अल-अहकाफ · 25/35
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहकाफ
تُدَمِّرُ كُلَّ شَيْءٍ بِأَمْرِ رَبِّهَا فَأَصْبَحُوا لَا يُرَىٰ إِلَّا مَسَاكِنُهُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ ۝٢٥
Tudammiru kulla shai`im bi-amri Rabbihaa fa asbahoo laa yuraaa illaa masaakinuhum; kazaalika najzil qawmal mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
जो अपने परवरदिगार के हुक्म से हर चीज़ को तबाह व बरबाद कर देगी तो वह ऐसे (तबाह) हुए कि उनके घरों के सिवा कुछ नज़र ही नहीं आता था हम गुनाहगारों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُدَمِّرُ: नष्ट करती है, तबाह कर देती है।
  • بِأَمْرِ رَبِّهَا: अपने रब के हुक्म से।
  • فَأَصْبَحُوا: फिर वे ऐसे हो गए (सुबह उन्होंने ऐसी हालत में की)।
  • لَا يُرَى إِلَّا مَسَاكِنُهُمْ: उनके घरों के सिवा कुछ नहीं दिखता था।
  • الْمُجْرِمِينَ: अपराधियों, गुनाहगारों को।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक अज़ाब का वर्णन कर रही है जो क़ौमे आद (हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम) पर आया। जब उन्होंने अपने नबी को झुठलाया और हक़ से मुँह मोड़ा, तो अल्लाह ने उन पर एक तूफ़ानी हवा भेजी जो हर चीज़ को तबाह कर देने वाली थी। वह हवा अल्लाह के हुक्म से हर उस चीज़ को नष्ट कर रही थी जिसे नष्ट करने का आदेश दिया गया था — उनके घर, उनकी जानें, उनका माल, सब कुछ। यहाँ तक कि सुबह होते-होते वे इस तरह मिट गए कि उनके शहरों में सिर्फ़ उनके खाली घर ही बचे थे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ कभी लोग बसते थे। उनके शरीर तक नहीं दिखे, सिर्फ़ उनके घरों के खंडहर रह गए।

यह अल्लाह का क़ानून है — जो लोग ज़ुल्म और इंकार पर अड़े रहते हैं, वे इसी तरह सज़ा पाते हैं। यह सिर्फ़ क़ौमे आद के लिए नहीं था, बल्कि हर उस क़ौम के लिए है जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाती है और गुनाहों पर मुसर्र रहती है।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें अल्लाह की ताक़त और उसके अज़ाब से डराती है, लेकिन साथ ही यह भी सिखाती है कि अल्लाह बहुत रहम करने वाला है। उसने हज़रत हूद अलैहिस्सलाम और उनके साथियों को बचा लिया, क्योंकि वे ईमान लाए थे। आज भी अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए खुला है — जो भी अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ़ लौटता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसकी हिफ़ाज़त करता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है — आज जो लोग अपनी ताक़त और माल पर इतराते हैं, कल उनके पास कुछ नहीं बचेगा। अच्छा हो कि हम अल्लाह के हुक्मों को मानें, अपने नबी की सुन्नत पर चलें, और उस दिन से पहले ख़ुद को सुधार लें जब पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी रहमत के हक़दार हैं। आमीन।



📜 आयत 23-27 — सूरा अल-अहकाफ

23قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِندَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ
हूद ने कहा (इसका) इल्म तो बस ख़ुदा के पास है और (मैं जो एहकाम देकर भेजा गया हूँ) वह तुम्हें पहुँचाए देता हूँ मगर मैं तुमको देखता हूँ कि तुम जाहिल लोग हो
24فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُّسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُّمْطِرُنَا ۚ بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُم بِهِ ۖ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ
तो जब उन लोगों ने इस (अज़ाब) को देखा कि वबाल की तरह उनके मैदानों की तरफ उम्ड़ा आ रहा है तो कहने लगे ये तो बादल है जो हम पर बरस कर रहेगा (नहीं) बल्कि ये वह (अज़ाब) जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे (ये) वह ऑंधी है जिसमें दर्दनाक (अज़ाब) है
25تُدَمِّرُ كُلَّ شَيْءٍ بِأَمْرِ رَبِّهَا فَأَصْبَحُوا لَا يُرَىٰ إِلَّا مَسَاكِنُهُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ
जो अपने परवरदिगार के हुक्म से हर चीज़ को तबाह व बरबाद कर देगी तो वह ऐसे (तबाह) हुए कि उनके घरों के सिवा कुछ नज़र ही नहीं आता था हम गुनाहगारों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
26وَلَقَدْ مَكَّنَّاهُمْ فِيمَا إِن مَّكَّنَّاكُمْ فِيهِ وَجَعَلْنَا لَهُمْ سَمْعًا وَأَبْصَارًا وَأَفْئِدَةً فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ سَمْعُهُمْ وَلَا أَبْصَارُهُمْ وَلَا أَفْئِدَتُهُم مِّن شَيْءٍ إِذْ كَانُوا يَجْحَدُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और हमने उनको ऐसे कामों में मक़दूर दिये थे जिनमें तुम्हें (कुछ भी) मक़दूर नहीं दिया और उन्हें कान और ऑंख और दिल (सब कुछ दिए थे) तो चूँकि वह लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करने लगे तो न उनके कान ही कुछ काम आए और न उनकी ऑंखें और न उनके दिल और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे उसने उनको हर तरफ से घेर लिया
27وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا مَا حَوْلَكُم مِّنَ الْقُرَىٰ وَصَرَّفْنَا الْآيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और (ऐ अहले मक्का) हमने तुम्हारे इर्द गिर्द की बस्तियों को हलाक कर मारा और (अपनी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ तरह तरह से दिखा दी ताकि ये लोग बाज़ आएँ (मगर कौन सुनता है)
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 25

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Thursday, October 1, 2026

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