अल-अहकाफ · 24/35
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहकाफ
فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُّسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُّمْطِرُنَا ۚ بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُم بِهِ ۖ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝٢٤
Falammaa ra awhu `aaridam mustaqbila awdiyatihim qaaloo haazaa `aaridum mumtirunaa; bal huwa masta`jaltum bihee reehun feehaa `azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
तो जब उन लोगों ने इस (अज़ाब) को देखा कि वबाल की तरह उनके मैदानों की तरफ उम्ड़ा आ रहा है तो कहने लगे ये तो बादल है जो हम पर बरस कर रहेगा (नहीं) बल्कि ये वह (अज़ाब) जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे (ये) वह ऑंधी है जिसमें दर्दनाक (अज़ाब) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आरिद़न (عارضًا): बादल जो क्षितिज पर छा जाए, या वह चीज़ जो सामने आए।
  • मुस्तक़बिल (مستقبل): सामने आता हुआ, अपनी ओर आता हुआ।
  • औदियतिहिम (أوديتهم): उनकी घाटियाँ (वादियाँ)।
  • मुम्तिरुन (ممطرنا): हमें बारिश देने वाला।
  • अज़ाबुन अलीम (عذاب أليم): दर्दनाक और बहुत सख्त यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह का वादा किया हुआ अज़ाब उन (आद की क़ौम) के सामने आया, तो उन्होंने उसे एक बादल के रूप में देखा जो उनकी घाटियों की ओर बढ़ रहा था। उनकी आँखों ने उसे सिर्फ़ एक आम बादल समझा, और उनके दिलों में खुशी की लहर दौड़ गई। वे बोल पड़े: "यह तो बारिश वाला बादल है जो हमें पानी देगा!" वे भूल गए कि यह वही चीज़ है जिसे वे मज़ाक़ में जल्दी माँग रहे थे। उन्होंने कहा था: "अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब लाओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो।"

तो उन्हें जवाब दिया गया (हज़रत हूद अलैहिस्सलाम के ज़रिए): "यह बारिश का बादल नहीं है जैसा तुम समझ रहे हो, बल्कि यह वही अज़ाब है जिसे तुम जल्दी माँग रहे थे। यह एक हवा है जिसमें दर्दनाक यातना है।" यानी वह रहमत का बादल नहीं, बल्कि अल्लाह के ग़ज़ब का पैग़ाम था।

फिर वह हवा उन पर सात रात और आठ दिन लगातार चली, जिसने उन्हें इस तरह तबाह कर दिया कि वे खोखले ताड़ के पेड़ों की तरह गिर पड़े। यह उनके कुफ़्र और अल्लाह के नबी को झुठलाने का नतीजा था।


दावती पहलू (नसीहत):

यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी सबक़ है। इंसान अक्सर दुनिया की जल्दी में होता है और अल्लाह की रहमत को भूल जाता है। जब अल्लाह की तरफ़ से कोई मुसीबत आती है, तो हम उसे सिर्फ़ बुरा समझते हैं, लेकिन कभी-कभी वही चीज़ हमारे लिए रहमत बन जाती है। और जब कोई अच्छी चीज़ आती है, तो हम उसे अपनी क़ाबिलियत समझ लेते हैं, जबकि वह अल्लाह की तरफ़ से होती है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के वादे सच्चे हैं। उसका अज़ाब भी हक़ है और उसकी रहमत भी हक़ है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के नबियों की बात को गंभीरता से सुनें और अपनी ज़िंदगी को उनके बताए रास्ते पर चलाएँ। जो लोग हक़ को मज़ाक़ समझते हैं, वे अक्सर उस वक़्त पछताते हैं जब देर हो चुकी होती है।

अल्लाह हमें हक़ समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 22-26 — सूरा अल-अहकाफ

22قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
वह बोले क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हमको हमारे माबूदों से फेर दो तो अगर तुम सच्चे हो तो जिस अज़ाब की तुम हमें धमकी देते हो ले आओ
23قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِندَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ
हूद ने कहा (इसका) इल्म तो बस ख़ुदा के पास है और (मैं जो एहकाम देकर भेजा गया हूँ) वह तुम्हें पहुँचाए देता हूँ मगर मैं तुमको देखता हूँ कि तुम जाहिल लोग हो
24فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُّسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُّمْطِرُنَا ۚ بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُم بِهِ ۖ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ
तो जब उन लोगों ने इस (अज़ाब) को देखा कि वबाल की तरह उनके मैदानों की तरफ उम्ड़ा आ रहा है तो कहने लगे ये तो बादल है जो हम पर बरस कर रहेगा (नहीं) बल्कि ये वह (अज़ाब) जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे (ये) वह ऑंधी है जिसमें दर्दनाक (अज़ाब) है
25تُدَمِّرُ كُلَّ شَيْءٍ بِأَمْرِ رَبِّهَا فَأَصْبَحُوا لَا يُرَىٰ إِلَّا مَسَاكِنُهُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ
जो अपने परवरदिगार के हुक्म से हर चीज़ को तबाह व बरबाद कर देगी तो वह ऐसे (तबाह) हुए कि उनके घरों के सिवा कुछ नज़र ही नहीं आता था हम गुनाहगारों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
26وَلَقَدْ مَكَّنَّاهُمْ فِيمَا إِن مَّكَّنَّاكُمْ فِيهِ وَجَعَلْنَا لَهُمْ سَمْعًا وَأَبْصَارًا وَأَفْئِدَةً فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ سَمْعُهُمْ وَلَا أَبْصَارُهُمْ وَلَا أَفْئِدَتُهُم مِّن شَيْءٍ إِذْ كَانُوا يَجْحَدُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और हमने उनको ऐसे कामों में मक़दूर दिये थे जिनमें तुम्हें (कुछ भी) मक़दूर नहीं दिया और उन्हें कान और ऑंख और दिल (सब कुछ दिए थे) तो चूँकि वह लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करने लगे तो न उनके कान ही कुछ काम आए और न उनकी ऑंखें और न उनके दिल और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे उसने उनको हर तरफ से घेर लिया
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 24

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Thursday, October 1, 2026

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