अल-इंसान · 31/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
يُدْخِلُ مَن يَشَاءُ فِي رَحْمَتِهِ ۚ وَالظَّالِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا ۝٣١
Yudkhilu mai yashaaa`u fee rahmatih; wazzaalimeena a`adda lahum `azaaban aleemaa
📖 हिंदी अर्थ
जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُدْخِلُ – वह दाखिल करता है
  • رَحْمَتِهِ – अपनी रहमत (दया) में
  • الظَّالِمِينَ – अत्याचारियों को (जो कुफ्र और गुनाह करके अपनी जान पर ज़ुल्म करते हैं)
  • أَعَدَّ – तैयार कर रखा है
  • عَذَابًا أَلِيمًا – दर्दनाक अज़ाब

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि वह अपनी रहमत से जिसे चाहता है नवाज़ता है। यह रहमत उन मोमिनों के लिए है जो ईमान लाते हैं, नेक अमल करते हैं और अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) को अपनाते हैं। अल्लाह उन्हें हिदायत देकर अपनी रहमत में दाखिल कर लेता है, यानी उन्हें ईमान और नेक कामों की तौफीक देता है, और आखिरत में उन्हें जन्नत और अपनी रिज़़वान (खुशी) अता करता है। यह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है जो वह अपने बंदों में से जिस पर चाहता है फरमाता है।

लेकिन जो लोग ज़ुल्म करते हैं—यानी कुफ्र और शिर्क करके, अल्लाह की आयतों को झुठलाकर और उसकी हदों से तजावुज़ करके अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं—उनके लिए अल्लाह ने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है, जो आखिरत में उन्हें मिलेगा। यह अज़ाब जहन्नम की आग है, जो बेहद सख्त और दर्दनाक है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी (विस्तृत) है, और वह अपने बंदों पर मेहरबान है। वह चाहता है कि लोग ईमान लाएँ और उसकी रहमत से फायदा उठाएँ। लेकिन साथ ही वह इंसाफ करने वाला भी है, और ज़ालिमों को उनके किए की सज़ा देगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़ें, उसकी इताअत करें, और ज़ुल्म और कुफ्र से बचें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है—दुनिया में इज़्ज़त और आखिरत में जन्नत। अल्लाह की रहमत से निराश न हों, क्योंकि उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-31 — अल-इंसान

29إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
बेशक ये कुरान सरासर नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह ले
30وَمَا تَشَاءُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग कुछ भी चाह नहीं सकते बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार दाना है
31يُدْخِلُ مَن يَشَاءُ فِي رَحْمَتِهِ ۚ وَالظَّالِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
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अनुवाद — अल-इंसान 31

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Tuesday, August 18, 2026

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