अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَاءَهَا: उसका पानी (यानी धरती से निकलने वाले सोते, चश्मे और झरने)।
- مَرْعَاهَا: उसकी चराई (यानी वनस्पति और घास जो जानवर चरते हैं)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के नमूने पेश किए हैं और बताया है कि उसने धरती को बिछाने के बाद उससे उसका पानी और चारा निकाला। यानी उसने ज़मीन से सोते और चश्मे जारी किए, जिससे पानी के चश्मे फूट निकले और नदियाँ बहने लगीं। फिर उसी पानी के ज़रिए उसने तरह-तरह की वनस्पति, घास और चारे उगाए, ताकि इंसान और जानवर सब अपनी गुज़ारा कर सकें। यह अल्लाह की रहमत और कुदरत की निशानी है कि उसने बेजान ज़मीन से ये जीवन देने वाली चीज़ें पैदा कीं।
यहाँ अल्लाह तआला इंसानों को याद दिला रहा है कि जिसने यह सब कुछ पैदा किया, वही उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब उसके लिए यह सब बनाना आसान था, तो उसे दोबारा उठाना क्यों मुश्किल होगा? यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब की नेमतों पर ग़ौर करें और उसके एहसानों का शुक्र अदा करें। हमारे खाने की हर निवाला, पीने की हर बूँद — सब उसी की देन है।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इन नेमतों को पहचानें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। जो रब इतना क़ादिर और मेहरबान है, उससे हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। वही हमारी मदद करने वाला और हमारी हाजतें पूरी करने वाला है। याद रखें, यह दुनिया की ज़िंदगी आज़माइश है, और असली कामयाबी उस दिन होगी जब हम अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करें।
📜 आयत 29-33 — अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 31
सूरा अन-नाज़ियात आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकालासूरा आयत 31/46 — अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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