अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَخَّرَ — अधीन किया, वश में किया
- الْفُلْك — जहाज़ (समुद्री जहाज़)
- فَضْلِهِ — उसकी कृपा, उसका रिज़्क़ (आजीविका)
- تَشْكُرُونَ — कृतज्ञता व्यक्त करना, शुक्र अदा करना
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (एकमात्र) है जिसने तुम्हारे लिए समुद्र को वश में कर दिया है। यह उसकी महान शक्ति और अपार दया का प्रमाण है कि उसने इतने विशाल और गहरे समुद्र को तुम्हारे अधीन कर दिया, जबकि तुम कमज़ोर इंसान हो। यह अधीनता इसलिए है कि उसके आदेश से जहाज़ उसमें चलें, और तुम उनमें सवार होकर अपने व्यापार, मछली पकड़ने और अन्य वैध कमाई के ज़रिये उसकी कृपा (रिज़्क़) की तलाश करो। यह सब कुछ अल्लाह की दया और मेहरबानी से होता है, न कि किसी और की शक्ति से।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने यह सब नेमतें (उपहार) हमें क्यों दीं? ताकि हम उसका शुक्र अदा करें। शुक्र का अर्थ केवल ज़ुबान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि असली शुक्र यह है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसकी आज्ञाओं का पालन करें और उसके दिए हुए रिज़्क़ को उसकी बताई हुई हदों में खर्च करें। जब हम इन नेमतों को देखते हैं, तो हमारा दिल अल्लाह की महानता और उसकी कृपा के प्रति प्यार से भर जाता है, और हम उसके और करीब आते हैं।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह ने हमारे लिए जो भी चीज़ें पैदा की हैं, वे सब हमारे भले के लिए हैं। समुद्र, ज़मीन, आसमान, हवा — सब कुछ अल्लाह की दया का नतीजा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इन नेमतों का सही इस्तेमाल करें, अल्लाह का शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (प्रसन्नता) के अनुसार ढालें। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 10-14 — अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 12
सूरा अल-जासिया आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही तो है जिसने दरिया को तुम्हारे क़ाबू में…सूरा आयत 12/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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