अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُدْخِلُ – वह दाखिल करता है
- رَحْمَتِهِ – अपनी रहमत (दया) में
- الظَّالِمِينَ – अत्याचारियों को (जो कुफ्र और गुनाह करके अपनी जान पर ज़ुल्म करते हैं)
- أَعَدَّ – तैयार कर रखा है
- عَذَابًا أَلِيمًا – दर्दनाक अज़ाब
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि वह अपनी रहमत से जिसे चाहता है नवाज़ता है। यह रहमत उन मोमिनों के लिए है जो ईमान लाते हैं, नेक अमल करते हैं और अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) को अपनाते हैं। अल्लाह उन्हें हिदायत देकर अपनी रहमत में दाखिल कर लेता है, यानी उन्हें ईमान और नेक कामों की तौफीक देता है, और आखिरत में उन्हें जन्नत और अपनी रिज़़वान (खुशी) अता करता है। यह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है जो वह अपने बंदों में से जिस पर चाहता है फरमाता है।
लेकिन जो लोग ज़ुल्म करते हैं—यानी कुफ्र और शिर्क करके, अल्लाह की आयतों को झुठलाकर और उसकी हदों से तजावुज़ करके अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं—उनके लिए अल्लाह ने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है, जो आखिरत में उन्हें मिलेगा। यह अज़ाब जहन्नम की आग है, जो बेहद सख्त और दर्दनाक है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी (विस्तृत) है, और वह अपने बंदों पर मेहरबान है। वह चाहता है कि लोग ईमान लाएँ और उसकी रहमत से फायदा उठाएँ। लेकिन साथ ही वह इंसाफ करने वाला भी है, और ज़ालिमों को उनके किए की सज़ा देगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़ें, उसकी इताअत करें, और ज़ुल्म और कुफ्र से बचें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है—दुनिया में इज़्ज़त और आखिरत में जन्नत। अल्लाह की रहमत से निराश न हों, क्योंकि उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करने की।
📜 आयत 29-31 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 31
सूरा अल-इंसान आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों…सूरा आयत 31/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 29–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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