अल-आराफ · 49/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
أَهَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اللَّهُ بِرَحْمَةٍ ۚ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَ ۝٤٩
A haaa`ulaaa`il lazeena aqsamtum laa yanaaluhumul laahu birahma; udkhulul Jannata laa khawfun `alaikum wa laaa antum tahzanoon
📖 हिंदी अर्थ
जो तुम दुनिया में किया करते थे यही लोग वह हैं जिनकी निस्बत तुम कसमें खाया करते थे कि उन पर ख़ुदा (अपनी) रहमत न करेगा (देखो आज वही लोग हैं जिनसे कहा गया कि बेतकल्लुफ) बेहश्त में चलो जाओ न तुम पर कोई खौफ है और न तुम किसी तरह आर्ज़ुदा ख़ातिर परेशानी होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَقْسَمْتُمْ – तुमने क़सम खाई थी
  • لَا يَنَالُهُمُ – उन्हें नहीं मिलेगी / उन तक नहीं पहुँचेगी
  • بِرَحْمَةٍ – रहमत (दया) के साथ
  • لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ – न तुम्हें कोई भय होगा
  • وَلَا أَنْتُمْ تَحْزَنُونَ – और न ही तुम उदास होगे

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस दृश्य का वर्णन करती है जो आख़िरत में अहले आ'राफ़ (ऊँची दीवारों वालों) और जहन्नुमियों के बीच होगा। जब अहले आ'राफ़ के लोग उन अमीर और घमंडी काफ़िरों को देखेंगे जो दुनिया में ग़रीब और कमज़ोर मुसलमानों का मज़ाक उड़ाया करते थे और कहते थे कि ये लोग कभी जन्नत में नहीं जाएँगे, तो अल्लाह तआला उन काफ़िरों से फ़रमाएगा: "क्या यही वे लोग हैं जिनके बारे में तुम क़समें खाया करते थे कि अल्लाह इन पर कभी रहमत नहीं करेगा और इन्हें जन्नत में दाख़िल नहीं करेगा?" यह कहकर अल्लाह उन काफ़िरों को शर्मिंदा करेगा, क्योंकि आज वही ग़रीब और कमज़ोर मुसलमान जन्नत की नेमतों में होंगे, जबकि वे घमंडी लोग जहन्नम के अज़ाब में होंगे।

फिर अल्लाह तआला उन मोमिनों से फ़रमाएगा: "तुम जन्नत में दाख़िल हो जाओ, तुम्हारे लिए न कोई डर है और न ही कोई ग़म।" यानी आने वाले समय में तुम्हें किसी अज़ाब या सज़ा का भय नहीं होगा, और न ही तुम्हें दुनिया में छूटी हुई चीज़ों का मलाल होगा, क्योंकि जन्नत की नेमतें उन सब चीज़ों से कहीं बेहतर हैं जो दुनिया में थीं।

इस आयत में बड़ी सीख है कि अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़त का पैमाना माल और दौलत नहीं, बल्कि तक़वा और ईमान है। जो लोग दुनिया में कमज़ोर और ग़रीब नज़र आते हैं, वही अल्लाह के यहाँ प्यारे हो सकते हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि किसी को उसकी ज़ाहिरी हालत की वजह से हक़ीर न समझें, क्योंकि अल्लाह जिसे चाहता है अपनी रहमत से नवाज़ता है।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उस पर ईमान लाते हैं, उसके रसूल की पैरवी करते हैं और अच्छे काम करते हैं। दुनिया की दौलत और ऊँचे दर्जे किसी को अल्लाह के यहाँ बड़ा नहीं बना सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिल को अहंकार से पाक रखें और हर इंसान के साथ अच्छा सुलूक करें, क्योंकि शायद वही अल्लाह के यहाँ हमसे बेहतर हो।



📜 आयत 47-51 — सूरा अल-आराफ

47۞ وَإِذَا صُرِفَتْ أَبْصَارُهُمْ تِلْقَاءَ أَصْحَابِ النَّارِ قَالُوا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना
48وَنَادَىٰ أَصْحَابُ الْأَعْرَافِ رِجَالًا يَعْرِفُونَهُم بِسِيمَاهُمْ قَالُوا مَا أَغْنَىٰ عَنكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ
और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुई)
49أَهَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ أَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اللَّهُ بِرَحْمَةٍ ۚ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَ
जो तुम दुनिया में किया करते थे यही लोग वह हैं जिनकी निस्बत तुम कसमें खाया करते थे कि उन पर ख़ुदा (अपनी) रहमत न करेगा (देखो आज वही लोग हैं जिनसे कहा गया कि बेतकल्लुफ) बेहश्त में चलो जाओ न तुम पर कोई खौफ है और न तुम किसी तरह आर्ज़ुदा ख़ातिर परेशानी होगी
50وَنَادَىٰ أَصْحَابُ النَّارِ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ أَنْ أَفِيضُوا عَلَيْنَا مِنَ الْمَاءِ أَوْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ ۚ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى الْكَافِرِينَ
और दोज़ख वाले अहले बेहिश्त को (लजाजत से) आवाज़ देगें कि हम पर थोड़ा सा पानी ही उंडेल दो या जो (नेअमतों) खुदा ने तुम्हें दी है उसमें से कुछ (दे डालो दो तो अहले बेहिश्त जवाब में) कहेंगें कि ख़ुदा ने तो जन्नत का खाना पानी काफिरों पर कतई हराम कर दिया है
51الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَهُمْ لَهْوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ نَنسَاهُمْ كَمَا نَسُوا لِقَاءَ يَوْمِهِمْ هَٰذَا وَمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अल-आराफ 49

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Monday, September 28, 2026

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