Wa `alal lazeena haadoo harramnaa kulla zee zufurinw wa minal baqari walghanami harramnaa `alihim shuh oomahumaaa illaa maa hamalat zuhooruhumaaa awil hawaayaaa aw makhtalata bi`azm zaalika jazainaahum bibaghyihim wa innaa lasaa diqoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हडड्ी से मिली हुई हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़शी की सज़ा दी थी और उसमें तो शक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं
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اور یہودیوں پر ہم نے سب ناخن والے جانور حرام کر دئیے تھے اور گایوں اور بکریوں سے ان کی چربی حرام کر دی تھی سوا اس کے جو ان کی پیٹھ پر لگی ہو یا اوجھڑی میں ہو یا ہڈی میں ملی ہو یہ سزا ہم نے ان کو ان کی شرارت کے سبب دی تھی اور ہم تو سچ کہنے والے ہیں
और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हडड्ी से मिली हुई हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़शी की सज़ा दी थी और उसमें तो शक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
ذِي ظُفُرٍ (ज़ी ज़ुफ़ुरिन): वह जानवर जिसके पंजे या खुर अलग-अलग (चीरे हुए) न हों, जैसे ऊँट, शुतुरमुर्ग, बत्तख आदि।
الْحَوَايَا (अल-हवाया): आँतें (अंतड़ियाँ)।
بِبَغْيِهِمْ (बिबग़्यिहिम): उनके ज़ुल्म और सरकशी के कारण।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि यहूदियों पर कौन-कौन सी चीज़ें हराम की गईं। यह बात उन मुशरिकों को बताई जा रही है जो यहूदियों की बातों में आकर यह कहते थे कि अल्लाह ने कोई चीज़ हराम नहीं की। अल्लाह ने फ़रमाया: हमने यहूदियों पर हर उस जानवर को हराम किया था जिसके पंजे या खुर अलग-अलग न हों, जैसे ऊँट, शुतुरमुर्ग, बत्तख और हर पंजे वाला पक्षी। इसके अलावा गाय और भेड़-बकरी की चर्बी भी हमने उन पर हराम की थी, लेकिन उस चर्बी को छोड़कर जो उनकी पीठ पर लगी हो, या आंतों में हो, या हड्डी के साथ मिली हुई हो (जैसे दुम की चर्बी)। यह सब हमने उनके ज़ुल्म और सरकशी की सज़ा के रूप में उन पर हराम किया था, क्योंकि वे नबियों को क़त्ल करते थे और सूद खाते थे। अल्लाह तआला इस बात में बिल्कुल सच्चा है जो वह उनके बारे में बताता है।
फ़ायदे (सबक़):
अल्लाह तआला अपने बन्दों पर बहुत मेहरबान है—उसने इस उम्मत (मुसलमानों) पर वे सख़्तियाँ नहीं रखीं जो पहले यहूदियों पर उनके ज़ुल्म की वजह से रखी गई थीं। यह हमारे लिए अल्लाह का बड़ा एहसान है।
गुनाह और सरकशी इंसान पर अल्लाह की नेअमतें तंग कर देती है, जबकि तक़्वा और इताअत रिज़्क़ और आसानी का ज़रिया है।
अल्लाह तआला का हर फ़ैसला हिकमत पर आधारित है—चाहे वह किसी चीज़ को हलाल करे या हराम, उसके पीछे कोई न कोई बुद्धिमानी और मसलहत होती है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के दीन की बातें उसके सच्चे ज्ञान के साथ समझनी चाहिए और झूठी बातों से बचना चाहिए, क्योंकि यहूदियों ने झूठ बोलकर लोगों को गुमराह किया था।
इस्लाम में हलाल और पाक चीज़ें खाने की तरग़ीब दी गई है, और हराम से बचना अल्लाह की मुहब्बत और उसके शुक्र का ज़रिया है।
अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा समझ के मुझे बताओ और ऊँट के (नर मादा) दो और गाय के (नर मादा) दो (ऐ रसूल तुम उनसे) पूछो कि ख़ुदा ने उन दोनों (ऊँट गाय के) नरों को हराम किया या दोनों मादनियोंको या उस बच्चे को जो दोनों मादनियों के पेट अपने अन्दर लिये हुए है क्या जिस वक्त ख़ुदा ने तुमको उसका हुक्म दिया था तुम उस वक्त मौजूद थे फिर जो ख़ुदा पर झूठ बोताहन बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ताकि लोगों के वे समझे बूझे गुमराह करें ख़ुदा हरगिज़ ज़ालिम क़ौम में मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुचाता
(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हडड्ी से मिली हुई हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़शी की सज़ा दी थी और उसमें तो शक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं
(ऐ रसूल) पर अगर वह तुम्हें झुठलाएं तो तुम (जवाब) में कहो कि (अगरचे) तुम्हारा परवरदिगार बड़ी वसीह रहमत वाला है मगर उसका अज़ाब गुनाहगार लोगों से टलता भी नहीं
अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े)े को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख्याल ख़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो
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