के तरीक़े में अल्लाह की क़ुदरत का एक अजीबो-ग़रीब नमूना है।
यही अल्लाह, जो इन सबको पैदा करने पर क़ादिर है, उन सबको दोबारा इकट्ठा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब वह चाहेगा, क़यामत के दिन सभी प्राणियों को क़ब्रों से उठाकर हश्र के मैदान में इकट्ठा कर देगा। जिस तरह उसे पहली बार पैदा करना मुश्किल नहीं था, उसी तरह उन्हें दोबारा ज़िंदा करना और इकट्ठा करना भी उसके लिए बिल्कुल आसान है। उसकी क़ुदरत के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं, न कोई चीज़ उससे छिपी है।
दावत और नसीहत:
इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी क़ुदरत के दर्शन करा रहा है ताकि हम उसकी अज़मत (महानता) को पहचानें और उसके आगे सर झुकाएँ। जब हम आसमान की बुलंदियों, ज़मीन की वुसअत (चौड़ाई) और उसमें फैली हर चीज़ को देखते हैं, तो हमारा दिल इस हक़ीक़त पर ईमान लाता है कि यह सब किसी ख़ालिक़ (रचयिता) के बिना नहीं हो सकता। यही ख़ालिक़ हमें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करके हमारे आमाल (कर्मों) का हिसाब लेगा। यह ईमान हमें ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देता है और हमें याद दिलाता है कि हमारी मंज़िल सिर्फ़ यही दुनिया नहीं, बल्कि आख़िरत की हमेशा वाली ज़िंदगी भी है। अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करके हम अपने रब की मोहब्बत और उसकी इबादत में मज़बूती हासिल करें, क्योंकि वही सब कुछ कर सकता है और उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं।
📜 आयत 27-31 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 29
सूरा अश-शूरा आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से सारे आसमान…सूरा आयत 29/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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