अल-अनआम · 94/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادَىٰ كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَاكُمْ وَرَاءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَاءَكُمُ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَاءُ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ ۝٩٤
Wa laqad ji`tumoonaa furaadaa kamaa khalaqnaakum awwala marratinw wa taraktum maa khawwalnaakum waraaa`a zuhoorikum wa maa naraa ma`akum shufa`aaa` akumul lazeena za`amtum annahum feekum shurakaaa`; laqat taqatta`a bainakum wa dalla `annkum maa kuntum taz`umoon
📖 हिंदी अर्थ
और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना) जिस तरह हमने तुम को पहली बार पैदा किया था और जो (माल व औलाद) हमने तुमको दिया था वह सब अपने पस्त पुश्त (पीछे) छोड़ आए और तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफारिश करने वालों को भी नहीं देखते जिन को तुम ख्याल करते थे कि वह तुम्हारी (परवरिश वगैरह) मै (हमारे) साझेदार है अब तो तुम्हारे बाहरी ताल्लुक़ात मनक़तआ (ख़त्म) हो गए और जो कुछ ख्याल करते थे वह सब तुम से ग़ायब हो गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فُرَادَىٰ: अकेले-अकेले, बिना किसी साथी या सहारे के।
  • خَوَّلْنَاكُمْ: हमने तुम्हें दिया था (धन, संपत्ति, सामर्थ्य)।
  • وَرَاءَ ظُهُورِكُمْ: अपने पीछे छोड़ आए (दुनिया में ही रह गया)।
  • شُفَعَاءَكُمُ: तुम्हारे सिफारिशी (जिन्हें तुम अपना मध्यस्थ मानते थे)।
  • تَقَطَّعَ بَيْنَكُمْ: तुम्हारा आपसी संबंध टूट गया।
  • ضَلَّ عَنكُمْ: तुमसे खो गया, गायब हो गया।

तफसीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन अल्लाह तआला काफ़िरों से फ़रमाएगा: "तुम आज हमारे सामने बिल्कुल अकेले-अकेले आए हो, ठीक उसी तरह जैसे हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था — नंगे, निर्वस्त्र, बिना किसी सामान के। आज न तो तुम्हारे पास धन है, न ऐशो-आराम का कोई साधन, न कोई साथी। जो कुछ हमने तुम्हें दुनिया में दिया था — माल, जायदाद, ओहदा, ताकत — वह सब कुछ तुमने पीछे छोड़ दिया और अब उसमें से कुछ भी तुम्हारे काम नहीं आ रहा।"

"और हम देख रहे हैं कि तुम्हारे वे 'सिफारिशी' भी तुम्हारे साथ नहीं हैं, जिन्हें तुमने दुनिया में पुकारा करते थे और दावा करते थे कि वे अल्लाह के साथ हमारे साझीदार हैं — हमारी पूजा के हक़दार हैं और हमारी सिफारिश करेंगे। आज वे सब गायब हैं, न उनका कोई निशान है और न उनकी कोई मदद।"

"तुम्हारा आपसी रिश्ता-नाता, तुम्हारी दोस्ती और मोहब्बत — सब कुछ टूट चुका है। जिन देवताओं की तुमने पूजा की थी और जिनसे उम्मीदें लगाई थीं कि वे तुम्हारी सिफारिश करेंगे, वे सब तुमसे बिछड़ गए और तुम्हारा उनसे कोई वास्ता नहीं रहा। आज तुम्हें साफ़ दिख गया कि तुम्हारा दावा झूठा था और तुम अपने आपको, अपने परिवार को और अपने धन को घाटे में डाल चुके हो।"


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें जीवन की सच्चाई से रूबरू कराती है कि दुनिया की हर चीज़ — धन, शोहरत, रिश्ते, ताकत — सब कुछ यहीं रह जाने वाला है। जिस दिन हम अल्लाह के सामने खड़े होंगे, उस दिन हमारे साथ केवल हमारे अच्छे या बुरे कर्म होंगे। इसलिए ऐ इंसान! उस दिन की तैयारी आज ही कर ले। अल्लाह की इबादत को अपना असली सहारा बना, क्योंकि वही अकेला है जो उस दिन काम आएगा। किसी और से उम्मीद मत रख, क्योंकि हर झूठा सहारा उस दिन बेकार साबित होगा। यही वह दिन है जब सच्चाई सामने आएगी और हर इंसान अपने किए का फल पाएगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सीधी राह पर चलाए और उस दिन हमें शर्मिंदा न करे। आमीन।



