Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ثَمُود – समूद की क़ौम, यह नबी सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम थी।
- بِالنُّذُر – उन चेतावनियों और डरावने संदेशों से जो उन्हें उनके नबी के माध्यम से दिए गए थे।
तफ़सीर:
समूद की क़ौम ने उन सारी चेतावनियों को झुठला दिया जो उनके नबी सालिह अलैहिस्सलाम उन्हें दे रहे थे। यह वही क़ौम थी जिसे अल्लाह ने बड़ी ताक़त और सुख-समृद्धि दी थी, लेकिन उन्होंने अल्लाह के नबी को झुठलाया और उनकी नसीहतों को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा: "क्या हम एक अकेले इंसान की पैरवी करें जो हममें से ही है? हम तो उसे गुमराह और पागल समझते हैं।" यानी उन्होंने सच्चाई को सुनने के बावजूद घमंड और अकड़ में उसे ठुकरा दिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबियों की चेतावनियाँ कभी झूठी नहीं होतीं। जो क़ौमें इन चेतावनियों को झुठलाती हैं, वे अल्लाह के अज़ाब का शिकार होती हैं। समूद की क़ौम का अंजाम देखिए—उन्होंने सालिह अलैहिस्सलाम की चेतावनी को मज़ाक समझा, लेकिन अल्लाह का अज़ाब उन पर ऐसा आया कि उनका कोई बचाव न कर सका।
आज हमारे लिए यह सबक है कि हम क़ुरआन और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को गंभीरता से लें। ये चेतावनियाँ हमें बुराई से बचाने और अच्छाई की राह दिखाने के लिए हैं। जो इन्हें मान लेता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है, और जो इन्हें झुठलाता है, वह नुक़सान में रहता है। अल्लाह हमें सच्चाई को क़बूल करने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 21-25 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 23
सूरा अल-क़मर आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलायासूरा आयत 23/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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