अल-क़मर · 21/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ۝٢١
Fakaifa kaana `azaabee wa nuzur
📖 हिंदी अर्थ
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज़ाबी: मेरा अज़ाब (यातना)
  • नुज़ुर: मेरी चेतावनियाँ (डरावनी चेतावनियाँ)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी और सबक है जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और उनकी नसीहत को नज़रअंदाज़ करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ?" यानी जब पिछली उम्मतों ने अपने नबियों को झुठलाया, तो उन पर मेरा अज़ाब कितना सख्त और दर्दनाक आया। जैसे क़ौमे आद, समूद, और क़ौमे लूत पर जो अज़ाब आया, वह कितना भयानक था! उन्होंने चेतावनियों को मज़ाक समझा, लेकिन जब अज़ाब आया तो कोई बचाव न कर सका।

यहाँ अल्लाह तआला ने "अज़ाबी और नुज़ुर" का ज़िक्र दोहराया है ताकि दिलों में खौफ पैदा हो और लोग सोचें कि अल्लाह का अज़ाब कितना सख्त है। यह आयत क़ुरैश के काफिरों को संबोधित कर रही है कि तुम लोगों ने भी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को झुठलाया है, तो क्या तुम उन अज़ाबों से नहीं डरते जो पिछली उम्मतों पर आए?

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की चेतावनियों को कभी हल्का नहीं समझना चाहिए। जो लोग नबियों की बातों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह रहीम और करीम है — उसने हमेशा चेतावनी दी, ताकि लोग सुधर जाएँ और अज़ाब से बच जाएँ। अल्लाह की रहमत यह है कि वह पहले डराता है, फिर अज़ाब भेजता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन की हर चेतावनी को गंभीरता से लें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की राह पर चलें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है — कि हम उन लोगों में से न हों जिन पर अज़ाब आया, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्होंने चेतावनी सुनकर सुधार किया और अल्लाह की जन्नत के हक़दार बने।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-क़मर

19إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي يَوْمِ نَحْسٍ مُّسْتَمِرٍّ
हमने उन पर बहुत सख्त मनहूस दिन में बड़े ज़न्नाटे की ऑंधी चलायी
20تَنزِعُ النَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं
21فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
22وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
23كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِالنُّذُرِ
(क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — अल-क़मर 21

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Saturday, October 3, 2026

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