Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَغْتَةً: अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के, जबकि लोगों को इसका एहसास भी न हो।
- جَهْرَةً: खुले तौर पर, सामने, जबकि लोग इसे अपनी आँखों से देख रहे हों।
- الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, वे लोग जो हद से आगे बढ़ गए, अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया और उसके रसूलों को झुठलाया।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "मुझे बताओ, अगर अल्लाह का अज़ाब तुम पर अचानक आ जाए, जबकि तुम्हें इसका ज़रा भी एहसास न हो, या खुले तौर पर तुम्हारे सामने आ जाए, जबकि तुम उसे अपनी आँखों से देख रहे हो—तो क्या इस अज़ाब में केवल अत्याचारी लोग ही नष्ट होंगे?" इसका उत्तर स्पष्ट है: हाँ, अल्लाह का अज़ाब केवल उन्हीं लोगों को पकड़ता है जो अत्याचारी हैं, यानी जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया, उसकी इबादत के बजाय दूसरों की इबादत की, और उसके रसूलों को झुठलाया। जहाँ तक नेक और ईमानवाले लोगों का सवाल है, वे इस अज़ाब से محفوظ रहेंगे, चाहे अज़ाब अचानक आए या खुले तौर पर। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने नेक बंदों को सज़ा से बचाता है, और उसका अज़ाब केवल उन्हीं के लिए है जिन्होंने ज़ुल्म और सरकशी की है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की रहमत की खुशखबरी: यह आयत मोमिनों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह का अज़ाब केवल ज़ालिमों के लिए है। जो लोग ईमान रखते हैं और नेक काम करते हैं, वे अल्लाह की पनाह में रहते हैं, चाहे दुनिया में कितनी भी मुसीबतें क्यों न आएँ।
- ज़ुल्म से बचने की ताकीद: यह आयत हमें सिखाती है कि ज़ुल्म—चाहे वह अल्लाह के साथ शिर्क करना हो या लोगों के साथ नाइंसाफ़ी—विनाश का कारण बनता है। इसलिए हमें हर तरह के ज़ुल्म से बचना चाहिए।
- अल्लाह की पकड़ अचानक आ सकती है: अज़ाब अचानक या खुले तौर पर आ सकता है, इसलिए इंसान को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए। यह हमें तौबा और इस्तिग़फ़ार की तरफ़ ले जाता है।
- इस्लाम का न्यायपूर्ण पहलू: यह आयत इस्लाम के न्याय और रहमत के संतुलन को दिखाती है—अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि केवल उन्हीं को सज़ा देता है जो खुद ज़ुल्म करते हैं। यह हमें अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की पैरवी की तरफ़ राग़िब करती है।
📜 आयत 45-49 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 47
सूरा अल-अनआम आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो…सूरा आयत 47/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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