Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِنَفْتِنَهُمْ – ताकि हम उन्हें परीक्षा में डालें (आज़माएँ)
- ذِكْرِ رَبِّهِ – अपने रब की याद (क़ुरआन और उसकी नसीहत)
- يَسْلُكْهُ – उसे दाखिल करेगा (डाल देगा)
- عَذَابًا صَعَدًا – सख्त और कठिन अज़ाब (ऐसा अज़ाब जो बहुत भारी और तकलीफ़देह हो)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर लोग (इंसान और जिन्न) सीधी राह पर चलते, यानी इस्लाम की राह को अपनाते और उस पर साबित क़दम रहते, तो हम उन पर खूब बारिश बरसाते और उन्हें दुनिया में खूब रिज़्क़ (रोज़ी) देते। मगर यह रिज़्क़ और नेअमतें सिर्फ़ उनके लिए नहीं, बल्कि यह एक इम्तिहान (परीक्षा) है — ताकि हम देखें कि वे इन नेअमतों का शुक्र अदा करते हैं या नाशुक्री करते हैं। यानी अल्लाह की दी हुई नेअमतें हमारे लिए आज़माइश का ज़रिया हैं, कि हम उन्हें देखकर अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं या ग़ाफ़िल हो जाते हैं।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और जो कोई अपने रब की याद से मुँह मोड़ेगा" — यानी जो क़ुरआन से, उसकी नसीहतों से, और अल्लाह की इबादत से इंकार करेगा और उस पर अमल नहीं करेगा — "तो अल्लाह उसे सख्त अज़ाब में डाल देगा।" यानी उसे ऐसे अज़ाब में दाखिल किया जाएगा जो बहुत कठिन, भारी और बर्दाश्त से बाहर हो। यह अज़ाब उसके गुनाहों का नतीजा होगा, और यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि जो उसकी याद से दूर भागा, उसे ऐसी जगह डाला जाए जहाँ से निकलना मुश्किल हो।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है। अल्लाह तआला ने हमें जो रिज़्क़, सेहत, औलाद, और दूसरी नेअमतें दी हैं, यह सब हमारे लिए इम्तिहान हैं। हमें चाहिए कि इन नेअमतों को देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करें, उसकी इबादत में लगे रहें, और उसके क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन अल्लाह की याद है, और जो इसे छोड़ देता है, वह अपने लिए तकलीफ़ का रास्ता चुनता है। अल्लाह की याद में ही दिलों को सुकून है, और उसकी राह पर चलने में ही दुनिया और आख़िरत की भलाई है। आइए, हम सब अल्लाह की याद को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ताकि हम दुनिया में खुशहाल रहें और आख़िरत में अज़ाब से महफ़ूज़ रहें।
📜 आयत 15-19 — सूरा अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 17
सूरा अल-जिन्न आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि उससे उनकी आज़माईश करें और जो शख़्श अपने परवरदिगार…सूरा आयत 17/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जिन्न
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


