अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَذَّبُوا – झुठलाया, असत्य माना
- بِآيَاتِنَا – हमारी आयतों (निशानियों, प्रमाणों और चमत्कारों) को
- يَمَسُّهُمُ – उन्हें छूएगा, उन पर आ पड़ेगा
- الْعَذَابُ – यातना, दंड
- يَفْسُقُونَ – अवज्ञा करते हैं, आज्ञा से बाहर निकल जाते हैं (फ़िस्क़ = आज्ञा का उल्लंघन)
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया—चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या अल्लाह की पैग़म्बरों पर प्रकट की गई निशानियाँ और चमत्कार—उन पर यातना अवश्य आकर रहेगी। यह यातना उन्हें उनके कुकर्मों और अवज्ञा के कारण मिलेगी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन किया और सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह यातना संसार में भी हो सकती है और आख़िरत में अवश्य होगी। उनका झुठलाना केवल एक भूल नहीं थी, बल्कि यह उनके हठ, अहंकार और अल्लाह के प्रति विद्रोह का परिणाम था, इसलिए वे इस यातना के पात्र बने।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की आयतों को झुठलाना सबसे बड़ा पाप है, जो व्यक्ति को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है और यातना का कारण बनता है।
- यातना और दंड अल्लाह की ओर से न्यायपूर्ण है—जो सत्य को जानकर भी अस्वीकार करे, वह अपने कर्मों का फल भुगतेगा।
- यह आयत मुसलमानों को चेतावनी देती है कि वे अल्लाह की आयतों को गंभीरता से लें, उन पर विचार करें और उनके अनुसार अपना जीवन ढालें।
- अल्लाह की रहमत और दंड दोनों उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित हैं—जो ईमान लाए और सुधार करे, उसके लिए क्षमा है; और जो झुठलाए और अवज्ञा करे, उसके लिए यातना है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के प्रति विनम्रता और आज्ञाकारिता ही सफलता का मार्ग है, और अभिमान तथा हठधर्मिता विनाश का कारण बनती है।
📜 आयत 47-51 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 49
सूरा अल-अनआम आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि…सूरा आयत 49/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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