Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- नादा: पुकारा, ऊँची आवाज़ से बुलाया
- मुल्क: राज्य, सत्ता, शासन
- अन्हार: नदियाँ (बहुवचन)
- तज्री: बहती हैं
- मिन तहती: मेरे नीचे से, मेरे आदेश/नियंत्रण में
- तुब्सिरून: क्या तुम देखते नहीं, क्या तुम समझते नहीं
तफ़सीर (व्याख्या):
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम के बुज़ुर्गों और सरदारों को इकट्ठा करके उन्हें सम्बोधित किया और अत्यंत घमंड और अकड़ के साथ कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! क्या मिस्र का राज्य मेरा नहीं है? और ये नदियाँ — जो नील नदी से निकलने वाली बड़ी-बड़ी नहरें और जलधाराएँ हैं — मेरे महलों के नीचे, मेरे बग़ीचों और मेरे सिंहासन के सामने बहती हैं। क्या तुम यह सब कुछ देखते नहीं हो?"
फ़िरऔन का यह कथन उसके अत्यधिक घमंड, अहंकार और दुनियावी शक्ति पर इतराने का प्रतीक था। वह अपनी सांसारिक ताक़त और ऐश्वर्य को ही सब कुछ समझता था, और उसी के बल पर वह हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को झुठलाना चाहता था। उसका इशारा यह था कि जिसके पास इतनी बड़ी सल्तनत, खज़ाने, सेना और सुख-सुविधाएँ हों, वही सच्चा और बड़ा है, और मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसा ग़रीब और कमज़ोर व्यक्ति उसका मुक़ाबला कैसे कर सकता है?
यहाँ फ़िरऔन की सोच की कमज़ोरी साफ़ झलकती है — वह दुनिया की चमक-दमक को ही सच्चाई का पैमाना समझ रहा था। उसे भूल गया कि यह सब कुछ उसे अल्लाह ही ने दिया था, और अल्लाह की शक्ति के आगे उसका राज्य, उसकी नदियाँ और उसकी सेना सब कुछ बेकार है। अल्लाह तआला ने उसकी इसी घमंड भरी बात का जवाब अपनी क़ुदरत से दिया — उसी नील नदी में उसे डुबोकर हमेशा के लिए मिटा दिया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनियावी ताक़त, धन-दौलत और ऐश्वर्य कभी भी सच्चाई और हक़ का पैमाना नहीं हो सकते। कितने ही शक्तिशाली राजा और साम्राज्य इस दुनिया से गुज़र चुके हैं, लेकिन उनका नाम और निशान तक मिट गया। जबकि अल्लाह के नबियों और सच्चे लोगों का ज़िक्र हमेशा के लिए बाक़ी रहा। इसलिए हमें कभी भी दुनियावी चीज़ों पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों का पालन करना चाहिए। याद रखिए, असली इज़्ज़त और बड़ाई उसी की है जो अल्लाह के पास बड़ा हो — और अल्लाह के पास वही बड़ा है जो तक़वा (परहेज़गारी) रखता है। आइए, हम फ़िरऔन के घमंड से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रहमत और उसकी रज़ा को ही सबसे बड़ी दौलत समझें।
📜 आयत 49-53 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 51
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन ने अपने लोगों में पुकार कर कहा ऐ…सूरा आयत 51/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
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