अल-अनआम · 145/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُل لَّا أَجِدُ فِي مَا أُوحِيَ إِلَيَّ مُحَرَّمًا عَلَىٰ طَاعِمٍ يَطْعَمُهُ إِلَّا أَن يَكُونَ مَيْتَةً أَوْ دَمًا مَّسْفُوحًا أَوْ لَحْمَ خِنزِيرٍ فَإِنَّهُ رِجْسٌ أَوْ فِسْقًا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١٤٥
Qul laaa ajidu fee maaa oohiya ilaiya muharraman `alaa taa`iminy yat`amuhooo illaaa ai yakoona maitatan aw damam masfoohan aw lahma khinzeerin fa innahoo rijsun aw fisqan uhilla lighairil laahi bih; famanid turra ghaira baa ghinw wa laa `aadin fa inna Rabbaka Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मَيْتَةً: वह जानवर जो बिना इस्लामी तरीके (ज़बह) के मर गया हो।
  • دَمًا مَّسْفُوحًا: बहता हुआ खून (जो जानवर के ज़बह के समय बह निकले)।
  • رِجْسٌ: नापाक, गंदी और घृणित चीज़।
  • فِسْقًا: अवज्ञा और पाप का काम।
  • أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ: जिस पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो (जैसे बुतों या देवी-देवताओं के नाम पर ज़बह किया गया हो)।
  • اضْطُرَّ: मजबूर होना, विवश होना।
  • غَيْرَ بَاغٍ: जो (आराम और स्वाद के लिए) न चाहे, बल्कि सिर्फ जान बचाने के लिए खाए।
  • وَلَا عَادٍ: जो हद से आगे न बढ़े (यानी ज़रूरत से ज़्यादा न खाए)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि आप कहें: "मैं उस वही (प्रकाशना) में जो मेरी तरफ भेजी गई है, किसी खाने वाले के लिए कोई चीज़ हराम नहीं पाता, सिवाय इन चार चीज़ों के:

  1. मुरदार (मैटा): यानी वह जानवर जो बिना ज़बह के मर गया हो।
  2. बहता हुआ खून: यानी ज़बह के समय निकलने वाला खून।
  3. सुअर का गोश्त: क्योंकि वह पूरी तरह नापाक और घृणित है।
  4. वह जानवर जो अल्लाह के अलावा किसी और के नाम पर ज़बह किया गया हो: यह एक तरह का पाप और अवज्ञा है, क्योंकि इसमें अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत या नाम लिया गया।

फिर अल्लाह फरमाता है कि जो व्यक्ति मजबूरी में (जैसे भूख से जान बचाने के लिए) इनमें से कुछ खा ले, बशर्ते कि वह न तो स्वाद और आराम के लिए खाए और न ही ज़रूरत से ज़्यादा खाए, तो उस पर कोई गुनाह नहीं। क्योंकि तुम्हारा रब बड़ा क्षमाशील और दयावान है। वह अपने बंदों की मजबूरी को जानता है और उन पर रहम करता है।

यह आयत उस समय के अरबों के उन अंधविश्वासों का खंडन करती है जिनमें वे कुछ जानवरों को अपनी तरफ से हराम ठहरा लेते थे (जैसे बहीरा, साइबा, वसीला, हामी)। अल्लाह साफ करता है कि हलाल-हराम का अधिकार सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल को है, और वही सबसे अच्छा जानता है कि क्या पाक है और क्या नापाक।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम का दीन कितना आसान और फितरत (प्राकृतिक) के अनुकूल है। अल्लाह ने हराम चीज़ें सिर्फ इसलिए बनाईं क्योंकि वे नुकसानदेह और नापाक हैं। साथ ही, इस्लाम में मजबूरी की रियायत (छूट) दी गई है, ताकि कोई इंसान भूख से मर न जाए। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी की सबसे बड़ी मिसाल है। अल्लाह हमें हलाल और पाक रिज़्क़ दे, और हराम से बचाए। आमीन।



📜 आयत 143-147 — अल-अनआम

143ثَمَانِيَةَ أَزْوَاجٍ ۖ مِّنَ الضَّأْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِ ۗ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنثَيَيْنِ ۖ نَبِّئُونِي بِعِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है (ख़ुदा ने नर मादा मिलाकर) आठ (क़िस्म के) जोड़े पैदा किए हैं - भेड़ से (नर मादा) दो और बकरी से (नर मादा) दो (ऐ रसूल उन काफिरों से) पूछो तो कि ख़ुदा ने (उन दोनों भेड़ बकरी के) दोनों नरों को हराम कर दिया है या उन दोनों मादनियों को या उस बच्चे को जो उन दोनों मादनियों के पेट से अन्दर लिए हुए हैं
144وَمِنَ الْإِبِلِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْبَقَرِ اثْنَيْنِ ۗ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنثَيَيْنِ ۖ أَمْ كُنتُمْ شُهَدَاءَ إِذْ وَصَّاكُمُ اللَّهُ بِهَٰذَا ۚ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا لِّيُضِلَّ النَّاسَ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा समझ के मुझे बताओ और ऊँट के (नर मादा) दो और गाय के (नर मादा) दो (ऐ रसूल तुम उनसे) पूछो कि ख़ुदा ने उन दोनों (ऊँट गाय के) नरों को हराम किया या दोनों मादनियोंको या उस बच्चे को जो दोनों मादनियों के पेट अपने अन्दर लिये हुए है क्या जिस वक्त ख़ुदा ने तुमको उसका हुक्म दिया था तुम उस वक्त मौजूद थे फिर जो ख़ुदा पर झूठ बोताहन बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ताकि लोगों के वे समझे बूझे गुमराह करें ख़ुदा हरगिज़ ज़ालिम क़ौम में मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुचाता
145قُل لَّا أَجِدُ فِي مَا أُوحِيَ إِلَيَّ مُحَرَّمًا عَلَىٰ طَاعِمٍ يَطْعَمُهُ إِلَّا أَن يَكُونَ مَيْتَةً أَوْ دَمًا مَّسْفُوحًا أَوْ لَحْمَ خِنزِيرٍ فَإِنَّهُ رِجْسٌ أَوْ فِسْقًا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
146وَعَلَى الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا كُلَّ ذِي ظُفُرٍ ۖ وَمِنَ الْبَقَرِ وَالْغَنَمِ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ شُحُومَهُمَا إِلَّا مَا حَمَلَتْ ظُهُورُهُمَا أَوِ الْحَوَايَا أَوْ مَا اخْتَلَطَ بِعَظْمٍ ۚ ذَٰلِكَ جَزَيْنَاهُم بِبَغْيِهِمْ ۖ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हडड्ी से मिली हुई हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़शी की सज़ा दी थी और उसमें तो शक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं
147فَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل رَّبُّكُمْ ذُو رَحْمَةٍ وَاسِعَةٍ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُهُ عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) पर अगर वह तुम्हें झुठलाएं तो तुम (जवाब) में कहो कि (अगरचे) तुम्हारा परवरदिगार बड़ी वसीह रहमत वाला है मगर उसका अज़ाब गुनाहगार लोगों से टलता भी नहीं
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Tuesday, August 18, 2026

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