अल-हुजुरात · 8/18
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हुजुरात
فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَنِعْمَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ۝٨
Fadlam minal laahi wa ni`mah; wallaahu `Aleemun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार और हिकमत वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَضْلًا: अल्लाह की ओर से विशेष अनुग्रह और उपकार।
  • نِعْمَةً: वह इनाम और नेमत जो अल्लाह अपने बंदों को देता है।
  • عَلِيمٌ: सब कुछ जानने वाला, हर बंदे के दिल का हाल जानता है।
  • حَكِيمٌ: पूर्ण तत्वदर्शी, हर काम में गहरी समझदारी और युक्ति रखने वाला।

तफसीर:

यह आयत उस महान उपकार की ओर इशारा करती है जो अल्लाह तआला अपने ईमानवालों पर करता है। जब कोई बंदा ईमान लाता है और अपने दिल को अल्लाह की तरफ मोड़ता है, तो अल्लाह उसके दिल में ईमान की मिठास डाल देता है, नेकी को प्यारा बना देता है और बुराई से नफरत पैदा कर देता है। यह कोई इंसानी कमाल नहीं, बल्कि अल्लाह का ख़ालिस फज़ल (अनुग्रह) और उसकी नेमत है।

अल्लाह तआला फरमाता है कि यह सब कुछ उसकी तरफ से है — वह अपने बंदों पर मेहरबानी करता है, उन्हें सीधा रास्ता दिखाता है और उनके दिलों को सच्चाई की तरफ राहत देता है। यह उसका फज़ल है जो वह जिसे चाहता है अता करता है, और यह उसकी नेमत है जो वह अपने चुने हुए बंदों पर नाज़िल करता है।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो खूबियाँ बयान करता है: "वह सब कुछ जानने वाला है" — वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से उसका शुक्र अदा करता है, कौन उसकी नेमतों की कद्र करता है, और कौन उन्हें भूल जाता है। वह हर बंदे के दिल की गहराई तक जानता है। "और वह पूर्ण तत्वदर्शी है" — वह हर चीज़ को उसके सही मुकाम पर रखता है, हर इंसान को उसकी हैसियत के मुताबिक तौफीक देता है, और हर मामले में उसकी युक्ति और हिकमत के आगे कोई सवाल नहीं उठ सकता।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जो भी अच्छाई हमारे अंदर आती है, जो भी नेकी हम करते हैं, वह अल्लाह की तरफ से है। हमें चाहिए कि हम उसका शुक्र अदा करें, उसकी नेमतों की कद्र करें और अपने दिल को अहंकार से पाक रखें। याद रखें, अल्लाह उन बंदों से मुहब्बत करता है जो उसके शुक्रगुज़ार होते हैं और उसकी राह पर चलते हैं। यही सच्ची कामयाबी है — कि इंसान अल्लाह के फज़ल को पहचाने, उसकी नेमत का शुक्र अदा करे और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक ढाले। अल्लाह तआला हम सबको यह तौफीक अता करे। आमीन।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-हुजुरात

6يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن جَاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوا أَن تُصِيبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَادِمِينَ
ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो (ऐसा न हो) कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7وَاعْلَمُوا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ اللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِي كَثِيرٍ مِّنَ الْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ الْإِيمَانَ وَزَيَّنَهُ فِي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَ
और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद) हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो (उलटे) तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन ख़ुदा ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग ख़ुदा के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
8فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَنِعْمَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार और हिकमत वाला है
9وَإِن طَائِفَتَانِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ اقْتَتَلُوا فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا ۖ فَإِن بَغَتْ إِحْدَاهُمَا عَلَى الْأُخْرَىٰ فَقَاتِلُوا الَّتِي تَبْغِي حَتَّىٰ تَفِيءَ إِلَىٰ أَمْرِ اللَّهِ ۚ فَإِن فَاءَتْ فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا بِالْعَدْلِ وَأَقْسِطُوا ۖ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُقْسِطِينَ
और अगर मोमिनीन में से दो फिरक़े आपस में लड़ पड़े तो उन दोनों में सुलह करा दो फिर अगर उनमें से एक (फ़रीक़) दूसरे पर ज्यादती करे तो जो (फिरक़ा) ज्यादती करे तुम (भी) उससे लड़ो यहाँ तक वह ख़ुदा के हुक्म की तरफ रूझू करे फिर जब रूजू करे तो फरीकैन में मसावात के साथ सुलह करा दो और इन्साफ़ से काम लो बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
10إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ إِخْوَةٌ فَأَصْلِحُوا بَيْنَ أَخَوَيْكُمْ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
मोमिनीन तो आपस में बस भाई भाई हैं तो अपने दो भाईयों में मेल जोल करा दिया करो और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए
अल-हुजुरातकुरान सूची
18आयत
मदनीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-हुजुरात 8

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Wednesday, September 30, 2026

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