Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُبَشِّرِينَ: शुभ सूचना देने वाले (अर्थात, आज्ञाकारियों को स्वर्ग की खुशखबरी सुनाने वाले)।
- مُنذِرِينَ: डराने वाले (अर्थात, अवज्ञाकारियों को आग के अज़ाब से सावधान करने वाले)।
- آمَنَ: ईमान लाया (अर्थात, अल्लाह और उसके रसूलों को सच्चे दिल से स्वीकार किया)।
- أَصْلَحَ: सुधार किया (अर्थात, अपने आचरण और कर्मों को सही किया, जो बिगड़ा हुआ था उसे ठीक किया)।
- خَوْفٌ: डर (यहाँ अर्थ है अल्लाह की यातना और उसकी पकड़ से डर)।
- يَحْزَنُونَ: शोक करना, दुखी होना (यहाँ अर्थ है सांसारिक सुखों के छूट जाने पर पछतावा और अफसोस)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने रसूलों के भेजे जाने के उद्देश्य और उसके परिणाम को स्पष्ट कर रहा है। वह फ़रमाता है कि हम अपने रसूलों को केवल दो ही कार्यों के लिए भेजते हैं: एक, वे ईमानवालों और आज्ञाकारियों को उस स्थायी नेमत (स्वर्ग) की शुभ सूचना देते हैं जो कभी समाप्त नहीं होती; और दूसरे, वे काफ़िरों और अवज्ञाकारियों को हमारे कठोर अज़ाब से डराते हैं। यही रसूलों की मिशनरी ज़िम्मेदारी है — खुशखबरी और चेतावनी।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि जो व्यक्ति इन रसूलों पर ईमान लाया और अपने कर्मों को सुधार लिया — यानी अपने अंदर के बुरे गुणों को अच्छाई से बदल दिया, अपने कर्तव्यों को पूरा किया और अल्लाह की बताई हुई सीमाओं का पालन किया — तो ऐसे लोगों के लिए कोई डर नहीं है। वे न तो आख़िरत में अल्लाह की यातना से डरेंगे, और न ही उन्हें इस बात का शोक होगा कि उन्होंने दुनिया के कौन से सुख और लाभ खो दिए। क्योंकि उन्होंने दुनिया की अस्थायी चीज़ों को आख़िरत की स्थायी नेमतों के बदले में दे दिया, और यही सबसे बड़ी सफलता है।
फ़ायदे (उपदेश):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के रसूलों का आना पूरी मानवता के लिए रहमत है — वे लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर लाने के लिए आए, न कि उन्हें डराने या परेशान करने के लिए। उनका उद्देश्य हमेशा भलाई और मार्गदर्शन होता है।
- ईमान के साथ अच्छे कर्मों का होना आवश्यक है। केवल मुँह से ईमान का दावा करना काफ़ी नहीं है, बल्कि अपने जीवन को सुधारना और अच्छे कर्म करना भी ज़रूरी है। यही वास्तविक सफलता का मार्ग है।
- यह आयत मोमिनों को एक बड़ी खुशखबरी देती है कि उन्हें किसी बात का डर या शोक नहीं होगा। इससे मुसलमानों के दिलों में सुकून और आत्मविश्वास पैदा होता है कि अगर वे ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थिर रहें, तो उनका अंजाम हमेशा बेहतर होगा।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से पहले है — वह पहले खुशखबरी देता है, फिर डराता है। यह अल्लाह की दया और करुणा का प्रमाण है कि उसने लोगों को सीधा रास्ता दिखाने के लिए रसूल भेजे, ताकि कोई बहाना न बना सके।
📜 आयत 46-50 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 48
सूरा अल-अनआम आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम तो रसूलों को सिर्फ इस ग़रज़ से भेजते…सूरा आयत 48/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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