अन-नाज़ियात · 31/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا ۝٣١
Akhraja minha maa-aha wa mar `aaha
📖 हिंदी अर्थ
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَاءَهَا: उसका पानी (यानी धरती से निकलने वाले सोते, चश्मे और झरने)।
  • مَرْعَاهَا: उसकी चराई (यानी वनस्पति और घास जो जानवर चरते हैं)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के नमूने पेश किए हैं और बताया है कि उसने धरती को बिछाने के बाद उससे उसका पानी और चारा निकाला। यानी उसने ज़मीन से सोते और चश्मे जारी किए, जिससे पानी के चश्मे फूट निकले और नदियाँ बहने लगीं। फिर उसी पानी के ज़रिए उसने तरह-तरह की वनस्पति, घास और चारे उगाए, ताकि इंसान और जानवर सब अपनी गुज़ारा कर सकें। यह अल्लाह की रहमत और कुदरत की निशानी है कि उसने बेजान ज़मीन से ये जीवन देने वाली चीज़ें पैदा कीं।

यहाँ अल्लाह तआला इंसानों को याद दिला रहा है कि जिसने यह सब कुछ पैदा किया, वही उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब उसके लिए यह सब बनाना आसान था, तो उसे दोबारा उठाना क्यों मुश्किल होगा? यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब की नेमतों पर ग़ौर करें और उसके एहसानों का शुक्र अदा करें। हमारे खाने की हर निवाला, पीने की हर बूँद — सब उसी की देन है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इन नेमतों को पहचानें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। जो रब इतना क़ादिर और मेहरबान है, उससे हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। वही हमारी मदद करने वाला और हमारी हाजतें पूरी करने वाला है। याद रखें, यह दुनिया की ज़िंदगी आज़माइश है, और असली कामयाबी उस दिन होगी जब हम अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करें।



📜 आयत 29-33 — सूरा अन-नाज़ियात

29وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
30وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
31أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
32وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
33مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
अन-नाज़ियातकुरान सूची
46आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 31

सूरा अन-नाज़ियात आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला

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Monday, September 28, 2026

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