अल-अनआम · 53/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ ۝٥٣
Wa kazaalika fatannaa ba`dahum biba`dil liyaqoolooo ahaaa`ulaaa`i mannal laahu `alaihim mim baininaa; alaisal laahu bi-a`lama bish shaakireen
📖 हिंदी अर्थ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَتَنَّا: हमने परीक्षा में डाला / आज़माया
  • بَعْضَهُم بِبَعْضٍ: उनमें से एक को दूसरे के द्वारा
  • مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِمْ: अल्लाह ने उन पर उपकार किया (अर्थात् हिदायत का अनुग्रह किया)
  • بِالشَّاكِرِينَ: कृतज्ञता जताने वालों को (अर्थात् जो नेमतों का शुक्र अदा करते हैं)

तफ़सीर:

यह आयत एक बहुत ही गहरी और महत्वपूर्ण हक़ीक़त को बयान करती है। अल्लाह तआला ने अपनी बेपनाह हिकमत से लोगों को एक-दूसरे के ज़रिए आज़माया है। यानी उसने किसी को दौलत दी तो किसी को फ़क़ीरी, किसी को ताक़त दी तो किसी को कमज़ोरी, किसी को ऊँचा मुक़ाम दिया तो किसी को पस्त हालत। यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी से है, ताकि लोग एक-दूसरे के ज़रिए परखे जाएँ — अमीर को फ़क़ीर के ज़रिए, ताक़तवर को कमज़ोर के ज़रिए, और बड़े लोगों को छोटे लोगों के ज़रिए।

इसी इम्तिहान की वजह से मक्का के कुफ़्फ़ार के सरदार, जो दौलत और रुतबे में बड़े थे, जब देखते थे कि ग़रीब और कमज़ोर लोग — जैसे बिलाल, अम्मार, सुहैब और ख़ब्बाब रज़ियल्लाहु अन्हुम — नबी करीम ﷺ पर ईमान ला चुके हैं, तो वे अहंकार और हैरत से कहते थे: "क्या यही लोग हैं जिन पर अल्लाह ने हम सबमें से चुनकर उपकार किया है? क्या हमारे बीच से इन्हीं को हिदायत का शरफ़ मिला?" उनकी यह बात दरअसल उनके घमंड और अंधेपन की निशानी थी। वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि अल्लाह का फ़ज़ल और रहमत किसी की दौलत या नस्ल को नहीं देखता, बल्कि उसके दिल की सच्चाई और शुक्रगुज़ारी को देखता है।

अल्लाह तआला ने इसका जवाब ख़ुद दिया: "क्या अल्लाह उन लोगों को नहीं जानता जो शुक्र अदा करने वाले हैं?" यानी अल्लाह तो खूब जानता है कि कौन अपनी नेमतों का सही तरीक़े से शुक्र अदा करता है और उसे हिदायत का हक़दार बनाता है। जिन ग़रीब और कमज़ोर लोगों ने ईमान क़ुबूल किया, वही असल में शुक्रगुज़ार थे, क्योंकि उन्होंने हक़ को पहचाना और उसे क़ुबूल किया। रही बात अमीर और बड़े लोगों की, तो उनका घमंड और अकड़ ही उनके लिए फितना बन गई और वे हिदायत से महरूम रहे।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। यह हमें सिखाती है कि किसी इंसान की क़द्र उसकी दौलत, नस्ल, रंग या रुतबे से नहीं होती, बल्कि उसके दिल की पाकीज़गी, उसके ईमान और उसके अल्लाह के शुक्र से होती है। अल्लाह के नज़दीक सबसे प्यारा वही बंदा है जो उसका शुक्र अदा करे और उसकी नेमतों को पहचाने। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें किसी को उसकी ज़ाहिरी हालत की वजह से हक़ीर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि अल्लाह जानता है कि उसके बंदों में से कौन सच्चा शुक्रगुज़ार है और कौन नेमतों का इन्कारी। हमें चाहिए कि हम अपने दिल को अहंकार से पाक रखें, हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करें, और याद रखें कि हिदायत अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत है, जो वह जिसे चाहता है अपने फ़ज़ल से अता करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 51-55 — अल-अनआम

51وَأَنذِرْ بِهِ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं
52وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِم مِّن شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ
और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार से उसकी ख़ुशनूदी की तमन्ना में दुऑए मॉगा करते हैं- उनको अपने पास से न धुत्कारो-न उनके (हिसाब किताब की) जवाब देही कुछ उनके ज़िम्मे है ताकि तुम उन्हें (इस ख्याल से) धुत्कार बताओ तो तुम ज़ालिम (के शुमार) में हो जाओगे
53وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
54وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
55وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ
और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
53आयत

अनुवाद — अल-अनआम 53

सूरा अल-अनआम आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया…

सूरा आयत 53/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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