अल-क़मर · 22/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ۝٢٢
Wa laqad yassamal Quraana liz zikri fahal mim muddakir
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسَّرْنَا: हमने आसान कर दिया
  • لِلذِّكْرِ: याद करने, नसीहत हासिल करने और सीखने के लिए
  • مُدَّكِر: नसीहत हासिल करने वाला, सीखने और समझने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बहुत बड़ी रहमत और एहसान का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने क़ुरआन को याद करने, समझने और नसीहत हासिल करने के लिए बेहद आसान बना दिया है। यह किताब ऐसी है कि बच्चे भी इसे आसानी से हिफ़्ज़ कर लेते हैं, बड़े भी इसे पढ़कर समझ जाते हैं, और जो लोग दिल से इसे अपनाना चाहते हैं, उनके लिए इसके हर लफ़्ज़ में हिदायत और रौशनी है। अल्लाह ने क़ुरआन के लफ़्ज़ों को तिलावत के लिए, उसके मानी को समझने के लिए और उसकी नसीहतों को दिल में उतारने के लिए आसान कर दिया है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे?" यानी यह आसानी पेश करने के बाद अल्लाह हमें चुनौती देता है कि अब कौन है जो इस आसान किताब से फ़ायदा उठाए, अपनी ज़िंदगी को इसके अनुसार ढाले और इसकी बरकतों से अपने दिल को रौशन करे? यह सवाल दिल को झिंझोड़ने वाला है — यह हर इंसान से पूछा जा रहा है कि क्या तू भी उन लोगों में से है जो क़ुरआन से नसीहत हासिल करते हैं?

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन को पढ़ना, सीखना, सिखाना और उस पर अमल करना हर मुसलमान के लिए आसान बना दिया गया है। अल्लाह ने इसे आसान इसलिए बनाया ताकि कोई भी बहाना न बना सके कि हमें समझ नहीं आता या हम सीख नहीं सकते। यह हमारे लिए अल्लाह की तरफ से एक खास मेहरबानी है कि उसने अपनी आख़िरी किताब को इतना आसान बनाया कि हर ज़ुबान वाला, हर उम्र का इंसान, हर स्तर का इंसान इसे सीख सके।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बुला रही है कि हम क़ुरआन की तरफ रुजू करें, इसे पढ़ें, इस पर ग़ौर करें और इसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएं। क़ुरआन हमारे लिए रहमत, शिफ़ा और हिदायत है। जो इसे पकड़ लेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। अल्लाह ने वादा किया है कि यह किताब क़यामत तक महफ़ूज़ रहेगी और इसकी हिदायत हर ज़माने के लिए काफी है। तो आओ, हम सब इस आसान किताब को अपनाएं, इसे पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी को इसकी रौशनी में ढालें — क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अल-क़मर

20تَنزِعُ النَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं
21فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
22وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
23كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِالنُّذُرِ
(क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
24فَقَالُوا أَبَشَرًا مِّنَّا وَاحِدًا نَّتَّبِعُهُ إِنَّا إِذًا لَّفِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
22आयत

अनुवाद — अल-क़मर 22

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Tuesday, August 18, 2026

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