अल-अनआम · 47/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ بَغْتَةً أَوْ جَهْرَةً هَلْ يُهْلَكُ إِلَّا الْقَوْمُ الظَّالِمُونَ ۝٤٧
Qul ara`aitakum in ataakum `azaabul laahi baghtatan aw jahratan hal yuhlaku illal qawmuz zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर तुम्हारे सर पर ख़ुदा का अज़ाब बेख़बरी में या जानकारी में आ जाए तो क्या गुनाहगारों के सिवा और लोग भी हलाक़ किए जाएंगें (हरगिज़ नहीं)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَغْتَةً: अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के, जबकि लोगों को इसका एहसास भी न हो।
  • جَهْرَةً: खुले तौर पर, सामने, जबकि लोग इसे अपनी आँखों से देख रहे हों।
  • الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, वे लोग जो हद से आगे बढ़ गए, अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया और उसके रसूलों को झुठलाया।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "मुझे बताओ, अगर अल्लाह का अज़ाब तुम पर अचानक आ जाए, जबकि तुम्हें इसका ज़रा भी एहसास न हो, या खुले तौर पर तुम्हारे सामने आ जाए, जबकि तुम उसे अपनी आँखों से देख रहे हो—तो क्या इस अज़ाब में केवल अत्याचारी लोग ही नष्ट होंगे?" इसका उत्तर स्पष्ट है: हाँ, अल्लाह का अज़ाब केवल उन्हीं लोगों को पकड़ता है जो अत्याचारी हैं, यानी जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया, उसकी इबादत के बजाय दूसरों की इबादत की, और उसके रसूलों को झुठलाया। जहाँ तक नेक और ईमानवाले लोगों का सवाल है, वे इस अज़ाब से محفوظ रहेंगे, चाहे अज़ाब अचानक आए या खुले तौर पर। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने नेक बंदों को सज़ा से बचाता है, और उसका अज़ाब केवल उन्हीं के लिए है जिन्होंने ज़ुल्म और सरकशी की है।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की रहमत की खुशखबरी: यह आयत मोमिनों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह का अज़ाब केवल ज़ालिमों के लिए है। जो लोग ईमान रखते हैं और नेक काम करते हैं, वे अल्लाह की पनाह में रहते हैं, चाहे दुनिया में कितनी भी मुसीबतें क्यों न आएँ।
  2. ज़ुल्म से बचने की ताकीद: यह आयत हमें सिखाती है कि ज़ुल्म—चाहे वह अल्लाह के साथ शिर्क करना हो या लोगों के साथ नाइंसाफ़ी—विनाश का कारण बनता है। इसलिए हमें हर तरह के ज़ुल्म से बचना चाहिए।
  3. अल्लाह की पकड़ अचानक आ सकती है: अज़ाब अचानक या खुले तौर पर आ सकता है, इसलिए इंसान को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए। यह हमें तौबा और इस्तिग़फ़ार की तरफ़ ले जाता है।
  4. इस्लाम का न्यायपूर्ण पहलू: यह आयत इस्लाम के न्याय और रहमत के संतुलन को दिखाती है—अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि केवल उन्हीं को सज़ा देता है जो खुद ज़ुल्म करते हैं। यह हमें अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की पैरवी की तरफ़ राग़िब करती है।


📜 आयत 45-49 — सूरा अल-अनआम

45فَقُطِعَ دَابِرُ الْقَوْمِ الَّذِينَ ظَلَمُوا ۚ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर ज़ालिम लोगों की जड़ काट दी गयी और सारे जहाँन के मालिक ख़ुदा का शुक्र है
46قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَخَذَ اللَّهُ سَمْعَكُمْ وَأَبْصَارَكُمْ وَخَتَمَ عَلَىٰ قُلُوبِكُم مَّنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِهِ ۗ انظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ ثُمَّ هُمْ يَصْدِفُونَ
(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं
47قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ بَغْتَةً أَوْ جَهْرَةً هَلْ يُهْلَكُ إِلَّا الْقَوْمُ الظَّالِمُونَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर तुम्हारे सर पर ख़ुदा का अज़ाब बेख़बरी में या जानकारी में आ जाए तो क्या गुनाहगारों के सिवा और लोग भी हलाक़ किए जाएंगें (हरगिज़ नहीं)
48وَمَا نُرْسِلُ الْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۖ فَمَنْ آمَنَ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
और हम तो रसूलों को सिर्फ इस ग़रज़ से भेजते हैं कि (नेको को जन्नत की) खुशख़बरी दें और (बदो को अज़ाब जहन्नुम से) डराएं फिर जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो ऐसे लोगों पर (क़यामत में) न कोई ख़ौफ होगा और न वह ग़मग़ीन होगें
49وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا يَمَسُّهُمُ الْعَذَابُ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब उनको पलट जाएगा
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अल-अनआम 47

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Thursday, October 1, 2026

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