अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِآيَاتِنَا: हमारी आयतों पर (अर्थात क़ुरआन और उन सबूतों पर जो आपके सत्य होने की गवाही देते हैं)।
- كَتَبَ: अनिवार्य कर दिया, लिख दिया (अर्थात अपने ऊपर अनुग्रह और दया को आवश्यक कर लिया)।
- بِجَهَالَةٍ: अज्ञानता की हालत में (अर्थात नासमझी में, चाहे वह इंसान हराम होने को जानता हो, लेकिन उसके अंजाम और अल्लाह की नाराज़गी से बेखबर हो)।
- أَصْلَحَ: अपने कर्मों को सुधार लिया, अपनी तौबा को सच्चा और ख़ालिस कर लिया।
तफ़सीर:
ऐ नबी! जब आपके पास वे लोग आएँ जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं—चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या वे निशानियाँ जो आपके सच्चे होने की गवाही देती हैं—और वे अपने पिछले गुनाहों से तौबा करने के बारे में पूछें, तो उनका सम्मान करते हुए उन्हें सलाम का जवाब दें और उन्हें अल्लाह की व्यापक रहमत की खुशखबरी सुनाएँ। अल्लाह ने अपने ऊपर रहमत को अनिवार्य कर लिया है—यह उसका अपना फज़ल और करम है—और यह बात साफ़ कर दी है कि जो कोई तुममें से कोई बुरा काम करे, चाहे वह गुनाह जानते हुए भी करे या नासमझी में, और फिर उसके बाद तौबा कर ले और अपने अमल को सुधार ले, तो अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ कर देगा। बेशक अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों पर बहुत क्षमा करने वाला और उन पर बड़ी दया करने वाला है। यही वजह है कि नबी ﷺ जब ऐसे लोगों को देखते तो खुद पहल करके उन्हें सलाम करते।
फ़ायदे:
- अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से कहीं ज़्यादा व्यापक है, और वह अपने बंदों पर मेहरबानी करना अपने ऊपर अनिवार्य कर चुका है—यह उसका फज़ल है, कोई हक़ नहीं।
- गुनाह के बाद सच्ची तौबा और अमल की सुधार से इंसान अल्लाह की माफ़ी और रहमत का हक़दार बन जाता है, चाहे गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
- ईमान वालों के साथ नरमी, मुहब्बत और सम्मान का बर्ताव करना चाहिए, और उन्हें अल्लाह की रहमत की उम्मीद दिलानी चाहिए, न कि निराशा।
- यह आयत गुनाहगार मुसलमानों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है, और वह अपने बंदों की भलाई चाहता है।
📜 आयत 52-56 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 54
सूरा अल-अनआम आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे…सूरा आयत 54/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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