Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نُفَصِّلُ: हम स्पष्ट-स्पष्ट बयान करते हैं, खोलकर समझाते हैं।
- الْآيَاتِ: निशानियाँ, प्रमाण, और स्पष्ट आदेश।
- لِتَسْتَبِينَ: ताकि स्पष्ट हो जाए, प्रकट हो जाए।
- سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ: अपराधियों का मार्ग, उनका तरीका और उनकी चाल।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ हे नबी! जिस प्रकार हमने आपसे पहले भी सत्य को बयान किया और उसे स्पष्ट किया, उसी प्रकार हम अपनी आयतों और निशानियों को विस्तार से खोलकर बयान करते हैं, ताकि हर सत्य साफ़-साफ़ सामने आ जाए और किसी भी प्रकार का भ्रम या संदेह न रहे। यह बयान केवल सत्य के प्रमाण के लिए नहीं है, बल्कि इसका एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि अपराधियों का मार्ग और उनका तरीका पूरी तरह से स्पष्ट हो जाए। जब उनका रास्ता साफ़ होगा, तो लोग उसे पहचान सकेंगे, उससे बच सकेंगे, और उनके जाल में नहीं फँसेंगे। यहाँ "अपराधी" से मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करते हैं, रसूलों का विरोध करते हैं, और अपनी मनमानी पर चलते हैं। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उनके हालात, उनके अंजाम, और उनकी साज़िशों का विस्तार से वर्णन किया है, ताकि हर समझदार इंसान उनके रास्ते को पहचानकर उससे दूर रहे और सीधे मार्ग पर चले।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह तआला ने क़ुरआन में सत्य को इतने स्पष्ट और विस्तृत तरीके से बयान किया है कि किसी भी जानने और समझने वाले के लिए कोई बहाना नहीं बचता। यह अल्लाह की रहमत और उसकी ओर से मार्गदर्शन की पूर्णता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें बुराई और अपराध के रास्तों को पहचानना चाहिए, ताकि हम उनसे बच सकें। जब हम बुराई को उसकी असलियत में पहचान लेंगे, तो उससे दूर रहना आसान हो जाएगा।
- क़ुरआन सिर्फ़ अच्छाई की तरफ़ बुलाने के लिए नहीं आया, बल्कि वह बुराई की पहचान भी कराता है, ताकि इंसान सतर्क रहे और धोखे में न पड़े। यह क़ुरआन की एक बड़ी नेमत है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सत्य का रास्ता हमेशा साफ़ और रोशन होता है, और अल्लाह चाहता है कि उसके बंदे सत्य को अपनाएँ और झूठ और अपराध से दूर रहें। यह अल्लाह की इंसाफ़ और हिकमत का प्रमाण है।
- जो लोग अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करते हैं, उनका अंजाम और उनका तरीका क़ुरआन में बयान कर दिया गया है, ताकि हर इंसान उनसे सबक़ ले और अपनी ज़िंदगी को सुधारे। यह हमारे लिए एक चेतावनी और नसीहत है।
📜 आयत 53-57 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 55
सूरा अल-अनआम आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते…सूरा आयत 55/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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