अल-अनआम · 49/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا يَمَسُّهُمُ الْعَذَابُ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ ۝٤٩
Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa yamassuhumul `azaabu bimaa kaanoo yafsuqoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब उनको पलट जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَذَّبُوا – झुठलाया, असत्य माना
  • بِآيَاتِنَا – हमारी आयतों (निशानियों, प्रमाणों और चमत्कारों) को
  • يَمَسُّهُمُ – उन्हें छूएगा, उन पर आ पड़ेगा
  • الْعَذَابُ – यातना, दंड
  • يَفْسُقُونَ – अवज्ञा करते हैं, आज्ञा से बाहर निकल जाते हैं (फ़िस्क़ = आज्ञा का उल्लंघन)

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया—चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या अल्लाह की पैग़म्बरों पर प्रकट की गई निशानियाँ और चमत्कार—उन पर यातना अवश्य आकर रहेगी। यह यातना उन्हें उनके कुकर्मों और अवज्ञा के कारण मिलेगी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन किया और सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह यातना संसार में भी हो सकती है और आख़िरत में अवश्य होगी। उनका झुठलाना केवल एक भूल नहीं थी, बल्कि यह उनके हठ, अहंकार और अल्लाह के प्रति विद्रोह का परिणाम था, इसलिए वे इस यातना के पात्र बने।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह की आयतों को झुठलाना सबसे बड़ा पाप है, जो व्यक्ति को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है और यातना का कारण बनता है।
  2. यातना और दंड अल्लाह की ओर से न्यायपूर्ण है—जो सत्य को जानकर भी अस्वीकार करे, वह अपने कर्मों का फल भुगतेगा।
  3. यह आयत मुसलमानों को चेतावनी देती है कि वे अल्लाह की आयतों को गंभीरता से लें, उन पर विचार करें और उनके अनुसार अपना जीवन ढालें।
  4. अल्लाह की रहमत और दंड दोनों उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित हैं—जो ईमान लाए और सुधार करे, उसके लिए क्षमा है; और जो झुठलाए और अवज्ञा करे, उसके लिए यातना है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के प्रति विनम्रता और आज्ञाकारिता ही सफलता का मार्ग है, और अभिमान तथा हठधर्मिता विनाश का कारण बनती है।


📜 आयत 47-51 — अल-अनआम

47قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ بَغْتَةً أَوْ جَهْرَةً هَلْ يُهْلَكُ إِلَّا الْقَوْمُ الظَّالِمُونَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर तुम्हारे सर पर ख़ुदा का अज़ाब बेख़बरी में या जानकारी में आ जाए तो क्या गुनाहगारों के सिवा और लोग भी हलाक़ किए जाएंगें (हरगिज़ नहीं)
48وَمَا نُرْسِلُ الْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۖ فَمَنْ آمَنَ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
और हम तो रसूलों को सिर्फ इस ग़रज़ से भेजते हैं कि (नेको को जन्नत की) खुशख़बरी दें और (बदो को अज़ाब जहन्नुम से) डराएं फिर जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो ऐसे लोगों पर (क़यामत में) न कोई ख़ौफ होगा और न वह ग़मग़ीन होगें
49وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا يَمَسُّهُمُ الْعَذَابُ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब उनको पलट जाएगा
50قُل لَّا أَقُولُ لَكُمْ عِندِي خَزَائِنُ اللَّهِ وَلَا أَعْلَمُ الْغَيْبَ وَلَا أَقُولُ لَكُمْ إِنِّي مَلَكٌ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ ۚ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ
(ऐ रसूल) उनसे कह दो कि मै तो ये नहीं कहता कि मेरे पास ख़ुदा के ख़ज़ाने हैं (कि ईमान लाने पर दे दूंगा) और न मै गैब के (कुल हालात) जानता हूँ और न मै तुमसे ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ मै तो बस जो (ख़ुदा की तरफ से) मेरे पास वही की जाती है उसी का पाबन्द हूँ (उनसे पूछो तो) कि अन्धा और ऑंख वाला बराबर हो सकता है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं सोचते
51وَأَنذِرْ بِهِ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं
अल-अनआमकुरान सूची
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49आयत

अनुवाद — अल-अनआम 49

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Tuesday, August 18, 2026

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