अल-अनआम · 55/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ ۝٥٥
Wa kazaalika nufassilul Aayaati wa litastabeena sabeelul mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُفَصِّلُ: हम स्पष्ट-स्पष्ट बयान करते हैं, खोलकर समझाते हैं।
  • الْآيَاتِ: निशानियाँ, प्रमाण, और स्पष्ट आदेश।
  • لِتَسْتَبِينَ: ताकि स्पष्ट हो जाए, प्रकट हो जाए।
  • سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ: अपराधियों का मार्ग, उनका तरीका और उनकी चाल।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ हे नबी! जिस प्रकार हमने आपसे पहले भी सत्य को बयान किया और उसे स्पष्ट किया, उसी प्रकार हम अपनी आयतों और निशानियों को विस्तार से खोलकर बयान करते हैं, ताकि हर सत्य साफ़-साफ़ सामने आ जाए और किसी भी प्रकार का भ्रम या संदेह न रहे। यह बयान केवल सत्य के प्रमाण के लिए नहीं है, बल्कि इसका एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि अपराधियों का मार्ग और उनका तरीका पूरी तरह से स्पष्ट हो जाए। जब उनका रास्ता साफ़ होगा, तो लोग उसे पहचान सकेंगे, उससे बच सकेंगे, और उनके जाल में नहीं फँसेंगे। यहाँ "अपराधी" से मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करते हैं, रसूलों का विरोध करते हैं, और अपनी मनमानी पर चलते हैं। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उनके हालात, उनके अंजाम, और उनकी साज़िशों का विस्तार से वर्णन किया है, ताकि हर समझदार इंसान उनके रास्ते को पहचानकर उससे दूर रहे और सीधे मार्ग पर चले।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह तआला ने क़ुरआन में सत्य को इतने स्पष्ट और विस्तृत तरीके से बयान किया है कि किसी भी जानने और समझने वाले के लिए कोई बहाना नहीं बचता। यह अल्लाह की रहमत और उसकी ओर से मार्गदर्शन की पूर्णता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें बुराई और अपराध के रास्तों को पहचानना चाहिए, ताकि हम उनसे बच सकें। जब हम बुराई को उसकी असलियत में पहचान लेंगे, तो उससे दूर रहना आसान हो जाएगा।
  3. क़ुरआन सिर्फ़ अच्छाई की तरफ़ बुलाने के लिए नहीं आया, बल्कि वह बुराई की पहचान भी कराता है, ताकि इंसान सतर्क रहे और धोखे में न पड़े। यह क़ुरआन की एक बड़ी नेमत है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सत्य का रास्ता हमेशा साफ़ और रोशन होता है, और अल्लाह चाहता है कि उसके बंदे सत्य को अपनाएँ और झूठ और अपराध से दूर रहें। यह अल्लाह की इंसाफ़ और हिकमत का प्रमाण है।
  5. जो लोग अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करते हैं, उनका अंजाम और उनका तरीका क़ुरआन में बयान कर दिया गया है, ताकि हर इंसान उनसे सबक़ ले और अपनी ज़िंदगी को सुधारे। यह हमारे लिए एक चेतावनी और नसीहत है।


📜 आयत 53-57 — सूरा अल-अनआम

53وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
54وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
55وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ
और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले
56قُلْ إِنِّي نُهِيتُ أَنْ أَعْبُدَ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۚ قُل لَّا أَتَّبِعُ أَهْوَاءَكُمْ ۙ قَدْ ضَلَلْتُ إِذًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُهْتَدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
57قُلْ إِنِّي عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَكَذَّبْتُم بِهِ ۚ مَا عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ الْحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْفَاصِلِينَ
तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूं और तुमने उसे झुठला दिया (तो) तुम जिस की जल्दी करते हो (अज़ाब) वह कुछ मेरे पास (एख्तियार में) तो है नहीं हुकूमत तो बस ज़रुर ख़ुदा ही के लिए है वह तो (हक़) बयान करता है और वह तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — अल-अनआम 55

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Thursday, October 1, 2026

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