अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मَيْتَةً: वह जानवर जो बिना इस्लामी तरीके (ज़बह) के मर गया हो।
- دَمًا مَّسْفُوحًا: बहता हुआ खून (जो जानवर के ज़बह के समय बह निकले)।
- رِجْسٌ: नापाक, गंदी और घृणित चीज़।
- فِسْقًا: अवज्ञा और पाप का काम।
- أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ: जिस पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो (जैसे बुतों या देवी-देवताओं के नाम पर ज़बह किया गया हो)।
- اضْطُرَّ: मजबूर होना, विवश होना।
- غَيْرَ بَاغٍ: जो (आराम और स्वाद के लिए) न चाहे, बल्कि सिर्फ जान बचाने के लिए खाए।
- وَلَا عَادٍ: जो हद से आगे न बढ़े (यानी ज़रूरत से ज़्यादा न खाए)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि आप कहें: "मैं उस वही (प्रकाशना) में जो मेरी तरफ भेजी गई है, किसी खाने वाले के लिए कोई चीज़ हराम नहीं पाता, सिवाय इन चार चीज़ों के:
- मुरदार (मैटा): यानी वह जानवर जो बिना ज़बह के मर गया हो।
- बहता हुआ खून: यानी ज़बह के समय निकलने वाला खून।
- सुअर का गोश्त: क्योंकि वह पूरी तरह नापाक और घृणित है।
- वह जानवर जो अल्लाह के अलावा किसी और के नाम पर ज़बह किया गया हो: यह एक तरह का पाप और अवज्ञा है, क्योंकि इसमें अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत या नाम लिया गया।
फिर अल्लाह फरमाता है कि जो व्यक्ति मजबूरी में (जैसे भूख से जान बचाने के लिए) इनमें से कुछ खा ले, बशर्ते कि वह न तो स्वाद और आराम के लिए खाए और न ही ज़रूरत से ज़्यादा खाए, तो उस पर कोई गुनाह नहीं। क्योंकि तुम्हारा रब बड़ा क्षमाशील और दयावान है। वह अपने बंदों की मजबूरी को जानता है और उन पर रहम करता है।
यह आयत उस समय के अरबों के उन अंधविश्वासों का खंडन करती है जिनमें वे कुछ जानवरों को अपनी तरफ से हराम ठहरा लेते थे (जैसे बहीरा, साइबा, वसीला, हामी)। अल्लाह साफ करता है कि हलाल-हराम का अधिकार सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल को है, और वही सबसे अच्छा जानता है कि क्या पाक है और क्या नापाक।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम का दीन कितना आसान और फितरत (प्राकृतिक) के अनुकूल है। अल्लाह ने हराम चीज़ें सिर्फ इसलिए बनाईं क्योंकि वे नुकसानदेह और नापाक हैं। साथ ही, इस्लाम में मजबूरी की रियायत (छूट) दी गई है, ताकि कोई इंसान भूख से मर न जाए। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी की सबसे बड़ी मिसाल है। अल्लाह हमें हलाल और पाक रिज़्क़ दे, और हराम से बचाए। आमीन।
📜 आयत 143-147 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 145
सूरा अल-अनआम आयत 145 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे…सूरा आयत 145/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 143–147. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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