अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَشَاءُونَ: तुम चाहते हो, इच्छा करते हो
- يَشَاءَ اللهُ: अल्लाह की इच्छा और मर्ज़ी
- عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखने वाला
- حَكِيمًا: अत्यंत तत्वदर्शी, हर काम में गहरी समझ और हिकमत रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुकर्रमा हमें एक बहुत बड़ी और बुनियादी हक़ीक़त से रूबरू कराती है — कि इस कायनात में इंसान की मर्ज़ी और इच्छा पूरी तरह से अल्लाह की मर्ज़ी के ताबे है। इंसान चाहे जितना चाहे, चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन जब तक अल्लाह न चाहे, कुछ भी नहीं हो सकता। यही तौहीद का असली तक़ाज़ा है — यह मानना कि हर चीज़ का मालिक और इख्तियार रखने वाला सिर्फ़ अल्लाह है।
इस आयत का मतलब यह है कि तुम लोग नेक राह पर चलना, अल्लाह की रज़ा हासिल करना और उसकी मग़फिरत का रास्ता अपनाना चाहते हो — लेकिन यह इच्छा भी तभी फल देती है जब अल्लाह की मर्ज़ी उसके साथ हो। अल्लाह ने इंसान को इख्तियार दिया है, लेकिन वह इख्तियार भी अल्लाह की मशीयत के दायरे में है। यानी अल्लाह की रहमत और तौफ़ीक़ के बग़ैर इंसान कुछ नहीं कर सकता।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक अल्लाह सब कुछ जानने वाला और हिकमत वाला है।" यानी अल्लाह जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या बेहतर है और क्या नहीं। वह जो चाहता है, अपनी हिकमत के मुताबिक़ चाहता है। उसका हर फ़ैसला अदल और हिकमत पर आधारित है। वह जानता है कि किसे हिदायत देनी है और किसे उसकी हालत पर छोड़ देना है। उसका इल्म हर ज़र्रे तक फैला हुआ है और उसकी हिकमत हर काम में ज़ाहिर है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी तमाम उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखें। जब हम कोई नेक काम करना चाहें, तो पहले अल्लाह से तौफ़ीक़ की दुआ करें, क्योंकि असली तौफ़ीक़ उसी के हाथ में है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — कि अल्लाह अपने बंदों की भलाई चाहता है और जो उसकी तरफ़ दिल लगाता है, अल्लाह उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है। अल्लाह ने हमें आज़ादी दी है कि हम चुनें — लेकिन सच्ची कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की मर्ज़ी के मुताबिक़ चले। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की। याद रखिए, अल्लाह की मर्ज़ी के बग़ैर एक पत्ता भी नहीं हिलता, और जब अल्लाह किसी की भलाई चाहता है, तो उसे हिदायत के रास्ते पर चला देता है। आइए, हम अपनी हर इच्छा को अल्लाह की रज़ा के ताबे करें और उससे तौफ़ीक़ की दुआ करते रहें।
📜 आयत 28-31 — अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 30
सूरा अल-इंसान आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग…सूरा आयत 30/31 — अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इंसान सुनें, अल-इंसान अनुवाद, अल-इंसान mp3, अल-इंसान pdf. आयत 28–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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