अश-शूरा · 44/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن وَلِيٍّ مِّن بَعْدِهِ ۗ وَتَرَى الظَّالِمِينَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ يَقُولُونَ هَلْ إِلَىٰ مَرَدٍّ مِّن سَبِيلٍ ۝٤٤
Wa mai yudlilil laahu famaa lahoo minw waliyyim mim ba`dih; wa taraz zaalimeena lammaa ra awul `azaaba yaqooloona hal ilaa maraddim min sabeel
📖 हिंदी अर्थ
और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसके बाद उसका कोई सरपरस्त नहीं और तुम ज़ालिमों को देखोगे कि जब (दोज़ख़) का अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे कि भला (दुनिया में) फिर लौट कर जाने की कोई सबील है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُضْلِلِ (युज़लिल): गुमराह करना, हिदायत से वंचित करना
  • وَلِيّ (वली): मददगार, संरक्षक, मार्गदर्शक
  • مَرَدّ (मरद्द): लौटने की जगह, वापसी का रास्ता (यहाँ दुनिया की ओर लौटना)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में एक बहुत ही गंभीर और डरावनी हकीकत बयान कर रहे हैं। जिस व्यक्ति को अल्लाह अपनी रहमत और हिदायत से महरूम कर दे, उसके लिए अल्लाह के सिवा कोई और मददगार, कोई और राह दिखाने वाला नहीं होता। यह उस व्यक्ति का हाल है जो अपने ज़ुल्म, अपनी सरकशी और अपने गुनाहों की वजह से अल्लाह की हिदायत से दूर हो जाता है। जब अल्लाह किसी को उसके अमल की सज़ा के तौर पर गुमराही में छोड़ देता है, तो फिर पूरी कायनात में कोई ताकत नहीं जो उसे सीधा रास्ता दिखा सके।

फिर अल्लाह तआला क़यामत के दिन के उस मंज़र का ज़िक्र करते हैं जब ज़ालिम (अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले) लोग आज़ाब को अपनी आँखों से देख लेंगे। उस वक़्त उन्हें अपनी ग़लतियों का एहसास होगा, लेकिन एहसास बेकार होगा। वे हैरत और नदामत के साथ कहेंगे: "क्या हमारे लिए दुनिया में लौटने का कोई रास्ता है?" वे दुनिया में लौटकर नेक अमल करना चाहेंगे, तौबा करना चाहेंगे, लेकिन यह सिर्फ़ एक ख्वाहिश होगी जो कभी पूरी नहीं होगी।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में रहते हुए हिदायत का रास्ता दिखाया है, क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए हमें सच्चाई से आगाह किया है। यह हमारे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत है कि हम अभी ज़िंदा हैं, अभी हमारे पास तौबा करने का मौक़ा है। हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारना चाहिए। क़यामत के दिन पछताने और दुनिया में लौटने की आरज़ू करने से पहले, आज ही अपने रब की तरफ रुजू कर लें, क्योंकि आज का दिन अमल का दिन है, हिसाब का दिन नहीं। अल्लाह तआला बहुत मेहरबान और क़ुबूल करने वाला है, वह अपने बंदों की तौबा को पसंद करता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की रज़ा के लिए इस्तेमाल करें, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदगी और पछतावे का सामना न करना पड़े।



📜 आयत 42-46 — अश-शूरा

42إِنَّمَا السَّبِيلُ عَلَى الَّذِينَ يَظْلِمُونَ النَّاسَ وَيَبْغُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
इल्ज़ाम तो बस उन्हीं लोगों पर होगा जो लोगों पर ज़ुल्म करते हैं और रूए ज़मीन में नाहक़ ज्यादतियाँ करते फिरते हैं उन्हीं लोगों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
43وَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ
और जो सब्र करे और कुसूर माफ़ कर दे तो बेशक ये बड़े हौसले के काम हैं
44وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن وَلِيٍّ مِّن بَعْدِهِ ۗ وَتَرَى الظَّالِمِينَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ يَقُولُونَ هَلْ إِلَىٰ مَرَدٍّ مِّن سَبِيلٍ
और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसके बाद उसका कोई सरपरस्त नहीं और तुम ज़ालिमों को देखोगे कि जब (दोज़ख़) का अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे कि भला (दुनिया में) फिर लौट कर जाने की कोई सबील है
45وَتَرَاهُمْ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا خَاشِعِينَ مِنَ الذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرْفٍ خَفِيٍّ ۗ وَقَالَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا إِنَّ الظَّالِمِينَ فِي عَذَابٍ مُّقِيمٍ
और तुम उनको देखोगे कि दोज़ख़ के सामने लाए गये हैं (और) ज़िल्लत के मारे कटे जाते हैं (और) कनक्खियों से देखे जाते हैं और मोमिनीन कहेंगे कि हकीक़त में वही बड़े घाटे में हैं जिन्होने क़यामत के दिन अपने आप को और अपने घर वालों को ख़सारे में डाला देखो ज़ुल्म करने वाले दाएमी अज़ाब में रहेंगे
46وَمَا كَانَ لَهُم مِّنْ أَوْلِيَاءَ يَنصُرُونَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن سَبِيلٍ
और ख़ुदा के सिवा न उनके सरपरस्त ही होंगे जो उनकी मदद को आएँ और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसके लिए (हिदायत की) कोई राह नहीं
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अनुवाद — अश-शूरा 44

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Tuesday, August 18, 2026

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