अल-अनआम · 54/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٥٤
Wa izaa jaaa`akal lazeena yu`minoona bi Aayaatinaa faqul salaamun `alaikum kataba Rabbukum `alaa nafsihir rahmata annahoo man `amila minkum sooo`am bijahaalatin summa taaba mim ba`dihee wa aslaha fa annahoo Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِآيَاتِنَا: हमारी आयतों पर (अर्थात क़ुरआन और उन सबूतों पर जो आपके सत्य होने की गवाही देते हैं)।
  • كَتَبَ: अनिवार्य कर दिया, लिख दिया (अर्थात अपने ऊपर अनुग्रह और दया को आवश्यक कर लिया)।
  • بِجَهَالَةٍ: अज्ञानता की हालत में (अर्थात नासमझी में, चाहे वह इंसान हराम होने को जानता हो, लेकिन उसके अंजाम और अल्लाह की नाराज़गी से बेखबर हो)।
  • أَصْلَحَ: अपने कर्मों को सुधार लिया, अपनी तौबा को सच्चा और ख़ालिस कर लिया।

तफ़सीर:

ऐ नबी! जब आपके पास वे लोग आएँ जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं—चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या वे निशानियाँ जो आपके सच्चे होने की गवाही देती हैं—और वे अपने पिछले गुनाहों से तौबा करने के बारे में पूछें, तो उनका सम्मान करते हुए उन्हें सलाम का जवाब दें और उन्हें अल्लाह की व्यापक रहमत की खुशखबरी सुनाएँ। अल्लाह ने अपने ऊपर रहमत को अनिवार्य कर लिया है—यह उसका अपना फज़ल और करम है—और यह बात साफ़ कर दी है कि जो कोई तुममें से कोई बुरा काम करे, चाहे वह गुनाह जानते हुए भी करे या नासमझी में, और फिर उसके बाद तौबा कर ले और अपने अमल को सुधार ले, तो अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ कर देगा। बेशक अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों पर बहुत क्षमा करने वाला और उन पर बड़ी दया करने वाला है। यही वजह है कि नबी ﷺ जब ऐसे लोगों को देखते तो खुद पहल करके उन्हें सलाम करते।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से कहीं ज़्यादा व्यापक है, और वह अपने बंदों पर मेहरबानी करना अपने ऊपर अनिवार्य कर चुका है—यह उसका फज़ल है, कोई हक़ नहीं।
  2. गुनाह के बाद सच्ची तौबा और अमल की सुधार से इंसान अल्लाह की माफ़ी और रहमत का हक़दार बन जाता है, चाहे गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
  3. ईमान वालों के साथ नरमी, मुहब्बत और सम्मान का बर्ताव करना चाहिए, और उन्हें अल्लाह की रहमत की उम्मीद दिलानी चाहिए, न कि निराशा।
  4. यह आयत गुनाहगार मुसलमानों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है, और वह अपने बंदों की भलाई चाहता है।


📜 आयत 52-56 — अल-अनआम

52وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِم مِّن شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ
और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार से उसकी ख़ुशनूदी की तमन्ना में दुऑए मॉगा करते हैं- उनको अपने पास से न धुत्कारो-न उनके (हिसाब किताब की) जवाब देही कुछ उनके ज़िम्मे है ताकि तुम उन्हें (इस ख्याल से) धुत्कार बताओ तो तुम ज़ालिम (के शुमार) में हो जाओगे
53وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
54وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
55وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ
और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले
56قُلْ إِنِّي نُهِيتُ أَنْ أَعْبُدَ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۚ قُل لَّا أَتَّبِعُ أَهْوَاءَكُمْ ۙ قَدْ ضَلَلْتُ إِذًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُهْتَدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
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54आयत

अनुवाद — अल-अनआम 54

सूरा अल-अनआम आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे…

सूरा आयत 54/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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