अल-जासिया · 13/37
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जासिया
وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ۝١٣
Wa sakhkhara lakum maa fis samaawaati wa maa fil ardi jamee`am minh; inna feezaalika la Aayaatil liqawminy yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सबको अपने (हुक्म) से तुम्हारे काम में लगा दिया है जो लोग ग़ौर करते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَخَّرَ – अधीन किया, वश में किया
  • جَمِيعًا – सब कुछ, सम्पूर्ण
  • مِنْهُ – उसकी ओर से, उसके अनुग्रह से
  • لَآيَاتٍ – निश्चय ही निशानियाँ, प्रमाण
  • يَتَفَكَّرُونَ – चिंतन-मनन करते हैं, सोच-विचार करते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी असीम कृपा और दया का वर्णन किया है। उसने आकाशों की हर चीज़ को — सूरज, चाँद, तारे, बादल, हवाएँ, और पृथ्वी की हर चीज़ को — नदियाँ, पहाड़, पेड़-पौधे, जानवर, समुद्र और उनमें चलने वाले जहाज़ — सब कुछ इंसान के अधीन कर दिया है। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से है, उसके शुद्ध अनुग्रह और दया से, न कि किसी और की ओर से। यह सब नेमतें अल्लाह ने अकेले ही दी हैं, इसलिए उसी की इबादत करनी चाहिए और उसका कोई शरीक नहीं बनाना चाहिए।

इस विशाल ब्रह्मांड को देखो — सूरज अपनी निर्धारित कक्षा में चलता है, चाँद अपने समय पर उगता और ढलता है, तारे रात में रास्ता दिखाते हैं, बादल पानी बरसाते हैं, हवाएँ चलती हैं, नदियाँ बहती हैं, पहाड़ धरती को स्थिर रखते हैं, समुद्र में जहाज़ चलते हैं, और ज़मीन से तरह-तरह की फ़सलें और फल निकलते हैं। यह सब कुछ बिना किसी रुकावट के, बिना किसी थकान के, बिना किसी मेहनत के इंसान के लिए उपलब्ध है।

क्या यह सब कुछ अपने आप हो गया? क्या यह सब बिना किसी बनाने वाले के बन गया? नहीं! यह सब उस अल्लाह की कुदरत का नमूना है जो सब कुछ पैदा करने वाला और सब कुछ चलाने वाला है। जो लोग इन चीज़ों पर गहराई से सोचते हैं, जो इन निशानियों पर चिंतन करते हैं, उनके लिए इनमें अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी कुदरत के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी आँखें खोलकर देखना चाहिए, अपने दिमाग़ को इस्तेमाल करना चाहिए, और अपने दिल से सोचना चाहिए। जो व्यक्ति इन निशानियों पर चिंतन करता है, वह अपने रब को पहचान लेता है, उसकी महानता का एहसास कर लेता है, और फिर उसकी इबादत में पूरी तरह झुक जाता है। यही असली कामयाबी है — कि हम अल्लाह की नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और उसी की इबादत करें।

अल्लाह की इन नेमतों पर चिंतन करने से हमारा ईमान मज़बूत होता है, हमारा दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाता है, और हमें यह एहसास होता है कि हमारा रब कितना दयालु और कितना कृपालु है। उसने हमें कितनी नेमतें दी हैं, और हम उसके कितने शुक्रगुज़ार होने चाहिए। यही सोच इंसान को सीधे रास्ते पर चलाती है और उसे जन्नत की ओर ले जाती है।



📜 आयत 11-15 — सूरा अल-जासिया

11هَٰذَا هُدًى ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ
ये (क़ुरान) है और जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया उनके लिए सख्त किस्म का दर्दनाक अज़ाब होगा
12۞ اللَّهُ الَّذِي سَخَّرَ لَكُمُ الْبَحْرَ لِتَجْرِيَ الْفُلْكُ فِيهِ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने दरिया को तुम्हारे क़ाबू में कर दिया ताकि उसके हुक्म से उसमें कश्तियां चलें और ताकि उसके फज़ल (व करम) से (मआश की) तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो
13وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सबको अपने (हुक्म) से तुम्हारे काम में लगा दिया है जो लोग ग़ौर करते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
14قُل لِّلَّذِينَ آمَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ اللَّهِ لِيَجْزِيَ قَوْمًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
(ऐ रसूल) मोमिनों से कह दो कि जो लोग ख़ुदा के दिनों की (जो जज़ा के लिए मुक़र्रर हैं) तवक्क़ो नहीं रखते उनसे दरगुज़र करें ताकि वह लोगों के आमाल का बदला दे
15مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ أَسَاءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
जो शख़्श नेक काम करता है तो ख़ास अपने लिए और बुरा काम करेगा तो उस का वबाल उसी पर होगा फिर (आख़िर) तुम अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
अल-जासियाकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अल-जासिया 13

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Thursday, October 1, 2026

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