अश-शूरा · 43/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
وَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ ۝٤٣
Wa laman sabara wa ghafara inna zaalika lamin `azmil umoor
📖 हिंदी अर्थ
और जो सब्र करे और कुसूर माफ़ कर दे तो बेशक ये बड़े हौसले के काम हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • صَبَرَ – धैर्य रखा, सहन किया
  • وَغَفَرَ – और क्षमा कर दिया
  • عَزْمِ الْأُمُورِ – दृढ़ इरादों वाले कार्य, अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्य के कार्य

तफसीर:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की प्रशंसा कर रहे हैं जो दूसरों के अत्याचार और कष्ट पर धैर्य रखते हैं, और बदला लेने की शक्ति होते हुए भी क्षमा और उदारता का मार्ग अपनाते हैं। यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जब कोई व्यक्ति किसी के द्वारा सताया जाए, तो उसे चाहिए कि वह धैर्य का परिचय दे और अपने दिल से बदले की भावना को निकालकर दूसरे की गलती को माफ कर दे।

यह कार्य आसान नहीं है, बल्कि यह उन कठिन और महान कार्यों में से है जिन्हें अल्लाह ने बहुत पसंद किया है। जो व्यक्ति इस गुण को अपनाता है, वह न केवल अपने लिए अल्लाह के यहाँ महान प्रतिफल कमाता है, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और शांति का संचार भी करता है। ऐसा व्यक्ति समाज के लिए एक आदर्श बन जाता है, और उसकी यह दरियादिली उसे लोगों की नज़रों में भी ऊँचा उठाती है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में यह भी बताया कि यह गुण उन्हीं लोगों को नसीब होता है जिनका दिल बड़ा होता है और जिन्हें अल्लाह की ओर से विशेष तौफीक मिली होती है। यह एक ऐसा कार्य है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दर्जे को बुलंद करता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में इस गुण को अपनाएँ। जब कोई हमें तकलीफ पहुँचाए, तो हम उसे माफ कर दें, क्योंकि माफ करने वालों को अल्लाह बहुत प्यार करता है। याद रखें, बदला लेना आसान है, लेकिन माफ करना बहुत बड़ा काम है। यही वह गुण है जो हमें दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी दिलाएगा। अल्लाह हम सभी को इस महान गुण को अपनाने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 41-45 — सूरा अश-शूरा

41وَلَمَنِ انتَصَرَ بَعْدَ ظُلْمِهِ فَأُولَٰئِكَ مَا عَلَيْهِم مِّن سَبِيلٍ
और जिस पर ज़ुल्म हुआ हो अगर वह उसके बाद इन्तेक़ाम ले तो ऐसे लोगों पर कोई इल्ज़ाम नहीं
42إِنَّمَا السَّبِيلُ عَلَى الَّذِينَ يَظْلِمُونَ النَّاسَ وَيَبْغُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
इल्ज़ाम तो बस उन्हीं लोगों पर होगा जो लोगों पर ज़ुल्म करते हैं और रूए ज़मीन में नाहक़ ज्यादतियाँ करते फिरते हैं उन्हीं लोगों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
43وَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ
और जो सब्र करे और कुसूर माफ़ कर दे तो बेशक ये बड़े हौसले के काम हैं
44وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن وَلِيٍّ مِّن بَعْدِهِ ۗ وَتَرَى الظَّالِمِينَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ يَقُولُونَ هَلْ إِلَىٰ مَرَدٍّ مِّن سَبِيلٍ
और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसके बाद उसका कोई सरपरस्त नहीं और तुम ज़ालिमों को देखोगे कि जब (दोज़ख़) का अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे कि भला (दुनिया में) फिर लौट कर जाने की कोई सबील है
45وَتَرَاهُمْ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا خَاشِعِينَ مِنَ الذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرْفٍ خَفِيٍّ ۗ وَقَالَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا إِنَّ الظَّالِمِينَ فِي عَذَابٍ مُّقِيمٍ
और तुम उनको देखोगे कि दोज़ख़ के सामने लाए गये हैं (और) ज़िल्लत के मारे कटे जाते हैं (और) कनक्खियों से देखे जाते हैं और मोमिनीन कहेंगे कि हकीक़त में वही बड़े घाटे में हैं जिन्होने क़यामत के दिन अपने आप को और अपने घर वालों को ख़सारे में डाला देखो ज़ुल्म करने वाले दाएमी अज़ाब में रहेंगे
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अश-शूरा 43

सूरा अश-शूरा आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो सब्र करे और कुसूर माफ़ कर दे तो…

सूरा आयत 43/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए