अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अस्हाबुल आ'राफ: आ'राफ (ऊँची दीवार/पहाड़ी) वाले लोग। ये वे लोग हैं जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे।
- बिसीमाहुम: उनकी निशानियों से (चेहरे के कालेपन, आँखों की नीलापन आदि से)।
- मा अग़ना: कुछ भी काम न आया, कोई फायदा नहीं दिया।
- जम'उकुम: तुम्हारा (धन-दौलत, ऐश्वर्य और लोगों का) एकत्रित होना।
- तस्तकबिरून: घमंड/अहंकार करना (सत्य को स्वीकार करने से इनकार करना)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब जन्नत वाले जन्नत में दाखिल हो जाएँगे और जहन्नम वाले जहन्नम में, तो आ'राफ (ऊँची दीवार) पर खड़े लोग—जिनके नेकियाँ और गुनाह बराबर होंगे—वे जहन्नम के उन बड़े-बड़े सरदारों और काफिरों के नेताओं को देखेंगे, जिन्हें वे दुनिया में पहचानते थे। वे उन्हें उनकी खास निशानियों से पहचान लेंगे—उनके चेहरे काले होंगे, आँखें नीली होंगी, और उन पर जहन्नम की ज़िल्लत के निशान साफ़ होंगे।
तब आ'राफ वाले उनसे कहेंगे: "आज तुम्हारा वह धन-दौलत, वह ऐश्वर्य, वह तुम्हारे साथी और वह तुम्हारी बड़ी-बड़ी फौजें—जिन पर तुम्हें दुनिया में नाज़ था—तुम्हारे किसी काम न आईं। और न ही तुम्हारा वह घमंड और अहंकार तुम्हारे किसी काम आया, जिसकी वजह से तुम सत्य को स्वीकार करने से इनकार करते थे और अल्लाह के दीन को कबूल करने से मुँह मोड़ते थे। आज तुम्हारी सारी शक्ति, तुम्हारा सारा बल और तुम्हारा सारा गर्व—सब कुछ बेकार और नष्ट हो गया।"
यह एक बहुत बड़ी सीख है—वह दिन ऐसा दिन होगा जब दुनिया की सारी चीज़ें बेकार हो जाएँगी। केवल अल्लाह की रहमत और उसकी मर्ज़ी ही काम आएगी। जिसने दुनिया में अल्लाह के आगे सिर झुकाया, वही उस दिन कामयाब होगा। और जिसने दुनिया में घमंड किया, वह उस दिन सबसे ज़्यादा नुकसान में होगा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस चीज़ को सबसे बड़ी ताकत मानते हैं? क्या हमारा धन, हमारी औलाद, हमारी सामाजिक हैसियत और हमारा बड़प्पन हमें उस दिन काम आएगा? बिल्कुल नहीं! आज हमारे पास जो कुछ भी है—वह सब अल्लाह की देन है, और उसका सही इस्तेमाल यही है कि हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें। घमंड और अहंकार इंसान को सत्य से दूर कर देता है, और यही वह चीज़ है जो इंसान को जहन्नम तक ले जाती है। आइए, हम अपने दिलों से घमंड निकालें, अल्लाह के आगे झुकें, और अपने जीवन को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएँ—ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिन्हें यह कहना पड़े कि "काश हमने दुनिया में अल्लाह की इबादत की होती और घमंड न किया होता।"
📜 आयत 46-50 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 48
सूरा अल-आराफ आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा…सूरा आयत 48/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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