अल-जिन्न · 25/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जिन्न
قُلْ إِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ مَّا تُوعَدُونَ أَمْ يَجْعَلُ لَهُ رَبِّي أَمَدًا ۝٢٥
Qul in adreee a qareebum maa too`adoona am yaj`alu lahoo rabbeee amadaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं नहीं जानता कि जिस दिन का तुमसे वायदा किया जाता है क़रीब है या मेरे परवरदिगार ने उसकी मुद्दत दराज़ कर दी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنْ أَدْرِي: मैं नहीं जानता।
  • مَا تُوعَدُونَ: जिस (अज़ाब) का तुमसे वादा किया जा रहा है।
  • أَمَدًا: एक निश्चित अवधि, लंबा समय।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए जो क़ियामत और अज़ाब के आने को दूर की बात समझते हैं और उसका मज़ाक उड़ाते हैं: "मैं नहीं जानता कि जिस अज़ाब का तुमसे वादा किया जा रहा है, वह बहुत करीब है या मेरा रब उसके लिए कोई लंबी अवधि निर्धारित करेगा।" यह बात सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है, क्योंकि वही ग़ैब का जानने वाला है। उसके इल्म में हर चीज़ शामिल है—चाहे वह जल्दी आए या देर से, सब कुछ उसी की मर्ज़ी और हिक्मत पर मुनहसिर है।

यहाँ एक बड़ी हिक्मत यह है कि अल्लाह ने अपने नबी को यह सिखाया कि ग़ैब की बातों के बारे में यक़ीन के साथ कुछ कहना नहीं चाहिए, बल्कि इल्म को अल्लाह के सुपुर्द कर देना चाहिए। यह ईमान वालों के लिए एक अज़ीम सबक़ है कि हमें उन चीज़ों के बारे में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए जो अल्लाह के इख्तियार में हैं। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका अज़ाब उस वक़्त आएगा जब वह चाहेगा—चाहे वह करीब हो या दूर।

मोमिन का काम यह है कि वह अल्लाह के वादों पर पूरा यक़ीन रखे, उसकी रहमत की उम्मीद करे और उसके अज़ाब से डरे। अल्लाह ने अपने रसूल को यह भी बताया कि वह अपने चुने हुए रसूलों पर ग़ैब के कुछ राज़ खोलता है, ताकि वे लोगों को सच्चाई से आगाह कर सकें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें कुरआन के ज़रिए वह सब कुछ बता दिया है जो हमारी भलाई के लिए ज़रूरी है—चाहे वह दुनिया से मुताल्लिक हो या आख़िरत से।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अल्लाह के वादों पर भरोसा रखें और उसकी तरफ़ रुजू करें। क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, और उस दिन हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा। जो लोग उस दिन को झुठलाते हैं, वे सिर्फ़ अपने नुक़सान का सामान कर रहे हैं। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्ची समझ अता करे और उसके दीन पर साबित-क़दम रखे। आमीन।



📜 आयत 23-27 — सूरा अल-जिन्न

23إِلَّا بَلَاغًا مِّنَ اللَّهِ وَرِسَالَاتِهِ ۚ وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ لَهُ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا
ख़ुदा की तरफ से (एहकाम के) पहुँचा देने और उसके पैग़ामों के सिवा (कुछ नहीं कर सकता) और जिसने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफरमानी की तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम की आग है जिसमें वह हमेशा और अबादुल आबाद तक रहेगा
24حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ أَضْعَفُ نَاصِرًا وَأَقَلُّ عَدَدًا
यहाँ तक कि जब ये लोग उन चीज़ों को देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया जाता है तो उनको मालूम हो जाएगा कि किसके मददगार कमज़ोर और किसका शुमार कम है
25قُلْ إِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ مَّا تُوعَدُونَ أَمْ يَجْعَلُ لَهُ رَبِّي أَمَدًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं नहीं जानता कि जिस दिन का तुमसे वायदा किया जाता है क़रीब है या मेरे परवरदिगार ने उसकी मुद्दत दराज़ कर दी है
26عَالِمُ الْغَيْبِ فَلَا يُظْهِرُ عَلَىٰ غَيْبِهِ أَحَدًا
(वही) ग़ैबवॉ है और अपनी ग़ैब की बाते किसी पर ज़ाहिर नहीं करता
27إِلَّا مَنِ ارْتَضَىٰ مِن رَّسُولٍ فَإِنَّهُ يَسْلُكُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ رَصَدًا
मगर जिस पैग़म्बर को पसन्द फरमाए तो उसके आगे और पीछे निगेहबान फरिश्ते मुक़र्रर कर देता है
अल-जिन्नकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अल-जिन्न 25

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Wednesday, September 30, 2026

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