📜 आयत 92-96 — अल-अनआम

92وَهَٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
उसके बाद उन्हें छोड़ के (पडे झक मारा करें (और) अपनी तू तू मै मै में खेलते फिरें और (क़ुरान) भी वह किताब है जिसे हमने बाबरकत नाज़िल किया और उस किताब की तसदीक़ करती है जो उसके सामने (पहले से) मौजूद है और (इस वास्ते नाज़िल किया है) ताकि तुम उसके ज़रिए से अहले मक्का और उसके एतराफ़ के रहने वालों को (ख़ौफ ख़ुदा से) डराओ और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो उस पर (बे ताम्मुल) ईमान लाते है और वही अपनी अपनी नमाज़ में भी पाबन्दी करते हैं
93وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ قَالَ أُوحِيَ إِلَيَّ وَلَمْ يُوحَ إِلَيْهِ شَيْءٌ وَمَن قَالَ سَأُنزِلُ مِثْلَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ ۗ وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الظَّالِمُونَ فِي غَمَرَاتِ الْمَوْتِ وَالْمَلَائِكَةُ بَاسِطُو أَيْدِيهِمْ أَخْرِجُوا أَنفُسَكُمُ ۖ الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ غَيْرَ الْحَقِّ وَكُنتُمْ عَنْ آيَاتِهِ تَسْتَكْبِرُونَ
और उससे बढ़ कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (मूठ) इफ़तेरा करके कहे कि हमारे पास वही आयी है हालॉकि उसके पास वही वगैरह कुछ भी नही आयी या वह शख़्श दावा करे कि जैसा क़ुरान ख़ुदा ने नाज़िल किया है वैसा मै भी (अभी) अनक़रीब (जल्दी) नाज़िल किए देता हूँ और (ऐ रसूल) काश तुम देखते कि ये ज़ालिम मौत की सख्तियों में पड़ें हैं और फरिश्ते उनकी तरफ (जान निकाल लेने के वास्ते) हाथ लपका रहे हैं और कहते जाते हैं कि अपनी जानें निकालो आज ही तो तुम को रुसवाई के अज़ाब की सज़ा दी जाएगी क्योंकि तुम ख़ुदा पर नाहक़ (नाहक़) झूठ छोड़ा करते थे और उसकी आयतों को (सुनकर उन) से अकड़ा करते थे
94وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادَىٰ كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَاكُمْ وَرَاءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَاءَكُمُ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَاءُ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना) जिस तरह हमने तुम को पहली बार पैदा किया था और जो (माल व औलाद) हमने तुमको दिया था वह सब अपने पस्त पुश्त (पीछे) छोड़ आए और तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफारिश करने वालों को भी नहीं देखते जिन को तुम ख्याल करते थे कि वह तुम्हारी (परवरिश वगैरह) मै (हमारे) साझेदार है अब तो तुम्हारे बाहरी ताल्लुक़ात मनक़तआ (ख़त्म) हो गए और जो कुछ ख्याल करते थे वह सब तुम से ग़ायब हो गए
95۞ إِنَّ اللَّهَ فَالِقُ الْحَبِّ وَالنَّوَىٰ ۖ يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَمُخْرِجُ الْمَيِّتِ مِنَ الْحَيِّ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
ख़ुदा ही तो गुठली और दाने को चीर (करके दरख्त ऊगाता) है वही मुर्दे में से ज़िन्दे को निकालता है और वही ज़िन्दा से मुर्दे को निकालने वाला है (लोगों) वही तुम्हारा ख़ुदा है फिर तुम किधर बहके जा रहे हो
96فَالِقُ الْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ اللَّيْلَ سَكَنًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ حُسْبَانًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
94आयत

अनुवाद — अल-अनआम 94

सूरा अल-अनआम आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना)…

सूरा आयत 94/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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