अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَخَّرَ – अधीन किया, वश में किया
- جَمِيعًا – सब कुछ, सम्पूर्ण
- مِنْهُ – उसकी ओर से, उसके अनुग्रह से
- لَآيَاتٍ – निश्चय ही निशानियाँ, प्रमाण
- يَتَفَكَّرُونَ – चिंतन-मनन करते हैं, सोच-विचार करते हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी असीम कृपा और दया का वर्णन किया है। उसने आकाशों की हर चीज़ को — सूरज, चाँद, तारे, बादल, हवाएँ, और पृथ्वी की हर चीज़ को — नदियाँ, पहाड़, पेड़-पौधे, जानवर, समुद्र और उनमें चलने वाले जहाज़ — सब कुछ इंसान के अधीन कर दिया है। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से है, उसके शुद्ध अनुग्रह और दया से, न कि किसी और की ओर से। यह सब नेमतें अल्लाह ने अकेले ही दी हैं, इसलिए उसी की इबादत करनी चाहिए और उसका कोई शरीक नहीं बनाना चाहिए।
इस विशाल ब्रह्मांड को देखो — सूरज अपनी निर्धारित कक्षा में चलता है, चाँद अपने समय पर उगता और ढलता है, तारे रात में रास्ता दिखाते हैं, बादल पानी बरसाते हैं, हवाएँ चलती हैं, नदियाँ बहती हैं, पहाड़ धरती को स्थिर रखते हैं, समुद्र में जहाज़ चलते हैं, और ज़मीन से तरह-तरह की फ़सलें और फल निकलते हैं। यह सब कुछ बिना किसी रुकावट के, बिना किसी थकान के, बिना किसी मेहनत के इंसान के लिए उपलब्ध है।
क्या यह सब कुछ अपने आप हो गया? क्या यह सब बिना किसी बनाने वाले के बन गया? नहीं! यह सब उस अल्लाह की कुदरत का नमूना है जो सब कुछ पैदा करने वाला और सब कुछ चलाने वाला है। जो लोग इन चीज़ों पर गहराई से सोचते हैं, जो इन निशानियों पर चिंतन करते हैं, उनके लिए इनमें अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी कुदरत के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी आँखें खोलकर देखना चाहिए, अपने दिमाग़ को इस्तेमाल करना चाहिए, और अपने दिल से सोचना चाहिए। जो व्यक्ति इन निशानियों पर चिंतन करता है, वह अपने रब को पहचान लेता है, उसकी महानता का एहसास कर लेता है, और फिर उसकी इबादत में पूरी तरह झुक जाता है। यही असली कामयाबी है — कि हम अल्लाह की नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और उसी की इबादत करें।
अल्लाह की इन नेमतों पर चिंतन करने से हमारा ईमान मज़बूत होता है, हमारा दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाता है, और हमें यह एहसास होता है कि हमारा रब कितना दयालु और कितना कृपालु है। उसने हमें कितनी नेमतें दी हैं, और हम उसके कितने शुक्रगुज़ार होने चाहिए। यही सोच इंसान को सीधे रास्ते पर चलाती है और उसे जन्नत की ओर ले जाती है।
📜 आयत 11-15 — अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 13
सूरा अल-जासिया आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन…सूरा आयत 13/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








