अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَرَجٌ: संकीर्णता, तंगी, संदेह या मन में कोई बोझ/दबाव।
- لِتُنذِرَ بِهِ: ताकि तू इस (किताब) के द्वारा डराए (सचेत करे)।
- ذِكْرَى: नसीहत, याद दिलाना, उपदेश।
व्याख्या:
यह कुरआन एक महान किताब है जिसे अल्लाह ने आप (ऐ रसूल) पर उतारा है। अतः आपके सीने में इसके प्रति कोई तंगी, संदेह या झिझक नहीं होनी चाहिए—न इस बात में कि यह अल्लाह की ओर से उतरा है, और न इस बात में कि इसे लोगों तक पहुँचाने और उन्हें सचेत करने में कोई कठिनाई या भय हो। यह किताब इसलिए उतारी गई है ताकि आप इसके द्वारा काफिरों को अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करें, और ताकि यह ईमानवालों के लिए नसीहत और याद दिलाने का ज़रिया बने—क्योंकि नसीहत से लाभ उठाने वाले तो सच्चे मोमिन ही हैं। आप पर केवल संदेश पहुँचाना है, उनके ईमान लाने की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से आई हुई चीज़ (कुरआन) पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और उसे पहुँचाने में किसी भी प्रकार का डर या संकोच नहीं करना चाहिए।
- इससे पता चलता है कि कुरआन का मुख्य उद्देश्य लोगों को सचेत करना और ईमानवालों को नसीहत देना है—यानी यह किताब हिदायत और रहमत का ज़रिया है।
- यह आयत मोमिनों को खुशखबरी देती है कि कुरआन उनके लिए ज़िक्र (याद दिलाने) और नसीहत का स्रोत है, जो उन्हें हर भले काम की ओर ले जाती है और बुराइयों से रोकती है।
- हमें सिखाती है कि सच्चाई और सत्य के प्रचार में किसी भी सामाजिक दबाव या व्यक्तिगत चिंता को हमें रुकावट नहीं बनने देना चाहिए—यही अल्लाह के रसूल का तरीका था।
📜 आयत 1-4 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 2
सूरा अल-आराफ आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़…सूरा आयत 2/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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