Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا تُقَدِّمُوا – आगे न बढ़ो, जल्दबाज़ी मत करो
- بَيْنَ يَدَيِ – सामने, आगे
- وَاتَّقُوا – डरो, परहेज़गारी अपनाओ
- سَمِيعٌ – सब कुछ सुनने वाला
- عَلِيمٌ – सब कुछ जानने वाला
तफ़सीर:
ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के आगे जल्दबाज़ी मत करो। यानी किसी भी मामले में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फ़ैसले से पहले अपनी राय, अपनी बात या अपना फ़ैसला पेश न करो। दीन के मामलों में कोई नया क़ानून, नया तरीक़ा या नई रस्म न बनाओ, क्योंकि दीन का हुक्म सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का है। जो इंसान अपनी तरफ़ से दीन में नई चीज़ें जोड़ता है या अल्लाह के हुक्म से पहले अपनी राय चलाता है, वह हद से आगे बढ़ जाता है।
यह आयत मोमिनों को सिखाती है कि उन्हें हर मामले में अल्लाह और रसूल ﷺ की इताअत (आज्ञाकारिता) को सबसे आगे रखना चाहिए। किसी भी काम को करने से पहले यह देखना चाहिए कि क्या अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने उसकी इजाज़त दी है या नहीं। अगर किसी काम में अल्लाह और रसूल ﷺ का हुक्म सामने आ जाए, तो अपनी राय, अपनी पसंद या अपनी इच्छा को पीछे छोड़ देना चाहिए।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और अल्लाह से डरो" यानी अल्लाह के हुक्म की ख़िलाफ़वरी से बचो, उसकी नाफ़रमानी से डरो। अपनी ज़ुबान और अपने अमल में अल्लाह से डरते हुए रहो, ताकि तुम कभी उसकी नाराज़गी का शिकार न हो जाओ।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला है" यानी अल्लाह तुम्हारी हर बात सुनता है, चाहे वह ज़ुबान से निकले या दिल में हो। वह तुम्हारे हर अमल, हर नीयत और हर हालत को जानता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है। वह तुम्हारे अच्छे और बुरे हर काम का हिसाब लेगा और उसका बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत मोमिन के लिए एक बहुत बड़ी तालीम है कि उसकी ज़िंदगी का हर पहलू अल्लाह और रसूल ﷺ की इताअत के ताबे हो। जब इंसान अपने हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को आगे रखता है, तो उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल सुकून पाता है और उसे अल्लाह की मदद और हिफ़ाज़त हासिल होती है। यही रास्ता कामयाबी का है — कि हम अपनी राय को अल्लाह की रज़ा पर क़ुर्बान कर दें, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बेहतर जानता है कि हमारे लिए क्या बेहतर है। जो लोग अल्लाह और रसूल ﷺ के आगे सर झुकाते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 1
सूरा अल-हुजुरात आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों ख़ुदा और उसके रसूल के सामने किसी बात…सूरा आयत 1/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हुजुरात
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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