सूरा अल-क़मर अरबी और हिंदी
सूरा अल-क़मर को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (55 आयत — مكية). अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf.सूरा अल-क़मर पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
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Mishary Rashid Alafasy
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Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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Maher Al Muaiqly
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x1
اقْتَرَبَتِ السَّاعَةُ وَانشَقَّ الْقَمَرُ ١
📖 अनुवाद
आयत 1
क़यामत क़रीब आ गयी और चाँद दो टुकड़े हो गया
وَإِن يَرَوْا آيَةً يُعْرِضُوا وَيَقُولُوا سِحْرٌ مُّسْتَمِرٌّ ٢
📖 अनुवाद
आयत 2
और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है
وَكَذَّبُوا وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُّسْتَقِرٌّ ٣
📖 अनुवाद
आयत 3
और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है
وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّنَ الْأَنبَاءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ ٤
📖 अनुवाद
आयत 4
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं
حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ ٥
📖 अनुवाद
आयत 5
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ ٦
📖 अनुवाद
आयत 6
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ ٧
📖 अनुवाद
आयत 7
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ ٨
📖 अनुवाद
आयत 8
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ ٩
📖 अनुवाद
आयत 9
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ ١٠
📖 अनुवाद
आयत 10
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُّنْهَمِرٍ ١١
📖 अनुवाद
आयत 11
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
وَفَجَّرْنَا الْأَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَاءُ عَلَىٰ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ ١٢
📖 अनुवाद
आयत 12
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया
وَحَمَلْنَاهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَاحٍ وَدُسُرٍ ١٣
📖 अनुवाद
आयत 13
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया
تَجْرِي بِأَعْيُنِنَا جَزَاءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ ١٤
📖 अनुवाद
आयत 14
और वह हमारी निगरानी में चल रही थी (ये) उस शख़्श (नूह) का बदला लेने के लिए जिसको लोग न मानते थे
وَلَقَد تَّرَكْنَاهَا آيَةً فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ١٥
📖 अनुवाद
आयत 15
और हमने उसको एक इबरत बना कर छोड़ा तो कोई है जो इबरत हासिल करे
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ١٧
📖 अनुवाद
आयत 17
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ١٨
📖 अनुवाद
आयत 18
आद (की क़ौम ने) (अपने पैग़म्बर) को झुठलाया तो (उनका) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था,
إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي يَوْمِ نَحْسٍ مُّسْتَمِرٍّ ١٩
📖 अनुवाद
आयत 19
हमने उन पर बहुत सख्त मनहूस दिन में बड़े ज़न्नाटे की ऑंधी चलायी
تَنزِعُ النَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ ٢٠
📖 अनुवाद
आयत 20
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ٢٢
📖 अनुवाद
आयत 22
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
فَقَالُوا أَبَشَرًا مِّنَّا وَاحِدًا نَّتَّبِعُهُ إِنَّا إِذًا لَّفِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ ٢٤
📖 अनुवाद
आयत 24
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए
أَأُلْقِيَ الذِّكْرُ عَلَيْهِ مِن بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ ٢٥
📖 अनुवाद
आयत 25
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है
سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ ٢٦
📖 अनुवाद
आयत 26
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ ٢٧
📖 अनुवाद
आयत 27
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ ٢٨
📖 अनुवाद
आयत 28
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ ٢٩
📖 अनुवाद
आयत 29
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ ٣١
📖 अनुवाद
आयत 31
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ٣٢
📖 अनुवाद
आयत 32
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ ٣٣
📖 अनुवाद
आयत 33
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّا آلَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَاهُم بِسَحَرٍ ٣٤
📖 अनुवाद
आयत 34
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया
نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي مَن شَكَرَ ٣٥
📖 अनुवाद
आयत 35
हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ ٣٦
📖 अनुवाद
आयत 36
और लूत ने उनको हमारी पकड़ से भी डराया था मगर उन लोगों ने डराते ही में शक़ किया
وَلَقَدْ رَاوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِ فَطَمَسْنَا أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٧
📖 अनुवाद
आयत 37
और उनसे उनके मेहमान (फ़रिश्ते) के बारे में नाजायज़ मतलब की ख्वाहिश की तो हमने उनकी ऑंखें अन्धी कर दीं तो मेरे अज़ाब और डराने का मज़ा चखो
وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٌ مُّسْتَقِرٌّ ٣٨
📖 अनुवाद
आयत 38
और सुबह सवेरे ही उन पर अज़ाब आ गया जो किसी तरह टल ही नहीं सकता था
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ٤٠
📖 अनुवाद
आयत 40
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
وَلَقَدْ جَاءَ آلَ فِرْعَوْنَ النُّذُرُ ٤١
📖 अनुवाद
आयत 41
और फिरऔन के पास भी डराने वाले (पैग़म्बर) आए
كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَاهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ ٤٢
📖 अनुवाद
आयत 42
तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है
أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ ٤٣
📖 अनुवाद
आयत 43
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है
أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ ٤٤
📖 अनुवाद
आयत 44
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ ٤٥
📖 अनुवाद
आयत 45
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ ٤٦
📖 अनुवाद
आयत 46
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ ٤٧
📖 अनुवाद
आयत 47
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं
يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ ٤٨
📖 अनुवाद
आयत 48
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो
إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ ٤٩
📖 अनुवाद
आयत 49
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है
وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَاحِدَةٌ كَلَمْحٍ بِالْبَصَرِ ٥٠
📖 अनुवाद
आयत 50
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है
وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ٥١
📖 अनुवाद
आयत 51
और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
وَكُلُّ شَيْءٍ فَعَلُوهُ فِي الزُّبُرِ ٥٢
📖 अनुवाद
आयत 52
और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَهَرٍ ٥٤
📖 अनुवाद
आयत 54
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में
فِي مَقْعَدِ صِدْقٍ عِندَ مَلِيكٍ مُّقْتَدِرٍ ٥٥
📖 अनुवाद
आयत 55
(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे
पढ़ें सूरा अल-क़मर हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

