अल-जिन्न · 24/28
अनुवाद उच्चारण — अल-जिन्न
حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ أَضْعَفُ نَاصِرًا وَأَقَلُّ عَدَدًا ۝٢٤
Hattaaa izaa ra aw maa yoo`adoona fasaya`lamoona man ad`afu naasiranw wa aqallu `adadaa
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब ये लोग उन चीज़ों को देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया जाता है तो उनको मालूम हो जाएगा कि किसके मददगार कमज़ोर और किसका शुमार कम है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا – यहाँ तक कि जब वे देख लेंगे
  • مَا يُوعَدُونَ – जिस चीज़ का उन्हें वादा किया गया है (अर्थात् अज़ाब)
  • فَسَيَعْلَمُونَ – तो वे अवश्य जान लेंगे
  • أَضْعَفُ نَاصِرًا – मददगार के रूप में सबसे कमज़ोर
  • أَقَلُّ عَدَدًا – संख्या में सबसे कम

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन को चेतावनी दे रहे हैं कि वे अपने कुफ्र और इनकार पर डटे रहें, लेकिन अंतिम फैसला उस दिन होगा जब वे उस अज़ाब को अपनी आँखों से देख लेंगे जिसका उन्हें वादा किया गया था। यह अज़ाब क़यामत के दिन का अज़ाब होगा, या दुनिया में आने वाली मुसीबतें और तबाही, या मौत के वक़्त का अज़ाब। जब वह समय आएगा, तो उन्हें सच्चाई का पता चल जाएगा।

उस दिन वे जान लेंगे कि असल में कौन कमज़ोर है – क्या वे और उनके बुत और उनके सहायक, या अल्लाह के नबी और मोमिनीन? वे देखेंगे कि उनके तमाम झूठे सहारे और मददगार उनके किसी काम न आएँगे, और उनकी तादाद चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न हो, वे अल्लाह के अज़ाब के सामने बिल्कुल बेबस और निहत्थे होंगे। जबकि मोमिनीन की तादाद चाहे कम हो, लेकिन उनका नस्र अल्लाह की तरफ से है, और अल्लाह ही बेहतर मददगार और बेहतर फ़तह देने वाला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमानवालों को कभी अपनी कम तादाद से डरना नहीं चाहिए। अल्लाह की मदद उसके बंदों के साथ होती है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों। इतिहास गवाह है कि बद्र के मैदान में तीन सौ तेरह मुसलमानों ने हज़ारों के लश्कर को शिकस्त दी, क्योंकि उनके साथ अल्लाह की ताईद थी। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उनके लिए यह काफी है कि अल्लाह उनका संरक्षक और मददगार है। और जो लोग अल्लाह के दुश्मन हैं, उनकी ताकत और तादाद चाहे कितनी ही बड़ी हो, अंजाम में वही कमज़ोर और नाकाम होंगे।



📜 आयत 22-26 — अल-जिन्न

22قُلْ إِنِّي لَن يُجِيرَنِي مِنَ اللَّهِ أَحَدٌ وَلَنْ أَجِدَ مِن دُونِهِ مُلْتَحَدًا
(ये भी) कह दो कि मुझे ख़ुदा (के अज़ाब) से कोई भी पनाह नहीं दे सकता और न मैं उसके सिवा कहीं पनाह की जगह देखता हूँ
23إِلَّا بَلَاغًا مِّنَ اللَّهِ وَرِسَالَاتِهِ ۚ وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ لَهُ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا
ख़ुदा की तरफ से (एहकाम के) पहुँचा देने और उसके पैग़ामों के सिवा (कुछ नहीं कर सकता) और जिसने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफरमानी की तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम की आग है जिसमें वह हमेशा और अबादुल आबाद तक रहेगा
24حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ أَضْعَفُ نَاصِرًا وَأَقَلُّ عَدَدًا
यहाँ तक कि जब ये लोग उन चीज़ों को देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया जाता है तो उनको मालूम हो जाएगा कि किसके मददगार कमज़ोर और किसका शुमार कम है
25قُلْ إِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ مَّا تُوعَدُونَ أَمْ يَجْعَلُ لَهُ رَبِّي أَمَدًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं नहीं जानता कि जिस दिन का तुमसे वायदा किया जाता है क़रीब है या मेरे परवरदिगार ने उसकी मुद्दत दराज़ कर दी है
26عَالِمُ الْغَيْبِ فَلَا يُظْهِرُ عَلَىٰ غَيْبِهِ أَحَدًا
(वही) ग़ैबवॉ है और अपनी ग़ैब की बाते किसी पर ज़ाहिर नहीं करता
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अनुवाद — अल-जिन्न 24

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Tuesday, August 18, 2026

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