अल-आराफ · 1/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
المص ۝١
Alif-Laaam-Meeem-Saaad
📖 हिंदी अर्थ
अलिफ़ लाम मीम स्वाद

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

"المص" — यह हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षरों) में से है। ये अक्षर क़ुरआन के मु'जिज़ा (चमत्कार) की निशानी हैं और इनका सही अर्थ केवल अल्लाह ही जानता है। इन अक्षरों का उल्लेख क़ुरआन की कई सूरहों की शुरुआत में हुआ है।

तफ़सीर (व्याख्या):

"المص" उन हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत में से है जिनका ज़िक्र क़ुरआन-ए-करीम की शुरुआती सूरहों में बार-बार आया है। ये अक्षर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह क़ुरआन उन्हीं अरबी हरफ़ों से बना है जिन्हें अरब के लोग बोलते और समझते हैं, फिर भी कोई भी इस जैसी किताब पेश करने पर क़ादिर नहीं है। यह क़ुरआन के अल्लाह की तरफ से होने का एक बड़ा सबूत है। इन अक्षरों का असली मतलब अल्लाह के इल्म से जुड़ा हुआ है, और हमें इन पर ईमान लाना चाहिए। जैसा कि सूरह बक़रह की शुरुआत में इन अक्षरों का ज़िक्र हुआ है, उसी तरह यहाँ भी इनका उल्लेख है। यह क़ुरआन की अज़मत और उसके मु'जिज़ा होने की दलील है।

फ़ायदे (सीख):

  1. हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत हमें सिखाते हैं कि क़ुरआन अल्लाह की किताब है और उसकी हर आयत पर बिना किसी शक के ईमान लाना चाहिए, चाहे हम उसका पूरा मतलब न समझ पाएँ।
  2. ये अक्षर क़ुरआन के मु'जिज़ा होने की गवाही देते हैं — कि अरब के फ़सीह (वाक्पटु) लोग भी इस जैसी किताब नहीं ला सके, हालाँकि यह उन्हीं की ज़बान में उतरी।
  3. इससे हमें क़ुरआन की तरफ रग़बत बढ़ानी चाहिए — कि हम इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी हिदायत और कामयाबी का ज़रिया है।
  4. यह आयत हमें अल्लाह के इल्म की बेपनाह गहराई का एहसास दिलाती है और हमें अज्ज़त (विनम्रता) के साथ उसकी तरफ रुजू करना सिखाती है।


📜 आयत 1-3 — सूरा अल-आराफ

1المص
अलिफ़ लाम मीम स्वाद
2كِتَابٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो
3اتَّبِعُوا مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-आराफ 1

सूरा अल-आराफ आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अलिफ़ लाम मीम स्वाद

सूरा आयत 1/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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