अन-नाज़ियात · 32/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا ۝٣٢
Wal jibala arsaaha
📖 हिंदी अर्थ
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अरसाहा: उन्हें (पहाड़ों को) मज़बूती से जमा दिया, स्थिर कर दिया।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत के नमूनों में से एक और नमूना बयान कर रहे हैं। उन्होंने पहाड़ों को धरती पर इस तरह गाड़ दिया है जैसे खूँटे गाड़े जाते हैं। पहाड़ धरती की सतह को मज़बूती देते हैं, उसे टूटने-बिखरने से बचाते हैं, और ज़मीन को जमा रखते हैं ताकि वह अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं। यह अल्लाह की उस महान शक्ति का प्रमाण है जिसने धरती को पालने की तरह बिछाया और पहाड़ों को मेखों (खूँटों) की तरह गाड़ दिया।

यह वही अल्लाह है जिसने आसमान को ऊँचा उठाया, उसे सँवारा, रात को अंधेरा और दिन को उजाला दिया, और फिर धरती को फैलाकर उसमें पहाड़ों को जमा दिया। यह सब कुछ उसने इंसान की भलाई और उसके आराम के लिए किया। जब अल्लाह के लिए यह सब कुछ बनाना आसान था, तो क़यामत के दिन इंसानों को दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए कहीं ज़्यादा आसान है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी और अद्भुत रचना की है, उसकी शक्ति के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। हमें चाहिए कि उसकी नेमतों पर ग़ौर करें, उसके एहसानों को याद रखें और उसी की इबादत करें। पहाड़ों की मज़बूती हमें यही सबक देती है कि हम भी अपने ईमान में मज़बूत रहें, दीन के मामले में स्थिर रहें, और अल्लाह की याद से कभी विचलित न हों। यह दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है, और असली कामयाबी उस दिन मिलेगी जब हम अपने रब के सामने हाज़िर होंगे।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अन-नाज़ियात

30وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
31أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
32وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
33مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
34فَإِذَا جَاءَتِ الطَّامَّةُ الْكُبْرَىٰ
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 32

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Tuesday, August 18, 2026

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