अल-जासिया · 14/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
قُل لِّلَّذِينَ آمَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ اللَّهِ لِيَجْزِيَ قَوْمًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ ۝١٤
Qul lillazeena aamanoo yaghfiroo lillazeena laa yarjoona ayyaamal laahi liyajziya qawmam bimaa kaanoo yaksiboon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) मोमिनों से कह दो कि जो लोग ख़ुदा के दिनों की (जो जज़ा के लिए मुक़र्रर हैं) तवक्क़ो नहीं रखते उनसे दरगुज़र करें ताकि वह लोगों के आमाल का बदला दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَغْفِرُوا – क्षमा करें, दरगुज़र करें
  • لَا يَرْجُونَ – उम्मीद नहीं रखते, डरते नहीं
  • أَيَّامَ اللَّهِ – अल्लाह के दिन, यानी अल्लाह की ओर से पिछली उम्मतों पर आई विपत्तियाँ और उसकी शक्ति के प्रमाण
  • لِيَجْزِيَ – ताकि बदला दे
  • يَكْسِبُونَ – कमाते हैं, कर्म करते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों से कहें जो ईमान लाए हैं कि वे उन लोगों को क्षमा कर दें जो अल्लाह के दिनों की परवाह नहीं करते—यानी जो अल्लाह की शक्ति, उसकी पकड़ और पिछली उम्मतों पर आई उसकी यातनाओं से सबक़ नहीं लेते, और न ही उसके अज़ाब से डरते हैं। ये लोग मोमिनीन को सताते हैं, उन्हें तकलीफ़ देते हैं और उनका मज़ाक उड़ाते हैं।

अल्लाह तआला अपने प्यारे बंदों को सिखा रहा है कि वे इन ज़ालिमों के ज़ुल्म के बदले में सब्र करें, उन्हें माफ़ कर दें और उनके साथ नेकी का बर्ताव करें। यह नसीहत इसलिए है कि अल्लाह ख़ुद हर क़ौम को उसके किए का पूरा-पूरा बदला देगा—मोमिनीन को उनके सब्र और नेकी का अज्र, और काफ़िरों को उनके ज़ुल्म और बुरे कर्मों की सज़ा। अल्लाह किसी का अमल ज़ाइए नहीं करता।

इस आयत में मोमिनीन के लिए एक बड़ी नेकी की तालीम है—दरगुज़र और क्षमा का जज़्बा। यही वह ख़ूबी है जो एक मुसलमान को दूसरों से अलग करती है। जब हम बदले की आग में जलने के बजाय माफ़ी की ठंडक चुनते हैं, तो हमारा दिल साफ़ रहता है और अल्लाह की रहमत हमारे करीब आती है। याद रखिए, अल्लाह ने इंसाफ़ का हुक्म दिया है, लेकिन जो माफ़ कर दे और सुधार करे, उसका अज्र अल्लाह के ज़िम्मे है।

प्यारे मोमिनीन! जब कोई आपको तकलीफ़ दे, तो उसके बदले में बुराई न करें, बल्कि अल्लाह के वादे पर भरोसा रखें कि वह हर ज़ालिम को उसके किए की सज़ा देगा और हर नेक को उसकी नेकी का फल। यही सब्र और दरगुज़र आपको अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब लाता है और आपके दर्जे बुलंद करता है। क़ुरआन की यह तालीम हमें सिखाती है कि हम अपने दिलों को किन्ना और हसद से पाक रखें, क्योंकि माफ़ी ही वह चाबी है जो दिलों के ताले खोलती है और समाज में मुहब्बत और भाईचारे का रास्ता बनाती है।



📜 आयत 12-16 — अल-जासिया

12۞ اللَّهُ الَّذِي سَخَّرَ لَكُمُ الْبَحْرَ لِتَجْرِيَ الْفُلْكُ فِيهِ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने दरिया को तुम्हारे क़ाबू में कर दिया ताकि उसके हुक्म से उसमें कश्तियां चलें और ताकि उसके फज़ल (व करम) से (मआश की) तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो
13وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सबको अपने (हुक्म) से तुम्हारे काम में लगा दिया है जो लोग ग़ौर करते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
14قُل لِّلَّذِينَ آمَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ اللَّهِ لِيَجْزِيَ قَوْمًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
(ऐ रसूल) मोमिनों से कह दो कि जो लोग ख़ुदा के दिनों की (जो जज़ा के लिए मुक़र्रर हैं) तवक्क़ो नहीं रखते उनसे दरगुज़र करें ताकि वह लोगों के आमाल का बदला दे
15مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ أَسَاءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
जो शख़्श नेक काम करता है तो ख़ास अपने लिए और बुरा काम करेगा तो उस का वबाल उसी पर होगा फिर (आख़िर) तुम अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
16وَلَقَدْ آتَيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
और हमने बनी इसराईल को किताब (तौरेत) और हुकूमत और नबूवत अता की और उन्हें उम्दा उम्दा चीज़ें खाने को दीं और उनको सारे जहॉन पर फ़ज़ीलत दी
अल-जासियाकुरान सूची
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मक्कीRevelation
14आयत

अनुवाद — अल-जासिया 14

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Tuesday, August 18, 2026

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