अल-आराफ · 171/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
۞ وَإِذْ نَتَقْنَا الْجَبَلَ فَوْقَهُمْ كَأَنَّهُ ظُلَّةٌ وَظَنُّوا أَنَّهُ وَاقِعٌ بِهِمْ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ ۝١٧١
Wa iz nataqnal jabala fawqahum ka annahoo zullatunw wa zannooo annahoo waaqi`um bihim khuzoo maaa aatainaakum biquwwatinw wazkuroo maa feehi la`allakum tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَتَقْنَا: हमने उखाड़ा, जड़ से हिलाकर उठा लिया।
  • ظُلَّةٌ: छाया करने वाली चीज़, बादल का टुकड़ा या साया।
  • وَظَنُّوا: उन्होंने निश्चित जान लिया, यक़ीन कर लिया।
  • بِقُوَّةٍ: दृढ़ता, गंभीरता और पूरे इरादे के साथ।
  • تَتَّقُونَ: तुम परहेज़गार बनो, अल्लाह के अज़ाब से बचो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! उस वक़्त को याद करो जब हमने बनी इसराईल के सर उठाने से इनकार करने पर उनके ऊपर पहाड़ को उखाड़कर उठा लिया, और वह उनके सिरों पर इस तरह मंडलाने लगा जैसे कोई बादल छाया कर रहा हो। उन्होंने जब यह देखा तो उन्हें पूरा यक़ीन हो गया कि यह पहाड़ अब उन पर गिरकर उन्हें कुचल देगा। उस वक़्त हमने उनसे कहा: "जो किताब (तौरात) हमने तुम्हें दी है, उसे मज़बूती से पकड़ो, उस पर पूरी गंभीरता और दृढ़ संकल्प के साथ अमल करो, और जो कुछ उसमें मौजूद है — उसके हुक्म, उसकी वसीयतें और जो अहद हमने तुमसे लिए हैं — उन्हें याद रखो और उन पर अमल करते रहो, ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ और अल्लाह के अज़ाब से बच सको।"

यह वाक़िया बनी इसराईल की सख़्त दिली और हठधर्मी को बयान करता है। जब उन्हें तौरात के अहकाम क़बूल करने में दिक़्क़त हुई, तो अल्लाह ने उन पर पहाड़ को लटका दिया — जैसे कोई साया हो — और उन्हें मजबूर किया कि वे उसे क़बूल करें। यह उनके लिए एक बड़ी निशानी और चेतावनी थी कि अल्लाह का हुक्म टाला नहीं जा सकता।


फ़ायदे:

  1. अल्लाह की क़ुदरत का अंदाज़ा लगाओ — वह पहाड़ को उखाड़कर बादल की तरह लटका सकता है। जब वह किसी क़ौम से कोई अहद लेता है, तो उसे पूरा करने पर मजबूर कर सकता है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के हुक्मों को हल्के में न लें, बल्कि उन्हें पूरी गंभीरता से अपनाएँ।
  2. दीन को क़बूल करने में सुस्ती और हठधर्मी इंसान को मुसीबत में डाल सकती है। बनी इसराईल को पहाड़ के साए में ही होश आया। हमें चाहिए कि अल्लाह की हिदायत को खुशी और फ़ौरन क़बूल करें, बिना किसी दबाव के।
  3. किताबुल्लाह (क़ुरआन) को सिर्फ़ पढ़ना काफ़ी नहीं, बल्कि उसे "क़ुव्वत" यानी दृढ़ता और अमली कोशिश के साथ पकड़ना ज़रूरी है। यानी उस पर अमल करना, उसके अहकाम को अपनी ज़िंदगी में नाफ़िज़ करना।
  4. "ज़िक्र" का मतलब सिर्फ़ याद करना नहीं, बल्कि उस पर अमल करना और उसे कभी न भूलना है। जो किताब में है, उसे बार-बार पढ़ना, समझना और उसके मुताबिक़ चलना ही असली ज़िक्र है।
  5. तक़वा (परहेज़गारी) ही असली कामयाबी है — यह इंसान को अल्लाह के अज़ाब से बचाती है और उसे उसकी रहमत के क़रीब लाती है। यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून देती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 169-173 — अल-आराफ

169فَخَلَفَ مِن بَعْدِهِمْ خَلْفٌ وَرِثُوا الْكِتَابَ يَأْخُذُونَ عَرَضَ هَٰذَا الْأَدْنَىٰ وَيَقُولُونَ سَيُغْفَرُ لَنَا وَإِن يَأْتِهِمْ عَرَضٌ مِّثْلُهُ يَأْخُذُوهُ ۚ أَلَمْ يُؤْخَذْ عَلَيْهِم مِّيثَاقُ الْكِتَابِ أَن لَّا يَقُولُوا عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ وَدَرَسُوا مَا فِيهِ ۗ وَالدَّارُ الْآخِرَةُ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يَتَّقُونَ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
फिर उनके बाद कुछ जानशीन हुए जो किताब (ख़ुदा तौरैत) के तो वारिस बने (मगर लोगों के कहने से एहकामे ख़ुदा को बदलकर (उसके ऐवज़) नापाक कमीनी दुनिया के सामान ले लेते हैं (और लुत्फ तो ये है) कहते हैं कि हम तो अनक़रीब बख्श दिए जाएंगें (और जो लोग उन पर तान करते हैं) अगर उनके पास भी वैसा ही (दूसरा सामान आ जाए तो उसे ये भी न छोड़े और) ले ही लें क्या उनसे किताब (ख़ुदा तौरैत) का एहदो पैमान नहीं लिया गया था कि ख़ुदा पर सच के सिवा (झूठ कभी) नहीं कहेगें और जो कुछ उस किताब में है उन्होनें (अच्छी तरह) पढ़ लिया है और आख़िर का घर तो उन्हीं लोगों के वास्ते ख़ास है जो परहेज़गार हैं तो क्या तुम (इतना भी नहीं समझते)
170وَالَّذِينَ يُمَسِّكُونَ بِالْكِتَابِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجْرَ الْمُصْلِحِينَ
और जो लोग किताब (ख़ुदा) को मज़बूती से पकड़े हुए हैं और पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं (उन्हें उसका सवाब ज़रूर मिलेगा क्योंकि) हम हरगिज़ नेकोकारो का सवाब बरबाद नहीं करते
171۞ وَإِذْ نَتَقْنَا الْجَبَلَ فَوْقَهُمْ كَأَنَّهُ ظُلَّةٌ وَظَنُّوا أَنَّهُ وَاقِعٌ بِهِمْ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ
172وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِن بَنِي آدَمَ مِن ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۛ شَهِدْنَا ۛ أَن تَقُولُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَٰذَا غَافِلِينَ
और उसे रसूल वह वक्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे
173أَوْ تَقُولُوا إِنَّمَا أَشْرَكَ آبَاؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّن بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ الْمُبْطِلُونَ
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके
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अनुवाद — अल-आराफ 171

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Tuesday, August 18, 2026

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