अल-आराफ · 2/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
كِتَابٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ ۝٢
Kitaabun unzila ilaika falaa yakum fee sadrika harajum minhu litunzira bihee wa zikraa lilmu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَرَجٌ: संकीर्णता, तंगी, संदेह या मन में कोई बोझ/दबाव।
  • لِتُنذِرَ بِهِ: ताकि तू इस (किताब) के द्वारा डराए (सचेत करे)।
  • ذِكْرَى: नसीहत, याद दिलाना, उपदेश।

व्याख्या:

यह कुरआन एक महान किताब है जिसे अल्लाह ने आप (ऐ रसूल) पर उतारा है। अतः आपके सीने में इसके प्रति कोई तंगी, संदेह या झिझक नहीं होनी चाहिए—न इस बात में कि यह अल्लाह की ओर से उतरा है, और न इस बात में कि इसे लोगों तक पहुँचाने और उन्हें सचेत करने में कोई कठिनाई या भय हो। यह किताब इसलिए उतारी गई है ताकि आप इसके द्वारा काफिरों को अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करें, और ताकि यह ईमानवालों के लिए नसीहत और याद दिलाने का ज़रिया बने—क्योंकि नसीहत से लाभ उठाने वाले तो सच्चे मोमिन ही हैं। आप पर केवल संदेश पहुँचाना है, उनके ईमान लाने की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से आई हुई चीज़ (कुरआन) पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और उसे पहुँचाने में किसी भी प्रकार का डर या संकोच नहीं करना चाहिए।
  2. इससे पता चलता है कि कुरआन का मुख्य उद्देश्य लोगों को सचेत करना और ईमानवालों को नसीहत देना है—यानी यह किताब हिदायत और रहमत का ज़रिया है।
  3. यह आयत मोमिनों को खुशखबरी देती है कि कुरआन उनके लिए ज़िक्र (याद दिलाने) और नसीहत का स्रोत है, जो उन्हें हर भले काम की ओर ले जाती है और बुराइयों से रोकती है।
  4. हमें सिखाती है कि सच्चाई और सत्य के प्रचार में किसी भी सामाजिक दबाव या व्यक्तिगत चिंता को हमें रुकावट नहीं बनने देना चाहिए—यही अल्लाह के रसूल का तरीका था।


📜 आयत 1-4 — सूरा अल-आराफ

1المص
अलिफ़ लाम मीम स्वाद
2كِتَابٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो
3اتَّبِعُوا مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो
4وَكَم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا فَجَاءَهَا بَأْسُنَا بَيَاتًا أَوْ هُمْ قَائِلُونَ
तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और क्या (तुम्हें) ख़बर नहीं कि ऐसी बहुत सी बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर डाला तो हमारा अज़ाब (ऐसे वक्त) आ पहुचा
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-आराफ 2

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Sunday, October 11, 2026

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