अल-अनआम · 93/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ قَالَ أُوحِيَ إِلَيَّ وَلَمْ يُوحَ إِلَيْهِ شَيْءٌ وَمَن قَالَ سَأُنزِلُ مِثْلَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ ۗ وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الظَّالِمُونَ فِي غَمَرَاتِ الْمَوْتِ وَالْمَلَائِكَةُ بَاسِطُو أَيْدِيهِمْ أَخْرِجُوا أَنفُسَكُمُ ۖ الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ غَيْرَ الْحَقِّ وَكُنتُمْ عَنْ آيَاتِهِ تَسْتَكْبِرُونَ ۝٩٣
Wa man azlamu mimmanif taraa `alal laahi kaziban aw qaala oohiya ilaiya wa lam yooha ilaihi shai`un wa man qaala sa unzilu misla maaa anzalal laah; wa law taraaa iziz zaalimoona fee ghamaraatil mawti walmalaaa`ikatu baasitooo aideehim akhrijooo anfusakum; al yawma tujzawna `azaabal hooni bimaa kuntum taqooloona `alal laahi ghairal haqqi wa kuntum `an aayaatihee tastakbiroon
📖 हिंदी अर्थ
और उससे बढ़ कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (मूठ) इफ़तेरा करके कहे कि हमारे पास वही आयी है हालॉकि उसके पास वही वगैरह कुछ भी नही आयी या वह शख़्श दावा करे कि जैसा क़ुरान ख़ुदा ने नाज़िल किया है वैसा मै भी (अभी) अनक़रीब (जल्दी) नाज़िल किए देता हूँ और (ऐ रसूल) काश तुम देखते कि ये ज़ालिम मौत की सख्तियों में पड़ें हैं और फरिश्ते उनकी तरफ (जान निकाल लेने के वास्ते) हाथ लपका रहे हैं और कहते जाते हैं कि अपनी जानें निकालो आज ही तो तुम को रुसवाई के अज़ाब की सज़ा दी जाएगी क्योंकि तुम ख़ुदा पर नाहक़ (नाहक़) झूठ छोड़ा करते थे और उसकी आयतों को (सुनकर उन) से अकड़ा करते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • غَمَرَاتِ الْمَوْتِ: मृत्यु की सख्तियाँ, सकरात और तकलीफें।
  • بَاسِطُو أَيْدِيهِمْ: अपने हाथों को फैलाए हुए (आत्मा निकालने के लिए)।
  • عَذَابَ الْهُونِ: अपमानित करने वाला अज़ाब, जो इज़्ज़त छीन ले।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने सबसे बड़े ज़ुल्म का ज़िक्र किया है, और वो है अल्लाह पर झूठ बोलना और उसके दीन में मनघड़ंत बातें जोड़ना। अल्लाह तआला फ़रमाता है: उस शख्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा इफ्तिरा करे, या ये दावा करे कि "मेरी तरफ वही आई है" हालाँकि उसकी तरफ कोई वही नहीं आई? या वो शख्स जो कहे कि "मैं भी ऐसा कलाम उतार सकता हूँ जैसा अल्लाह ने उतारा है"? ये तीनों किस्म के लोग सबसे बड़े ज़ालिम हैं, क्योंकि ये अल्लाह की नुबुव्वत और कलाम में झूठी मिलावट करते हैं।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से ख़िताब करते हुए फ़रमाता है: "ऐ नबी! अगर तुम उन ज़ालिमों को उस वक़्त देखते जब वो मौत की सख्तियों में होते हैं, और फ़रिश्ते अपने हाथ फैलाए हुए उनकी रूहें निकालने के लिए खड़े होते हैं, और उन्हें डाँटते हुए कहते हैं: 'अपनी जानें निकालो! आज तुम्हें अपमानित करने वाला अज़ाब दिया जाएगा, क्योंकि तुम अल्लाह पर झूठ बोलते थे और उसकी आयतों के सामने घमंड करते थे' — तो तुम एक बहुत ही भयानक मंज़र देखते।"

ये आयत मुसैलिमा कज़्ज़ाब और उन मुनाफ़िक़ों के बारे में नाज़िल हुई जो नबुव्वत का झूठा दावा करते थे, और उन लोगों के बारे में भी जो कहते थे कि "अगर हम चाहें तो भी ऐसा कलाम कह सकते हैं।"

दावती पहलू:

ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन के साथ खिलवाड़ करना, उसकी आयतों को झुठलाना, और नबुव्वत का झूठा दावा करना — ये सबसे बड़े गुनाह हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के कलाम को सच्चे दिल से क़बूल करें, उसकी आयतों के सामने अपने घमंड को तोड़ें, और उसके नबी ﷺ पर ईमान लाएँ। याद रखें, मौत का वक़्त बहुत सख्त होता है, और जो लोग दुनिया में अल्लाह के सामने घमंड करते हैं, उन्हें उस वक़्त बहुत ज़लील होना पड़ता है। अल्लाह तआला हमें सच्ची ईमान और अच्छे आख़िरत की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 91-95 — अल-अनआम

91وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ إِذْ قَالُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ عَلَىٰ بَشَرٍ مِّن شَيْءٍ ۗ قُلْ مَنْ أَنزَلَ الْكِتَابَ الَّذِي جَاءَ بِهِ مُوسَىٰ نُورًا وَهُدًى لِّلنَّاسِ ۖ تَجْعَلُونَهُ قَرَاطِيسَ تُبْدُونَهَا وَتُخْفُونَ كَثِيرًا ۖ وَعُلِّمْتُم مَّا لَمْ تَعْلَمُوا أَنتُمْ وَلَا آبَاؤُكُمْ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ ثُمَّ ذَرْهُمْ فِي خَوْضِهِمْ يَلْعَبُونَ
और बस और उन लोगों (यहूद) ने ख़ुदा की जैसी क़दर करनी चाहिए न की इसलिए कि उन लोगों ने (बेहूदे पन से) ये कह दिया कि ख़ुदा ने किसी बशर (इनसान) पर कुछ नाज़िल नहीं किया (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि फिर वह किताब जिसे मूसा लेकर आए थे किसने नाज़िल की जो लोगों के लिए रौशनी और (अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत (थी जिसे तुम लोगों ने अलग-अलग करके काग़जी औराक़ (कागज़ के पन्ने) बना डाला और इसमें को कुछ हिस्सा (जो तुम्हारे मतलब का है वह) तो ज़ाहिर करते हो और बहुतेरे को (जो ख़िलाफ मदआ है) छिपाते हो हालॉकि उसी किताब के ज़रिए से तुम्हें वो बातें सिखायी गयी जिन्हें न तुम जानते थे और न तुम्हारे बाप दादा (ऐ रसूल वह तो जवाब देगें नहीं) तुम ही कह दो कि ख़ुदा ने (नाज़िल फरमाई)
92وَهَٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
उसके बाद उन्हें छोड़ के (पडे झक मारा करें (और) अपनी तू तू मै मै में खेलते फिरें और (क़ुरान) भी वह किताब है जिसे हमने बाबरकत नाज़िल किया और उस किताब की तसदीक़ करती है जो उसके सामने (पहले से) मौजूद है और (इस वास्ते नाज़िल किया है) ताकि तुम उसके ज़रिए से अहले मक्का और उसके एतराफ़ के रहने वालों को (ख़ौफ ख़ुदा से) डराओ और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो उस पर (बे ताम्मुल) ईमान लाते है और वही अपनी अपनी नमाज़ में भी पाबन्दी करते हैं
93وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ قَالَ أُوحِيَ إِلَيَّ وَلَمْ يُوحَ إِلَيْهِ شَيْءٌ وَمَن قَالَ سَأُنزِلُ مِثْلَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ ۗ وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الظَّالِمُونَ فِي غَمَرَاتِ الْمَوْتِ وَالْمَلَائِكَةُ بَاسِطُو أَيْدِيهِمْ أَخْرِجُوا أَنفُسَكُمُ ۖ الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ غَيْرَ الْحَقِّ وَكُنتُمْ عَنْ آيَاتِهِ تَسْتَكْبِرُونَ
और उससे बढ़ कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (मूठ) इफ़तेरा करके कहे कि हमारे पास वही आयी है हालॉकि उसके पास वही वगैरह कुछ भी नही आयी या वह शख़्श दावा करे कि जैसा क़ुरान ख़ुदा ने नाज़िल किया है वैसा मै भी (अभी) अनक़रीब (जल्दी) नाज़िल किए देता हूँ और (ऐ रसूल) काश तुम देखते कि ये ज़ालिम मौत की सख्तियों में पड़ें हैं और फरिश्ते उनकी तरफ (जान निकाल लेने के वास्ते) हाथ लपका रहे हैं और कहते जाते हैं कि अपनी जानें निकालो आज ही तो तुम को रुसवाई के अज़ाब की सज़ा दी जाएगी क्योंकि तुम ख़ुदा पर नाहक़ (नाहक़) झूठ छोड़ा करते थे और उसकी आयतों को (सुनकर उन) से अकड़ा करते थे
94وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادَىٰ كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَاكُمْ وَرَاءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَاءَكُمُ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَاءُ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना) जिस तरह हमने तुम को पहली बार पैदा किया था और जो (माल व औलाद) हमने तुमको दिया था वह सब अपने पस्त पुश्त (पीछे) छोड़ आए और तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफारिश करने वालों को भी नहीं देखते जिन को तुम ख्याल करते थे कि वह तुम्हारी (परवरिश वगैरह) मै (हमारे) साझेदार है अब तो तुम्हारे बाहरी ताल्लुक़ात मनक़तआ (ख़त्म) हो गए और जो कुछ ख्याल करते थे वह सब तुम से ग़ायब हो गए
95۞ إِنَّ اللَّهَ فَالِقُ الْحَبِّ وَالنَّوَىٰ ۖ يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَمُخْرِجُ الْمَيِّتِ مِنَ الْحَيِّ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
ख़ुदा ही तो गुठली और दाने को चीर (करके दरख्त ऊगाता) है वही मुर्दे में से ज़िन्दे को निकालता है और वही ज़िन्दा से मुर्दे को निकालने वाला है (लोगों) वही तुम्हारा ख़ुदा है फिर तुम किधर बहके जा रहे हो
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
93आयत

अनुवाद — अल-अनआम 93

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Tuesday, August 18, 2026

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